*धर्म पालन करने के साथ ह्दय में दया का भाव रहना चाहिए -आचार्य रामदयालजी महाराज*
*जिसके जीवन में राम गुरू की कृपा मिल जाती है वह निहाल हो जाता*
*माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में नियमित चातुर्मासिक प्रवचन*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ), 21 सितम्बर। जो तन, मन ओर वचन से किसी को दुःख नहीं देता ऐसे व्यक्ति के दर्शन करने से जन्मो जन्म के पाप नष्ट हो जाते है वहीं इसके विपरीत जो तन, मन ओर वचन से सबको दुःख देता है उसका मुख देखने से अपने संचित पुण्य भी नष्ट हो जाते है। दयाहीन व्यक्ति का चेहरा भी नहीं देखना चाहिए। धर्म पालन करने के साथ ह्दय में दया का भाव भी होना चाहिए। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत सोमवार को नियमित चातुर्मासिक प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अपात्र एवं दुर्जन व्यक्ति का हाथ जोड़ सम्मान देने पर भी वह अपनी दुर्जनता का परिचय देगा। दुर्जनी अपना स्वभाव कभी नहीं बदल सकता। जिसके जीवन में सद्गुरू की कृपाछाया मिल जाती है वह निहाल हो जाता है।
आचार्यश्री ने कहा कि हमे अमीरी गरीबी का भेद मिटाते हुए घर, परिवार समाज हर जगह समरसता का वातावरण बनाना है। सम्पन्न वर्ग निर्धन वर्ग को आगे बढ़ाने का प्रयास करे। समाज में सभी की प्रगति हमारा लक्ष्य होना चाहिए। मन में मानवीय संवदेनशीलता का भाव होना जरूरी है। स्वामी रामचरण महाराज ने कहा है कि अगर ह्दय में दया है, संतोष रूपी संपति पास में है ओर राम गुरू की कृपा से भजन करने का अधिकार मिल गया है तो इस धरती पर आपने मनुष्य बनकर जन्म नहीं लिया अवतारों में गिनती आएगी। उन्होंने कहा कि मन में दया, ह्दय में राम ओर तन सेवा में लीन रहना चाहिए। जीवन को सार्थक बनाने के लिए बुर्जुग, गौमाता, पशु पक्षी सहित मानव मात्र की सेवा करे। राष्ट्र एवं समाज के लिए सेवा पारणयता की भावना दिखाए। सेवा का दिव्य गुण व्यक्तिव को निखार उसके कृतित्व का संसार से परिचय कराता है।
आचार्य रामदयाल महाराज ने तेजा दशमी की बधाई देते हुए कहा कि वीर तेजाजी महाराज दया का सर्वोच्च शिखर छूने के साथ गायों की रक्षा के लिए समर्पित रहे। वह बहादुर होने के साथ वचन के भी पक्के थे। ऐसे महापुरूषों को पाकर भारत की धरती धन्य हुई है। आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत 25 सितम्बर को रामद्वारा धाम में भजन संध्या का आयोजन होगा। आचार्य रामदयालजी महाराज का अवतरण दिवस 26 सितम्बर को आनंदोत्सव के रूप में मनाया जाएगा। रामद्वारा धाम में 27 सितम्बर को विराट संत सम्मेलन का आयोजन होगा। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। प्रतिदिन रामधुनी के साथ सुबह 8 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सुबह 9 से 10 बजे तक चातुर्मासिक प्रवचन हो रहे है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।