मैडम ने ऑफिस जाने के लिए Rapido बुक की, सफर पूरा किया और जब किराया देने की बारी आई तो कथित तौर पर बिना पैसे दिए जाने लगीं।
ड्राइवर ने जब अपनी मेहनत का पैसा मांगा,तो विवाद शुरू हो गया।
सवाल सीधा है—क्या महिला होने का मतलब यह है कि कोई भी कुछ भी कर सकती है?
एक Rapido ड्राइवर दिनभर मेहनत करके अपने परिवार का पेट पालता है।उसके लिए ये चंद रुपये नहीं,बल्कि उसके बच्चों की रोटी और घर का खर्च हैं।
बराबरी की बात करने वालों को जिम्मेदारी भी बराबर निभानी चाहिए। किसी के शौक और सुविधा के लिए किसी गरीब की मेहनत की कमाई छीनना बिल्कुल गलत है।
नारी सम्मान अपनी जगह,लेकिन गलत को गलत कहना भी जरूरी है!
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