रास्ते पर तीन दीवारें खड़ी कर दबंगई का आरोप, पीड़ित बोला—न्याय नहीं मिला तो डीएम कार्यालय पर करूंगा आत्मदाह
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#हरदोई: अधिकारियों की कथित उदासीनता और स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने से आहत एक पीड़ित ने अब जिलाधिकारी कार्यालय पर आत्मदाह करने की चेतावनी दी है। मामला मल्लावां थाना क्षेत्र के ग्राम मझियाई जाफरपुर का है, जहां आबादी के पुराने रास्ते को कथित रूप से दीवारें खड़ी कर बंद किए जाने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित राजपाल सिंह पुत्र महादेव सिंह का कहना है कि रास्ते को लेकर वह लंबे समय से अधिकारियों और पुलिस के चक्कर लगा रहा है, लेकिन कार्रवाई के बावजूद दबंगई करने वालों के हौसले बुलंद हैं।
पीड़ित के मुताबिक उसके मकान के पड़ोस में गांव निवासी हरिनाम सिंह पुत्र शारदा बख्श सिंह तथा अनुज सिंह, हरिओम सिंह और अमन सिंह उर्फ नन्हू सिंह पुत्रगण हरिनाम सिंह के मकान हैं। आरोप है कि पुरानी नाराजगी के चलते विपक्षी आए दिन आबादी के रास्ते में ट्रैक्टर खड़ा कर देते थे और रघुवीर बढ़ई की गाय-भैंस बंधवाकर रास्ता पूरी तरह बंद कर देते थे। पीड़ित का कहना है कि कई बार शिकायत के बाद पुलिस ने मौके पर पहुंचकर रास्ता खुलवाया। उक्त रास्ते में कई वर्षों पुरानी बिजली लाइन और पोल भी मौजूद होने की बात कही गई है।
पीड़ित के अनुसार स्थानीय स्तर पर बेहतर सुनवाई न होने के बाद वह गोरखपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचा और कार्रवाई की मांग की। इसके बाद थाना दिवस में उपजिलाधिकारी, राजस्व विभाग और पुलिस की मौजूदगी में दोनों पक्षों से जुड़े लोगों के बयान लिए गए।
पीड़ित के अनुसार मकान का बैनामा करने वाले सियाराम गुप्ता ने अधिकारियों के समक्ष बयान दिया कि उन्होंने मकान का बैनामा किया था, रास्ते का नहीं। उन्होंने यह भी बताया कि मकान के दक्षिण में पुश्तैनी पुराना रास्ता मौजूद है और रास्ते की नाप गलत लिखाई गई है।
पीड़ित का दावा है कि इसी बयान के आधार पर बिलग्राम उपजिलाधिकारी, नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग की टीम ने 24 जुलाई 2026 को पुलिस की मौजूदगी में रास्ते से ट्रैक्टर और जानवर हटवाकर निसार अली की दीवार के सामने से रास्ता साफ कराया था। इसके बाद कुछ समय तक रास्ते पर आवागमन सुचारु रूप से चलता रहा।
राजपाल सिंह का आरोप है कि 11 अगस्त की रात करीब एक बजे अनुज सिंह, हरिओम सिंह, अमन सिंह उर्फ नन्हू सिंह, अर्जुन सिंह पुत्र समरपाल सिंह, सुमित सिंह पुत्र सरवन सिंह, बुधपाल सिंह समेत अन्य लोगों ने बाहरी 25-30 लोगों को बुलाकर कथित रूप से रास्ते में तीन दीवारें खड़ी कर दीं और आवागमन पूरी तरह बंद कर दिया।
पीड़ित का आरोप है कि विरोध करने पर उसे और उसके पुत्र को जान से मारने की धमकी दी गई। घटना की सूचना डायल-112 पर दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पीड़ित का आरोप है कि निर्माण कार्य नहीं रुकवाया गया और दीवारें बनती रहीं।
पीड़ित के अनुसार घटना के बाद वह थाने पहुंचकर शिकायती पत्र देना चाहता था, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने उसकी शिकायत लेने के बजाय उसे ही डांट-फटकार कर वापस कर दिया। पीड़ित का कहना है कि उसे यह कहकर लौटा दिया गया कि मामला राजस्व विभाग से संबंधित है और कार्रवाई के लिए ऊपर जाए।
राजपाल सिंह का कहना है कि वह न्याय की उम्मीद में पुलिस, राजस्व विभाग और उच्चाधिकारियों तक अपनी फरियाद लेकर पहुंच चुका है, लेकिन रास्ता बंद करने का काम नहीं रुक सका। उनका आरोप है कि एक ओर सरकार भूमि और निकास मार्गों को कब्जामुक्त कराने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर अधिकारी उनकी शिकायत सुनने को तैयार नहीं हैं।
लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाने से आक्रोशित पीड़ित राजपाल सिंह ने कहा कि यदि उसे न्याय नहीं मिला और रास्ता कब्जामुक्त नहीं कराया गया तो वह जिलाधिकारी कार्यालय पर आत्मदाह करने को मजबूर होगा। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराकर पुराने रास्ते को तत्काल कब्जामुक्त कराया जाए, धमकी देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए और भविष्य में रास्ता बंद करने की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज