निराला जैन भवन में संवत्सरी महापर्व श्रद्धा व उल्लास से संपन्न: आचार्य डॉ. दिव्यानंद ने स्वयं किया केश लोच, श्रद्धालुओं ने ली क्षमायाचना की प्रेरणा
#लालबहादुर_भाखर #BreakingNews
पीलीबंगा:- पीलीबंगा कस्बे में स्थानीय निराला जैन भवन में चातुर्मास के अंतर्गत पर्वाधिराज पर्युषण का समापन दिवस 'संवत्सरी महापर्व' पूर्ण श्रद्धा, भक्तिभाव और आध्यात्मिक वातावरण में मनाया गया। इस पावन अवसर पर जैन आचार्य डॉ. दिव्यानंद महाराज (निराले बाबा) के सानिध्य में विशेष धार्मिक अनुष्ठान और सामूहिक सामायिक-प्रतिक्रमण के कार्यक्रम आयोजित किए गए।
महापर्व के अवसर पर आचार्यश्री ने जैन मुनि परंपरा की कठोर साधना का प्रत्यक्ष परिचय देते हुए अपने सिर, दाढ़ी और मूंछ के बालों का स्वयं लोच (केश लोचन) किया। उपस्थित विशाल जनसमूह ने उनकी इस अप्रतिम सहनशीलता, देहाध्यास मुक्ति और दृढ़ आत्मबल को नमन किया।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए निराले बाबा आचार्य डॉ. दिव्यानंद महाराज ने केश लोच की आध्यात्मिक पृष्ठभूमि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जैन धर्म में केश लोचन की परंपरा भगवान महावीर के काल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनसे भी पूर्व के तीर्थंकरों के समय से निरंतर चली आ रही है।
लोच साधक के भीतर पूर्ण स्वावलंबन और आत्मनिर्भरता का संचार करता है। यह शारीरिक कष्टों से परे उठकर इंद्रिय-निग्रह और मानसिक दृढ़ता को सिद्ध करने का सर्वोच्च माध्यम है। जब साधक बिना किसी यंत्र या साधन के स्वयं कष्ट सहता है, तब उसका आत्मबल और साधना का मनोबल कई गुना बढ़ जाता है।
संवत्सरी के मुख्य सत्र में श्रावक-श्राविकाओं ने सामूहिक प्रतिक्रमण कर वर्ष भर में जाने-अनजाने में हुए पापों व गलतियों का प्रायश्चित किया। सभा के अंत में श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे के सम्मुख हाथ जोड़कर 'मिच्छामि दुक्कड़म' कहते हुए हृदय से क्षमायाचना की और वैर-भाव त्यागने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में स्थानीय जैन श्वेतांबर व दिगंबर समाज सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में गणमान्य लोग व धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।
Pilibanga, Hanumangarh | Sep 15, 2026