#सफलता_की_कहानी
एकीकृत कृषि और जैविक नवाचार से बदली खेती की राह
मनासा के प्रगतिशील किसान चेनराम पाटीदार ने खेती के साथ पशुपालन और वर्मी कंपोस्ट को बनाया अतिरिक्त आय का जरिया
कृषि को लाभकारी एवं टिकाऊ व्यवसाय बनाने की दिशा में ग्राम ढाकनी, विकासखंड मनासा के प्रगतिशील किसान श्री चेनराम पाटीदार ने खेती के साथ पशुपालन और जैविक खाद निर्माण को जोड़कर आय बढ़ाने का अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है। लगभग 2 हेक्टेयर भूमि पर खेती करने वाले श्री पाटीदार ने उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करते हुए खेती की लागत कम करने के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत भी विकसित किया है।
➡️पशुपालन से प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख रुपये की अतिरिक्त आय- श्री पाटीदार के पास 1 गाय एवं 4 भैंसें हैं, जिनसे प्रतिदिन लगभग 20 से 25 लीटर दूध का उत्पादन होता है। पशुपालन से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। पशुओं से प्राप्त गोबर का उपयोग वे वर्मी कंपोस्ट निर्माण में करते हैं।
➡️वर्मी कंपोस्ट से अतिरिक्त आय और खेती की लागत में कमी- श्री पाटीदार पिछले लगभग 6 वर्षों से गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर रहे हैं। इसका उपयोग वे अपने खेत में करने के साथ अतिरिक्त मात्रा आसपास के किसानों को 10 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचते हैं। पिछले वर्ष उन्होंने लगभग 10 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट बेचकर 10 हजार रुपये की अतिरिक्त आय अर्जित की।
खेत में नियमित रूप से वर्मी कंपोस्ट के उपयोग से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता में लगभग 50 प्रतिशत तक कमी आई है। इससे खेती की लागत कम होने के साथ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी मदद मिली है।
➡️पीकेवीवाई योजना से मिला प्रोत्साहन- कृषि विभाग द्वारा संचालित परंपरागत कृषि विकास योजना के अंतर्गत श्री पाटीदार को जैविक खेती के लिए प्रतिवर्ष प्रशिक्षण एवं 5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि डीबीटी के माध्यम से प्राप्त हो रही है। प्रशिक्षण और प्रोत्साहन का उपयोग वे जैविक खेती की तकनीकों को अपनाने तथा खेत में जैविक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में कर रहे हैं।
➡️किसान क्रेडिट कार्ड से पशुशाला में हुआ बेहतर प्रबंधन- पशुपालन को सुविधाजनक एवं वैज्ञानिक बनाने के लिए श्री पाटीदार ने किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से पीएसीएस नलखेड़ा से 18 हजार रुपये का ऋण प्राप्त किया। इसका उपयोग उन्होंने पशुशाला का फर्श पक्का कराने, पशुओं के लिए पक्की नांद बनाने तथा पीने के पानी की ऑटोमेटिक व्यवस्था विकसित करने में किया।
➡️योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते किसान- श्री चेनराम पाटीदार ने कृषि, पशुपालन और जैविक खाद निर्माण को एक-दूसरे से जोड़कर संसाधनों का बेहतर उपयोग किया है। पशुओं से प्राप्त गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार होता है, जिसका उपयोग खेत में करने से रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता कम हुई है। वहीं अतिरिक्त वर्मी कंपोस्ट की बिक्री से उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त हो रही है।
श्री पाटीदार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं मध्यप्रदेश शासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की किसान हितैषी योजनाओं से उन्हें कृषि एवं पशुपालन को बेहतर ढंग से संचालित करने में सहायता मिली है। उन्होंने कहा कि योजनाओं के माध्यम से प्राप्त प्रशिक्षण, प्रोत्साहन एवं वित्तीय सुविधा का सदुपयोग कर वे अपनी खेती को अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
➡️अन्य किसानों के लिए प्रेरणादायी उदाहरण- श्री चेनराम पाटीदार की पहल यह संदेश देती है कि किसान खेती के साथ पशुपालन और जैविक खाद निर्माण को जोड़कर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर लागत कम करने एवं अतिरिक्त आय बढ़ाने का प्रभावी मॉडल अपना सकते हैं। उनका यह प्रयास क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणादायी बन रहा है।
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1 views | Neemuch, Madhya Pradesh | Aug 25, 2026