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हरदोई:

नई शिक्षा नीति के दावों की खुली पोल: कमलापुर प्राथमिक विद्यालय में एक कमरे में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, नई बिल्डिंग का इंतजार खत्म नहीं
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#हरदोई: प्रदेश सरकार नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और मॉडल स्वरूप देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर विद्यालयों का कायाकल्प, स्मार्ट क्लास, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। लेकिन जनपद हरदोई के विकासखंड कोथावां अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय कमलापुर की जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई बयां कर रही है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय के दो कक्ष जर्जर होने के कारण बीते वर्ष कंडम घोषित कर ध्वस्त कर दिए गए थे। इसके बाद नई बिल्डिंग निर्माण का आश्वासन तो मिला, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। परिणामस्वरूप विद्यालय में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं को एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों का शैक्षिक स्तर भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है।
स्थिति यह है कि विद्यालय परिसर में हल्की बारिश होते ही जलभराव हो जाता है। बच्चों को विद्यालय आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विद्यालय के मुख्य द्वार पर गंदगी का अंबार लगा रहता है, जिससे स्वच्छ विद्यालय और स्वस्थ वातावरण की सरकारी योजनाएं भी सवालों के घेरे में हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के शिक्षकों ने कई बार विभागीय अधिकारियों को नई बिल्डिंग निर्माण के संबंध में अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। महीनों बीत गए, फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। इससे साफ प्रतीत होता है कि शिक्षा विभाग की कार्यशैली और प्रशासनिक शिथिलता के कारण मासूम बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात करती है, तब एक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के सिर पर पर्याप्त छत तक उपलब्ध न होना बेहद चिंताजनक है। करोड़ों रुपये की योजनाओं के बीच कमलापुर विद्यालय की यह तस्वीर सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालय की नई बिल्डिंग का निर्माण शीघ्र शुरू कराया जाए, परिसर में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था की जाए तथा मुख्य द्वार और आसपास फैली गंदगी को तत्काल साफ कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सके।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक कमलापुर के नौनिहाल एक कमरे में ठूंस-ठूंस कर पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे? नई शिक्षा नीति और 'स्कूलों के कायाकल्प' के सरकारी दावों का वास्तविक लाभ इन बच्चों तक कब पहुंचेगा? यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई तो शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

नई शिक्षा नीति के दावों की खुली पोल: कमलापुर प्राथमिक विद्यालय में एक कमरे में पढ़ने को मजबूर नौनिहाल, नई बिल्डिंग का इंतजार खत्म नहीं . #हरदोई: प्रदेश सरकार नई शिक्षा नीति के तहत प्राथमिक शिक्षा को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और मॉडल स्वरूप देने के बड़े-बड़े दावे कर रही है। करोड़ों रुपये खर्च कर विद्यालयों का कायाकल्प, स्मार्ट क्लास, बेहतर आधारभूत सुविधाएं और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है। लेकिन जनपद हरदोई के विकासखंड कोथावां अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय कमलापुर की जमीनी हकीकत इन दावों की सच्चाई बयां कर रही है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार विद्यालय के दो कक्ष जर्जर होने के कारण बीते वर्ष कंडम घोषित कर ध्वस्त कर दिए गए थे। इसके बाद नई बिल्डिंग निर्माण का आश्वासन तो मिला, लेकिन आज तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। परिणामस्वरूप विद्यालय में अध्ययनरत सभी छात्र-छात्राओं को एक ही कमरे में बैठकर पढ़ाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इससे न केवल शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि बच्चों का शैक्षिक स्तर भी प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। स्थिति यह है कि विद्यालय परिसर में हल्की बारिश होते ही जलभराव हो जाता है। बच्चों को विद्यालय आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। विद्यालय के मुख्य द्वार पर गंदगी का अंबार लगा रहता है, जिससे स्वच्छ विद्यालय और स्वस्थ वातावरण की सरकारी योजनाएं भी सवालों के घेरे में हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय के शिक्षकों ने कई बार विभागीय अधिकारियों को नई बिल्डिंग निर्माण के संबंध में अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। महीनों बीत गए, फिर भी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। इससे साफ प्रतीत होता है कि शिक्षा विभाग की कार्यशैली और प्रशासनिक शिथिलता के कारण मासूम बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात करती है, तब एक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों के सिर पर पर्याप्त छत तक उपलब्ध न होना बेहद चिंताजनक है। करोड़ों रुपये की योजनाओं के बीच कमलापुर विद्यालय की यह तस्वीर सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। ग्रामीणों ने मांग की है कि विद्यालय की नई बिल्डिंग का निर्माण शीघ्र शुरू कराया जाए, परिसर में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था की जाए तथा मुख्य द्वार और आसपास फैली गंदगी को तत्काल साफ कराया जाए, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक वातावरण मिल सके। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर कब तक कमलापुर के नौनिहाल एक कमरे में ठूंस-ठूंस कर पढ़ाई करने को मजबूर रहेंगे? नई शिक्षा नीति और 'स्कूलों के कायाकल्प' के सरकारी दावों का वास्तविक लाभ इन बच्चों तक कब पहुंचेगा? यदि समय रहते जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई तो शिक्षा व्यवस्था को लेकर किए जा रहे दावे केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे। #रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

Hardoi, Hardoi | Jul 11, 2026

निबोश मंदिर महंत पद विवाद: छठे दिन भी नहीं निकला समाधान, 24 घंटे पुलिस की निगरानी में मंदिर परिसर
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#हरदोई: कोतवाली क्षेत्र बेनीगंज के ग्राम गिरधरपुर स्थित प्राचीन निबोश मंदिर एवं सूर्य महायज्ञ कुंड प्राचीन तीर्थ में महंत पद को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विवाद के छठे दिन भी किसी ठोस निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी, जिससे दोनों पक्षों के समर्थकों और श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर में 24 घंटे पुलिस बल तैनात है।
बताया जाता है कि बीते सोमवार को बाबा दिनेश दास और महंत मोहिनी दास के समर्थक मंदिर परिसर में आमने-सामने आ गए थे। सूचना मिलने पर राजस्व विभाग के लेखपाल, कानूनगो तथा पुलिस बल मौके पर पहुंचा। दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत के बावजूद विवाद का समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद ग्रामीणों की मांग पर महंत पद को लेकर मतदान कराया गया। मतदान के बाद मतपेटी को सील कर सुरक्षित रूप से कोतवाली बेनीगंज में रखवा दिया गया था।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मतगणना बुधवार को प्रस्तावित थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसे नहीं कराया जा सका। गुरुवार को भी राजस्व विभाग के अधिकारी कोतवाली पहुंचे, किंतु कुछ कारणों से मतपेटी नहीं खोली जा सकी। इससे दोनों पक्षों के समर्थकों और मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली तथा जल्द निर्णय की मांग तेज हो गई।
विवाद उस समय और गंभीर हो गया जब घनश्याम नगर स्थित ब्रह्मदेव आश्रम की महंत एवं बाबा सुरेशदास की शिष्या मोहिनी दास ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि निबोश बाबा मंदिर पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।
मोहिनी दास का कहना है कि निम्बोश बाबा मंदिर के संरक्षक महंत रामस्वरूप दास उर्फ निमिया बाबा के शिष्य महामंडलेश्वर मदन मोहन दास ने मंदिर की पूजा-अर्चना और महंत पद का अधिकार उन्हें सौंपा था। उनके अनुसार बाबा दिनेशदास जबरन मंदिर पर अपना अधिकार जता रहे हैं तथा उन्हें पूजा-अर्चना करने से रोका जा रहा है।
वहीं, दूसरे पक्ष दिनेश दास की ओर से भी अपने दावे प्रस्तुत किए जा रहे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने पक्ष में तर्क दे रहे हैं, जिसके चलते मामला प्रशासन के समक्ष विचाराधीन है।
सूत्रों के अनुसार उपजिलाधिकारी संडीला के निर्देश पर सक्षम अधिकारी एवं राजपत्रित राजस्व तहसीलदार अधिकारी की उपस्थिति में सीलबंद मतपेटी खोली जाएगी और नियमानुसार मतगणना कराई जाएगी। वही मौके पर पहुंचे कानून व लेखपाल मौके की पैमाइश की उन्होंने बताया देव स्थान के नाम गाटा संख्या 682 रकबा 0.114 है। सूर्य कुंड गाटा 648 का रकबा 4.450 व गाटा संख्या 649 रकबा 0.385 है। कहा उच्च अधिकारियों के निर्देश पर हकीकत की जानकारी की जा रही है।
फिलहाल प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए मंदिर परिसर में लगातार पुलिस बल तैनात है।
अब स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की निगाहें प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकलेगा और मंदिर की धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो सकेंगी।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

निबोश मंदिर महंत पद विवाद: छठे दिन भी नहीं निकला समाधान, 24 घंटे पुलिस की निगरानी में मंदिर परिसर . #हरदोई: कोतवाली क्षेत्र बेनीगंज के ग्राम गिरधरपुर स्थित प्राचीन निबोश मंदिर एवं सूर्य महायज्ञ कुंड प्राचीन तीर्थ में महंत पद को लेकर चल रहा विवाद लगातार गहराता जा रहा है। विवाद के छठे दिन भी किसी ठोस निष्कर्ष पर सहमति नहीं बन सकी, जिससे दोनों पक्षों के समर्थकों और श्रद्धालुओं में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंदिर परिसर में 24 घंटे पुलिस बल तैनात है। बताया जाता है कि बीते सोमवार को बाबा दिनेश दास और महंत मोहिनी दास के समर्थक मंदिर परिसर में आमने-सामने आ गए थे। सूचना मिलने पर राजस्व विभाग के लेखपाल, कानूनगो तथा पुलिस बल मौके पर पहुंचा। दोनों पक्षों के बीच लंबी बातचीत के बावजूद विवाद का समाधान नहीं निकल सका। इसके बाद ग्रामीणों की मांग पर महंत पद को लेकर मतदान कराया गया। मतदान के बाद मतपेटी को सील कर सुरक्षित रूप से कोतवाली बेनीगंज में रखवा दिया गया था। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मतगणना बुधवार को प्रस्तावित थी, लेकिन प्रशासनिक कारणों से इसे नहीं कराया जा सका। गुरुवार को भी राजस्व विभाग के अधिकारी कोतवाली पहुंचे, किंतु कुछ कारणों से मतपेटी नहीं खोली जा सकी। इससे दोनों पक्षों के समर्थकों और मंदिर से जुड़े श्रद्धालुओं में नाराजगी देखने को मिली तथा जल्द निर्णय की मांग तेज हो गई। विवाद उस समय और गंभीर हो गया जब घनश्याम नगर स्थित ब्रह्मदेव आश्रम की महंत एवं बाबा सुरेशदास की शिष्या मोहिनी दास ने पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि निबोश बाबा मंदिर पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिकायत करने पर उन्हें जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। मोहिनी दास का कहना है कि निम्बोश बाबा मंदिर के संरक्षक महंत रामस्वरूप दास उर्फ निमिया बाबा के शिष्य महामंडलेश्वर मदन मोहन दास ने मंदिर की पूजा-अर्चना और महंत पद का अधिकार उन्हें सौंपा था। उनके अनुसार बाबा दिनेशदास जबरन मंदिर पर अपना अधिकार जता रहे हैं तथा उन्हें पूजा-अर्चना करने से रोका जा रहा है। वहीं, दूसरे पक्ष दिनेश दास की ओर से भी अपने दावे प्रस्तुत किए जा रहे हैं। दोनों पक्ष अपने-अपने पक्ष में तर्क दे रहे हैं, जिसके चलते मामला प्रशासन के समक्ष विचाराधीन है। सूत्रों के अनुसार उपजिलाधिकारी संडीला के निर्देश पर सक्षम अधिकारी एवं राजपत्रित राजस्व तहसीलदार अधिकारी की उपस्थिति में सीलबंद मतपेटी खोली जाएगी और नियमानुसार मतगणना कराई जाएगी। वही मौके पर पहुंचे कानून व लेखपाल मौके की पैमाइश की उन्होंने बताया देव स्थान के नाम गाटा संख्या 682 रकबा 0.114 है। सूर्य कुंड गाटा 648 का रकबा 4.450 व गाटा संख्या 649 रकबा 0.385 है। कहा उच्च अधिकारियों के निर्देश पर हकीकत की जानकारी की जा रही है। फिलहाल प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ स्थिति पर नजर बनाए हुए है और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए मंदिर परिसर में लगातार पुलिस बल तैनात है। अब स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की निगाहें प्रशासन के अगले निर्णय पर टिकी हैं। सभी को उम्मीद है कि निष्पक्ष प्रक्रिया के माध्यम से विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकलेगा और मंदिर की धार्मिक गतिविधियां सामान्य रूप से संचालित हो सकेंगी। #रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

Hardoi, Hardoi | Jul 11, 2026

कछौना में इंसानियत की मिसाल: भटकी महिला को ग्रामीणों ने दी शरण, पुलिस ने संभाली घर पहुंचाने की जिम्मेदारी
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#हरदोई: जनपद हरदोई की संडीला तहसील अंतर्गत कछौना थाना क्षेत्र में मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक सराहनीय मिसाल देखने को मिली। बिहार के कटिहार जनपद की रहने वाली एक महिला भटकते हुए कछौना क्षेत्र के ग्राम इनायतपुर पहुंच गई। महिला की परेशान हालत देखकर ग्रामीणों ने न केवल उसे अपने घर में आश्रय दिया, बल्कि भोजन-पानी की व्यवस्था कर उसकी हरसंभव मदद भी की।
जानकारी के अनुसार महिला ने अपना नाम कालिया देवी बताया। उसने ग्रामीणों को बताया कि वह गांव शांति टोला छोटकी फासिया, पोस्ट तिनगचिया, तहसील बावलिया, थाना बावलिया, जिला कटिहार (बिहार) की निवासी है। महिला पिछले दो-तीन दिनों से इनायतपुर गांव के एक परिवार के यहां रह रही थी। गांव पहुंचने पर उसने अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद ग्रामीणों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उसे सुरक्षित स्थान पर ठहराया और उसकी देखभाल की।
ग्रामीणों ने बताया कि महिला मानसिक रूप से काफी परेशान और असहाय दिखाई दे रही थी। ऐसे में सबसे पहले उसकी सुरक्षा और भोजन की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। इसके बाद उसे उसके परिजनों तक सकुशल पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार को कछौना थाना पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही कछौना पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को अपने संरक्षण में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस द्वारा महिला के परिजनों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि उसे सुरक्षित उसके घर भेजा जा सके।
स्थानीय लोगों ने कहा कि संकट में फंसे किसी भी व्यक्ति की मदद करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। ग्रामीणों की तत्परता और पुलिस की सक्रियता से यह मामला मानवता, सामाजिक सहयोग और संवेदनशील पुलिसिंग का सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

कछौना में इंसानियत की मिसाल: भटकी महिला को ग्रामीणों ने दी शरण, पुलिस ने संभाली घर पहुंचाने की जिम्मेदारी . #हरदोई: जनपद हरदोई की संडीला तहसील अंतर्गत कछौना थाना क्षेत्र में मानवता और सामाजिक जिम्मेदारी की एक सराहनीय मिसाल देखने को मिली। बिहार के कटिहार जनपद की रहने वाली एक महिला भटकते हुए कछौना क्षेत्र के ग्राम इनायतपुर पहुंच गई। महिला की परेशान हालत देखकर ग्रामीणों ने न केवल उसे अपने घर में आश्रय दिया, बल्कि भोजन-पानी की व्यवस्था कर उसकी हरसंभव मदद भी की। जानकारी के अनुसार महिला ने अपना नाम कालिया देवी बताया। उसने ग्रामीणों को बताया कि वह गांव शांति टोला छोटकी फासिया, पोस्ट तिनगचिया, तहसील बावलिया, थाना बावलिया, जिला कटिहार (बिहार) की निवासी है। महिला पिछले दो-तीन दिनों से इनायतपुर गांव के एक परिवार के यहां रह रही थी। गांव पहुंचने पर उसने अपनी आपबीती सुनाई, जिसके बाद ग्रामीणों ने संवेदनशीलता का परिचय देते हुए उसे सुरक्षित स्थान पर ठहराया और उसकी देखभाल की। ग्रामीणों ने बताया कि महिला मानसिक रूप से काफी परेशान और असहाय दिखाई दे रही थी। ऐसे में सबसे पहले उसकी सुरक्षा और भोजन की व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई। इसके बाद उसे उसके परिजनों तक सकुशल पहुंचाने के उद्देश्य से बुधवार को कछौना थाना पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही कछौना पुलिस मौके पर पहुंची और महिला को अपने संरक्षण में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी। पुलिस द्वारा महिला के परिजनों से संपर्क स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि उसे सुरक्षित उसके घर भेजा जा सके। स्थानीय लोगों ने कहा कि संकट में फंसे किसी भी व्यक्ति की मदद करना प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। ग्रामीणों की तत्परता और पुलिस की सक्रियता से यह मामला मानवता, सामाजिक सहयोग और संवेदनशील पुलिसिंग का सकारात्मक उदाहरण बनकर सामने आया है। #रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

Hardoi, Hardoi | Jul 10, 2026

नैमिषारण्य चौरासी कोसी परिक्रमा के पावन पड़ाव पर बवाल: निमोष बाबा मंदिर विवाद से श्रद्धालुओं में उबाल, "सनातन आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं"
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#हरदोई: नैमिषारण्य चौरासी कोसी परिक्रमा के चौथे पड़ाव के रूप में विख्यात प्राचीन निमोष बाबा मंदिर सूर्यकुंड को लेकर चल रहे विवाद ने सोमवार को बड़ा रूप ले लिया। मंदिर पर कब्जे के आरोप और महंत परंपरा को लेकर उठे विवाद के बीच बेनीगंज पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। कानूनगो राजेंद्र प्रसाद तथा क्षेत्रीय लेखपाल अंकित यादव की मौजूदगी में दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया गया। इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं के बीच राय जानने के लिए वोटिंग कराई गई, जिसमें उपस्थित लोगों के अनुसार द्वितीय पक्ष महंत मोहिनी दास के समर्थन में अधिक लोग दिखाई दिए। इसके बाद माहौल और अधिक गर्मा गया।
बताया जाता है कि मौके से एक बक्सा बोलेरो वाहन में रखकर कोतवाली लाया गया, जिसके पीछे-पीछे बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग भी बेनीगंज कोतवाली पहुंच गए। देर रात तक कोतवाली परिसर और उसके बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा रही। श्रद्धालु लगातार मांग करते रहे कि मामले का तत्काल निस्तारण किया जाए और मंदिर की परंपरा एवं धार्मिक गरिमा के साथ किसी प्रकार का समझौता न किया जाए।
विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब घनश्याम नगर ब्रह्मदेव आश्रम निवासी महंत सुरेश दास की चेला ने कोतवाली बेनीगंज में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि गिरधरपुर स्थित प्राचीन निमोष बाबा मंदिर सूर्यकुंड पर अवैध कब्जा कर लिया गया है तथा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
शिकायत में कहा गया है कि यह मंदिर नैमिषारण्य चौरासी कोसी परिक्रमा का अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है और वर्षों से संत परंपरा के अनुसार इसकी पूजा-अर्चना होती रही है। मंदिर के संरक्षक रहे महंत रामस्वरूप दास उर्फ निमिया बाबा के शिष्य एवं अखिल भारतीय महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 मदन मोहन दास जी महाराज लंबे समय तक इसकी व्यवस्था संभालते रहे। आरोप है कि उन्होंने अपनी इच्छा से मंदिर की पूजा-अर्चना और देखरेख की जिम्मेदारी महंत मोहिनी दास को सौंपी, लेकिन प्रथम पक्ष स्वयं को पुजारी बताते हुए मंदिर पर कब्जा जमाए हुए है और नई व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर रहा।
महंत मोहिनी दास ने आरोप लगाया कि उन्हें मंदिर में रहकर भगवान की नियमित सेवा और पूजा-अर्चना करने से रोका जा रहा है। विरोध करने पर अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का विवाद नहीं, बल्कि संत परंपरा और धार्मिक मर्यादा का प्रश्न है।
मामले की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत समाज के लोग एकत्र हो गए। आक्रोशित श्रद्धालुओं का कहना था कि "नैमिषारण्य की पवित्र परंपरा पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या हस्तक्षेप सनातन समाज स्वीकार नहीं करेगा। मंदिर किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए और संत परंपरा का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए।"
कोतवाली परिसर में भी देर रात तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। पुलिस ने दोनों पक्षों और मौजूद लोगों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बताया कि उपजिलाधिकारी संडीला से दूरभाष पर वार्ता हुई है और उनके निर्देशानुसार संबंधित बक्सा राजपत्रित राजस्व अधिकारी की मौजूदगी में खोला जाएगा। हालांकि, दोनों पक्षों के समर्थक तत्काल बक्सा खोलकर गिनती कराने की मांग पर अड़े रहे, जिससे माहौल लगातार गर्म बना रहा। जिसे ध्यान में रखते हुए उक्त बक्से को कोतवाली स्थित कोतवालेस्वर महादेव मंदिर में सभी की देखरेख में सुरक्षित रूप से रखवा दिया गया।
समाचार लिखे जाने तक पुलिस दोनों पक्षों को शांत कराने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही, जबकि कोतवाली के बाहर और अंदर बड़ी संख्या में श्रद्धालु डटे रहे। पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील धार्मिक विवाद का समाधान किस प्रकार करता है।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

नैमिषारण्य चौरासी कोसी परिक्रमा के पावन पड़ाव पर बवाल: निमोष बाबा मंदिर विवाद से श्रद्धालुओं में उबाल, "सनातन आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं" . #हरदोई: नैमिषारण्य चौरासी कोसी परिक्रमा के चौथे पड़ाव के रूप में विख्यात प्राचीन निमोष बाबा मंदिर सूर्यकुंड को लेकर चल रहे विवाद ने सोमवार को बड़ा रूप ले लिया। मंदिर पर कब्जे के आरोप और महंत परंपरा को लेकर उठे विवाद के बीच बेनीगंज पुलिस और राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। कानूनगो राजेंद्र प्रसाद तथा क्षेत्रीय लेखपाल अंकित यादव की मौजूदगी में दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया गया। इस दौरान मौजूद श्रद्धालुओं के बीच राय जानने के लिए वोटिंग कराई गई, जिसमें उपस्थित लोगों के अनुसार द्वितीय पक्ष महंत मोहिनी दास के समर्थन में अधिक लोग दिखाई दिए। इसके बाद माहौल और अधिक गर्मा गया। बताया जाता है कि मौके से एक बक्सा बोलेरो वाहन में रखकर कोतवाली लाया गया, जिसके पीछे-पीछे बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग भी बेनीगंज कोतवाली पहुंच गए। देर रात तक कोतवाली परिसर और उसके बाहर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा रही। श्रद्धालु लगातार मांग करते रहे कि मामले का तत्काल निस्तारण किया जाए और मंदिर की परंपरा एवं धार्मिक गरिमा के साथ किसी प्रकार का समझौता न किया जाए। विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब घनश्याम नगर ब्रह्मदेव आश्रम निवासी महंत सुरेश दास की चेला ने कोतवाली बेनीगंज में लिखित शिकायत देकर आरोप लगाया कि गिरधरपुर स्थित प्राचीन निमोष बाबा मंदिर सूर्यकुंड पर अवैध कब्जा कर लिया गया है तथा विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी जा रही है। शिकायत में कहा गया है कि यह मंदिर नैमिषारण्य चौरासी कोसी परिक्रमा का अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है और वर्षों से संत परंपरा के अनुसार इसकी पूजा-अर्चना होती रही है। मंदिर के संरक्षक रहे महंत रामस्वरूप दास उर्फ निमिया बाबा के शिष्य एवं अखिल भारतीय महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 मदन मोहन दास जी महाराज लंबे समय तक इसकी व्यवस्था संभालते रहे। आरोप है कि उन्होंने अपनी इच्छा से मंदिर की पूजा-अर्चना और देखरेख की जिम्मेदारी महंत मोहिनी दास को सौंपी, लेकिन प्रथम पक्ष स्वयं को पुजारी बताते हुए मंदिर पर कब्जा जमाए हुए है और नई व्यवस्था को स्वीकार नहीं कर रहा। महंत मोहिनी दास ने आरोप लगाया कि उन्हें मंदिर में रहकर भगवान की नियमित सेवा और पूजा-अर्चना करने से रोका जा रहा है। विरोध करने पर अभद्र व्यवहार, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। उनका कहना है कि यह केवल एक व्यक्ति का विवाद नहीं, बल्कि संत परंपरा और धार्मिक मर्यादा का प्रश्न है। मामले की जानकारी फैलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु और संत समाज के लोग एकत्र हो गए। आक्रोशित श्रद्धालुओं का कहना था कि "नैमिषारण्य की पवित्र परंपरा पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा या हस्तक्षेप सनातन समाज स्वीकार नहीं करेगा। मंदिर किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। प्रशासन को निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए और संत परंपरा का सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए।" कोतवाली परिसर में भी देर रात तक स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। पुलिस ने दोनों पक्षों और मौजूद लोगों को समझाने का प्रयास किया। अधिकारियों ने बताया कि उपजिलाधिकारी संडीला से दूरभाष पर वार्ता हुई है और उनके निर्देशानुसार संबंधित बक्सा राजपत्रित राजस्व अधिकारी की मौजूदगी में खोला जाएगा। हालांकि, दोनों पक्षों के समर्थक तत्काल बक्सा खोलकर गिनती कराने की मांग पर अड़े रहे, जिससे माहौल लगातार गर्म बना रहा। जिसे ध्यान में रखते हुए उक्त बक्से को कोतवाली स्थित कोतवालेस्वर महादेव मंदिर में सभी की देखरेख में सुरक्षित रूप से रखवा दिया गया। समाचार लिखे जाने तक पुलिस दोनों पक्षों को शांत कराने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रही, जबकि कोतवाली के बाहर और अंदर बड़ी संख्या में श्रद्धालु डटे रहे। पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में चर्चा का विषय बना दिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं कि वह इस संवेदनशील धार्मिक विवाद का समाधान किस प्रकार करता है। #रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

Hardoi, Hardoi | Jul 8, 2026

प्रताप नगर में गूंजा गौ-रक्षा का संकल्प, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा — “गौमाता को मिले राज्यमाता का सम्मान”
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#हरदोई: जनपद के कोतवाली क्षेत्र बेनीगंज अंतर्गत प्रताप नगर चौराहा सोमवार को पूर्णतः भक्तिमय और धर्ममय वातावरण में परिवर्तित हो गया, जब जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज अपनी 81 दिवसीय “गविष्टि गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा” के अंतर्गत यहां पहुंचे। शंकराचार्य जी के आगमन की सूचना मिलते ही सैकड़ों श्रद्धालु, सनातन प्रेमी एवं गौ-भक्त भारी संख्या में एकत्रित हो गए। ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीतों, पुष्पवर्षा और जयघोषों के बीच स्थानीय लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया।
पूरा प्रताप नगर “गौ माता की जय”, “सनातन धर्म अमर रहे” और “हर-हर महादेव” के उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं से शंकराचार्य जी का अभिनंदन करते हुए उन्हें सनातन संस्कृति का ध्वजवाहक बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राकेश तिवारी एवं शैलेंद्र त्रिपाठी ने श्रद्धा भाव से शंकराचार्य जी को गौमाता की प्रतिमा भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
अपने ओजस्वी एवं भावुक संबोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य ने गौ-संरक्षण को राष्ट्र और धर्म की आत्मा बताते हुए कहा कि आज गौमाता की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जिस गौमाता को सनातन धर्म में माता का दर्जा प्राप्त है, आज वही सड़कों पर भूखी-प्यासी भटकने को विवश है। उन्होंने कहा कि यदि भारत अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान को बचाना चाहता है, तो गौमाता को केवल पशु मानने की भूल छोड़नी होगी।
शंकराचार्य जी ने जोरदार स्वर में कहा कि सरकार को गौमाता को पशु सूची से हटाकर “राज्यमाता” का संवैधानिक दर्जा देना चाहिए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से संकल्प दिलाया कि वे गौ-रक्षा, गौ-सेवा और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव आगे रहेंगे। उनके उद्बोधन के दौरान कई श्रद्धालु भावुक होकर “जय गौ माता” के नारे लगाते दिखाई दिए।
जनसभा के अंतिम चरण में शंकराचार्य जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गौमाता का पूजन-अर्चन किया। स्नान, तिलक एवं पूजा उपरांत उन्होंने अपने हाथों से गौमाता को फल खिलाकर सनातन परंपरा का अनुपम संदेश दिया। इस दौरान उपस्थित मातृशक्ति एवं श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। संपूर्ण वातावरण घंटों तक भक्ति रस में डूबा दिखाई दिया।
प्रेस वार्ता के दौरान शंकराचार्य ने गौशालाओं की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज सच्चाई दिखाना चाहता है, किंतु सत्ता और प्रशासनिक दबाव के कारण कई बार मजबूर हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि स्वतंत्र रूप से गौशालाओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाए, तो समाज स्वयं गौमाता की पीड़ा को समझ सकेगा। उनके इस वक्तव्य ने उपस्थित लोगों को सोचने पर विवश कर दिया।
यात्रा के दौरान संतोष त्रिपाठी, विम्लेश त्रिपाठी, मिथलेश त्रिपाठी, अखिलेश त्रिपाठी, कौशल पांडे, ब्रह्मा शरण मिश्रा, विक्रम पांडे, सुभाष पाल, राम प्रकाश यादव, सतेंद्र सिंह, उमेश सिंह, अमित शुक्ला, छोटे तिवारी, पूर्व प्रधान राम प्रकाश यादव, अतुल तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। वहीं अनेक भाजपा कार्यकर्ता भी दूर से शंकराचार्य जी के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते नजर आए।
सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत क्षेत्राधिकारी हरियावां लक्ष्मीकांत गौतम, प्रभारी निरीक्षक सतीश चंद्र सहित भारी संख्या में पुलिस बल एवं इंटेलिजेंस विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
#रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

प्रताप नगर में गूंजा गौ-रक्षा का संकल्प, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा — “गौमाता को मिले राज्यमाता का सम्मान” . #हरदोई: जनपद के कोतवाली क्षेत्र बेनीगंज अंतर्गत प्रताप नगर चौराहा सोमवार को पूर्णतः भक्तिमय और धर्ममय वातावरण में परिवर्तित हो गया, जब जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज अपनी 81 दिवसीय “गविष्टि गो-रक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा” के अंतर्गत यहां पहुंचे। शंकराचार्य जी के आगमन की सूचना मिलते ही सैकड़ों श्रद्धालु, सनातन प्रेमी एवं गौ-भक्त भारी संख्या में एकत्रित हो गए। ढोल-नगाड़ों, भक्ति गीतों, पुष्पवर्षा और जयघोषों के बीच स्थानीय लोगों ने उनका भव्य स्वागत किया। पूरा प्रताप नगर “गौ माता की जय”, “सनातन धर्म अमर रहे” और “हर-हर महादेव” के उद्घोषों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालुओं ने फूल-मालाओं से शंकराचार्य जी का अभिनंदन करते हुए उन्हें सनातन संस्कृति का ध्वजवाहक बताया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे राकेश तिवारी एवं शैलेंद्र त्रिपाठी ने श्रद्धा भाव से शंकराचार्य जी को गौमाता की प्रतिमा भेंट कर आशीर्वाद प्राप्त किया। अपने ओजस्वी एवं भावुक संबोधन में जगद्गुरु शंकराचार्य ने गौ-संरक्षण को राष्ट्र और धर्म की आत्मा बताते हुए कहा कि आज गौमाता की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है। उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जिस गौमाता को सनातन धर्म में माता का दर्जा प्राप्त है, आज वही सड़कों पर भूखी-प्यासी भटकने को विवश है। उन्होंने कहा कि यदि भारत अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक पहचान को बचाना चाहता है, तो गौमाता को केवल पशु मानने की भूल छोड़नी होगी। शंकराचार्य जी ने जोरदार स्वर में कहा कि सरकार को गौमाता को पशु सूची से हटाकर “राज्यमाता” का संवैधानिक दर्जा देना चाहिए। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से संकल्प दिलाया कि वे गौ-रक्षा, गौ-सेवा और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए सदैव आगे रहेंगे। उनके उद्बोधन के दौरान कई श्रद्धालु भावुक होकर “जय गौ माता” के नारे लगाते दिखाई दिए। जनसभा के अंतिम चरण में शंकराचार्य जी महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गौमाता का पूजन-अर्चन किया। स्नान, तिलक एवं पूजा उपरांत उन्होंने अपने हाथों से गौमाता को फल खिलाकर सनातन परंपरा का अनुपम संदेश दिया। इस दौरान उपस्थित मातृशक्ति एवं श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। संपूर्ण वातावरण घंटों तक भक्ति रस में डूबा दिखाई दिया। प्रेस वार्ता के दौरान शंकराचार्य ने गौशालाओं की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज सच्चाई दिखाना चाहता है, किंतु सत्ता और प्रशासनिक दबाव के कारण कई बार मजबूर हो जाता है। उन्होंने कहा कि यदि स्वतंत्र रूप से गौशालाओं की वास्तविक स्थिति जनता के सामने लाई जाए, तो समाज स्वयं गौमाता की पीड़ा को समझ सकेगा। उनके इस वक्तव्य ने उपस्थित लोगों को सोचने पर विवश कर दिया। यात्रा के दौरान संतोष त्रिपाठी, विम्लेश त्रिपाठी, मिथलेश त्रिपाठी, अखिलेश त्रिपाठी, कौशल पांडे, ब्रह्मा शरण मिश्रा, विक्रम पांडे, सुभाष पाल, राम प्रकाश यादव, सतेंद्र सिंह, उमेश सिंह, अमित शुक्ला, छोटे तिवारी, पूर्व प्रधान राम प्रकाश यादव, अतुल तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। वहीं अनेक भाजपा कार्यकर्ता भी दूर से शंकराचार्य जी के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस करते नजर आए। सुरक्षा व्यवस्था के दृष्टिगत क्षेत्राधिकारी हरियावां लक्ष्मीकांत गौतम, प्रभारी निरीक्षक सतीश चंद्र सहित भारी संख्या में पुलिस बल एवं इंटेलिजेंस विभाग के अधिकारी मौजूद रहे। #रिपोर्ट: पुनीत मिश्रा/बेनीगंज

Hardoi, Hardoi | Jul 6, 2026

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