#बालाघाट
वन अधिकार पट्टा मिलने से खिल उठे आदिवासी परिवारों के चेहरे
बैहर में 10 लोगों को वन अधिकार पट्टा का वितरण
वर्षों से जंगल और जमीन से अपना जीवन-यापन करने वाले बैहर विकासखंड के ग्राम माड़ी के 10 आदिवासी परिवारों के लिए 06 जून का दिन नई उम्मीद और खुशियों का संदेश लेकर आया। एकलव्य विद्यालय बैहर में आयोजित खंड स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर श्री मृणाल मीना ने इन परिवारों को वन अधिकार पट्टों का वितरण किया। जैसे ही उनके हाथों में भूमि स्वामित्व का अधिकार देने वाला दस्तावेज पहुंचा, उनके चेहरों पर आत्मविश्वास और संतोष की चमक साफ दिखाई देने लगी।
कार्यक्रम में गोंड जनजाति के फुंदरु सिंह मरकाम, जितन मरकाम, बाधुराम नेताम, बैसाखू नेताम और ज्ञानसिंह नेताम सहित बैगा जनजाति की कुंती बाई, अमीलाल, बिसतोबाई, लोखू सिंह एवं मंगलू सिंह को वन अधिकार पट्टे प्रदान किए गए। वर्षों से जिस भूमि पर वे खेती और आजीविका का कार्य कर रहे थे, अब उस पर उनका कानूनी अधिकार स्थापित हो गया है।
वन अधिकार पट्टा मिलने के साथ ही इन परिवारों के लिए विकास और समृद्धि के नए द्वार खुल गए हैं। अब उन्हें किसान क्रेडिट कार्ड, फसल ऋण, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, अनुदान पर बीज, कृषि उपकरण तथा शासन की विभिन्न कृषि एवं ग्रामीण विकास योजनाओं का लाभ आसानी से मिल सकेगा। इससे उनकी खेती अधिक उत्पादक बनेगी और आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
पट्टा प्राप्त करने वाले हितग्राहियों ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें अपनी जमीन के भविष्य की चिंता नहीं रहेगी। शासन द्वारा दिया गया यह अधिकार उनके परिवारों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक भविष्य का आधार बनेगा। कई हितग्राहियों ने बताया कि वर्षों से वे इस अधिकार की प्रतीक्षा कर रहे थे और आज उनका सपना साकार हुआ है।
इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक सराफ, अपर कलेक्टर श्री डी.पी. बर्मन, बैहर एसडीएम श्री अर्पित गुप्ता, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग श्रीमती शकुंतला डामोर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि बालाघाट जिले में अगस्त 2025 से विशेष अभियान चलाकर पात्र वनवासियों को वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अधिकार पत्र प्रदान किए जा रहे हैं। इस अभियान के तहत अब तक 350 से अधिक पात्र हितग्राहियों को व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टे वितरित किए जा चुके हैं। प्रशासन का यह प्रयास आदिवासी समुदाय को उनके अधिकार दिलाने के साथ-साथ उन्हें शासन की मुख्यधारा की योजनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
वन अधिकार पट्टा वितरण का यह कार्यक्रम केवल दस्तावेज सौंपने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आदिवासी परिवारों के जीवन में सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत का प्रतीक बन गया।
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