भरत तिवारी मौत मामले में गया में सवर्ण समाज का आक्रोश मार्च, न्याय की मांग को लेकर गया में कैंडल मार्च
गया। भरत तिवारी की मौत के विरोध में गुरुवार को शाम में गया शहर में सवर्ण समाज की ओर से एक आक्रोश मार्च निकाला गया। यह मार्च आजाद पार्क से शुरू होकर टावर चौक होते हुए जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचा। मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और हाथों में कैंडल लेकर भरत तिवारी को न्याय दिलाने की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने अन्याय के खिलाफ एकजुट होने तथा मामले की निष्पक्ष जांच कराने के समर्थन में नारेबाजी की।
आक्रोश मार्च का नेतृत्व कर रहे हैं कौशलेंद्र नारायण और गुड्डू बरनवाल ने कहा कि इस देश का व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुका है, सिस्टम के खिलाफ आवाज उठाने वाले को एनकाउंटर किया जा रहा है, जनता का काम नहीं होता था जिसके खिलाफ भारत तिवारी खड़ा रहता था उसको बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के इशारे पर उसको इनकाउंटर करके हत्या कराई गई है, इस तरह से भगत सिंह ने बम फेंका था इस तरह से न्याय के लिए भरत तिवारी खड़ा रहता था, उसके खिलाफ थाने में एक भी आपराधिक मामले दर्ज नहीं है क्योंकि वह अपराधी नहीं था बल्कि सिस्टम के खिलाफ तो वह आवाज उठाता था यही कारण रहा कि उसको एनकाउंटर कर दिया गया और उसकी हत्या कर दी गई है, बिहार के गूंगी बहरी सरकार को जागने के लिए भरत तिवारी ने फायरिंग किया था, जब भरत तिवारी ने अपने आप को सरेंडर कर दिया था उसके बाद पुलिस ने एनकाउंटर कर हत्या कर दी, हम लोग मांग करना चाहते हैं कि जो भी इसमें पुलिसकर्मी शामिल थे उसको केवल सस्पेंड करने से नहीं होगा उनको सजा मिलना चाहिए, उन पर 302 के तहत मुकदमा दर्ज हो। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर भी उन्होंने कहा कि वह सभी धर्म को टारगेट करते हैं,
भरत तिवारी की मौत की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भरत तिवारी जनता से जुड़े मुद्दों को उठाते थे और विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए लगातार आवाज बुलंद करते थे। वक्ताओं का कहना था कि मामले में कई ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब अभी तक स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है, इसलिए पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
मार्च के दौरान वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति ने आत्मसमर्पण किया था तो उसके बाद की परिस्थितियों की भी विस्तार से जांच होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि घटना में यदि किसी की जिम्मेदारी तय होती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि केवल प्रशासनिक कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि जांच के आधार पर दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जानी चाहिए।
कौशलेंद्र नारायण ने अपने संबोधन में कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों में इस घटना को लेकर नाराजगी और चिंता है। उन्होंने कहा कि लोगों को न्यायिक प्रक्रिया पर भरोसा है और इसी भरोसे के साथ वे सरकार एवं प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भरत तिवारी के परिजनों को न्याय मिलना चाहिए और पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। वहीं, गुड्डू बरनवाल ने राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि अपराध की घटनाओं को लेकर आम लोगों में चिंता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले पर स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए तथा लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब देना चाहिए। उनके अनुसार, आक्रोश मार्च का उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव पैदा करना नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार और प्रशासन तक पहुंचाना है।
मार्च में शामिल लोगों ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को दोहराया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि भरत तिवारी की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों की पहचान की जाए और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी या अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
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