कुगती के लाल देसी राजमाह की देशभर में पहचान, मौसम की मार से किसान चिंतित
चंबा 01 अक्टूबर 2026
भरमौर विधानसभा क्षेत्र के अंतिम गांव कुगती का लाल देसी राजमाह अपने खास स्वाद, गुणवत्ता और पारंपरिक पहचान के चलते अब देशभर के बाजारों में अपनी अलग जगह बना चुका है। कुगती के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैयार होने वाला यह राजमाह दिल्ली, पंजाब सहित अन्य राज्यों तक पहुंचता है, जहां इसकी अच्छी मांग बताई जाती है।
कुगती जैसे दुर्गम और बर्फीले क्षेत्र में राजमाह की खेती किसानों के लिए आसान नहीं है। सीमित खेती के मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच किसान महीनों तक कड़ी मेहनत करते हैं। स्थानीय स्तर पर मार्च-अप्रैल के दौरान राजमाह की बुवाई की जाती है, जबकि फसल सितंबर-अक्टूबर में तैयार होती है।
इस बार बारिश ने बढ़ाई किसानों की चिंता
स्थानीय किसानों के अनुसार इस वर्ष अधिक बारिश और लगातार बनी नमी का राजमाह की फसल पर असर पड़ा है। मौसम में बदलाव के कारण कुछ क्षेत्रों में फसल को नुकसान पहुंचने की बात भी सामने आ रही है। ऐसे में उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से किसानों की चिंता बढ़ी हुई है।
हालांकि किसानों को उम्मीद है कि फसल पकने के अंतिम चरण में मौसम अनुकूल रहा तो नुकसान की भरपाई कुछ हद तक हो सकती है।
नकदी फसल के रूप में बढ़ी अहमियत
कुगती क्षेत्र के ग्रामीणों की आजीविका में राजमाह की खेती महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। समय के साथ यहां खेती के पैटर्न में बदलाव आया है और राजमाह एक महत्वपूर्ण नकदी फसल के रूप में उभर रहा है। शोध अध्ययनों में भी कुगती क्षेत्र में राजमाह के खेती क्षेत्र में बढ़ोतरी का उल्लेख मिलता है।
किसानों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से विपणन, परिवहन, भंडारण और उचित बाजार उपलब्ध करवाने की सुविधाओं को और मजबूत किया जाए, तो कुगती के लाल देसी राजमाह को देशभर में और बड़ा बाजार मिल सकता है।
🎙️ बाइट — स्थानीय निवासी
“कुगती का राजमाह अपनी गुणवत्ता और स्वाद के लिए जाना जाता है, लेकिन यहां खेती करना बहुत कठिन है। मौसम की मार और बाजार तक पहुंच की समस्या किसानों के सामने बड़ी चुनौती है। सरकार परिवहन और मार्केटिंग की सुविधा मजबूत करे तो किसानों को इसका बेहतर लाभ मिल सकता है।
Chamba, Chamba | Oct 1, 2026