कुरूक्षेत्र की सड़कों पर उतरे प्रदेशभर के गेस्ट टीचर, सीएम आवास का घेराव करने पहुंचे, पुलिस ने बीच रास्ते रोका
कुरूक्षेत्र, 29 जून/डॉ. राजेश वधवा/कुरुक्षेत्र खबरनामा
पिछले करीब एक सप्ताह से जिला सचिवालय में धरना दे रहे अतिथि अध्यापक आज सड़क पर उतर आए हैं। 39 डिग्री तापमान के बीच डेढ़ किलोमीटर दूरी पर अतिथि अध्यापक मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने पहुंचे जहां उन्हें पुलिस ने करें बंदोबस्त के साथ रोक लिया। जिंदल चौक पर रोके गए अतिथि अध्यापकों ने धरना शुरू कर दिया और कड़ी धूप व गर्मी के बीच सड़क पर बैठ गए। अतिथि अध्यापक पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के आदेश अनुसार नियमित किए जाने की मांग कर रहे हैं। अतिथि अध्यापकों को मुख्यमंत्री के कार्यालय प्रभारी कैलाश सैनी समझाने पहुंचे लेकिन अपनी मांग पर अड़े हुए हैं। कैलाश सैनी ने मुख्यमंत्री के ओएसडी से बातचीत करवाने का भरोसा दिया है लेकिन अतिथि अध्यापकों का रोष कम नहीं हो रहा है।
आपको बता दें कि आज प्रदेशभर से कुरुक्षेत्र पहुंचे सैकड़ों अतिथि अध्यापकों ने प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांग हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार नियमितीकरण की है। राजकीय अनुबंधित अध्यापक संघ के राज्य प्रधान दिनेश यादव, राज्य महासचिव भूपेंद्र सिंह, राज्य कोषाध्यक्ष अशोक शास्त्री, राज्य उप प्रधान महेश तेवतिया, कृष्ण कुमार तेहला ने बताया कि 16 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने प्रदेश के कच्चे कर्मचारियों व शिक्षकों को नियमित करने का आदेश दिया।
29 अप्रैल 2026 व 27 मई 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अतिथि अध्यापकों को पक्का करने के आदेश दिए। दो महीने बीत गए। एक भी अध्यापक नियमित नहीं हुआ। इसी वजह से 23 जून 2026 से लघु सचिवालय में अनिश्चितकालीन पड़ाव शुरू किया गया। उपायुक्त के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन अभी तक सरकार की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। महेश तेवतिया, राजकुमार कालीरमन ने कहा कि 17 अप्रैल 2026 को सर्वोच्च न्यायालय के फैसले में 16 व 18 जून 2014 की हरियाणा सरकार की नियमितीकरण नीतियों को वैध करार दिया गया। 29 अप्रैल 2026 व 27 मई 2026 को हाईकोर्ट ने अतिथि अध्यापकों को नियमित करने के पक्ष में आदेश पारित किए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्कूलों में कार्यरत सभी अतिथि अध्यापक इन दोनों नीतियों के तहत नियमित होने की शर्तें पूरी करते हैं। मांग की गई कि तत्काल प्रभाव से सभी अतिथि अध्यापकों को नियमित किया जाए। जून 2014 से सभी लाभ दिए जाएं।
उन्होंने बताया कि 2014 में हरियाणा सरकार ने ग्रुप बी, सी व डी के तहत कार्यरत कच्चे कर्मचारियों व शिक्षकों के नियमितीकरण के लिए नीतियां बनाई थीं। इनके तहत कई विभागों के 4654 कर्मचारियों को पक्का किया गया। दो दिन बाद विधानसभा चुनाव की घोषणा हुई। आचार संहिता लगी, मामला अधर में लटक गया। शर्तें पूरी होने के बावजूद अतिथि अध्यापक नियमितीकरण से वंचित रहे।
संगठन ने कहा कि 2014 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ। 5 मई 2015 को इन नीतियों को होल्ड पर रखा गया। नियमितीकरण के रास्ते बंद किए गए। जून 2018 में इन नीतियों के खिलाफ याचिकाओं की सुनवाई के बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने नीतियां रद्द कर दीं।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 26 नवंबर 2018 को यथास्थिति बरकरार रखते हुए सुनवाई जारी रखी। 17 अप्रैल को फैसला सुनाते हुए 2014 की पॉलिसी को सही बताया। हाईकोर्ट ने 29 अप्रैल व 27 मई को नियमित करने का फैसला सुनाया। इन निर्णयों को लागू कर तुरंत नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू की जाए।