*मुख्य सचिव की अध्यक्षता में नरवाई प्रबंधन हेतु समीक्षा बैठक आयोजित*
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*विभागों के समन्वय से गठित होगी टास्क फोर्स, जागरूकता के लिए चलेगा 'नरवाई रथ'*
मुख्य सचिव, मध्यप्रदेश शासन की अध्यक्षता में खरीफ फसलों की कटाई एवं आगामी सीजन के दौरान नरवाई (पराली) जलाने की घटनाओं की रोकथाम तथा इसके प्रभावी प्रबंधन की रणनीति को लेकर समीक्षा बैठक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि नरवाई जलाने की घटनाओं पर पूर्ण नियंत्रण पाने के लिए जिला प्रशासन, कृषि विभाग, गृह विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा राजस्व विभाग आपस में बेहतर समन्वय के साथ कार्ययोजना तैयार करें। इसके साथ ही जिला स्तर पर प्रभावी निगरानी के लिए विशेष 'टास्क फोर्स' का गठन किया जाएगा।
बैठक में किसानों को नरवाई प्रबंधन के प्रति जागरूक करने हेतु कृषि यंत्रों का प्रदर्शन, किसान सम्मेलन, संगोष्ठी, कृषक चौपाल, नरवाई रथ भ्रमण एवं सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए गए। गाँव-गाँव में जागरूकता फैलाने के लिए 'नरवाई रथ' का भ्रमण कराया जाए।
साथ ही नरवाई जलाने की घटनाओं की अधिक संभावना वाले हॉटस्पॉट जिलों में किसानों को एसएमएस एडवाइजरी जारी करने तथा धान की कटाई के दौरान नरवाई प्रबंधन को विशेष प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए।
"हर खेत तक मशीन सेवा — नरवाई जलाने की आवश्यकता नहीं"
शासन द्वारा नरवाई प्रबंधन के लिए In situ (खेत में ही प्रबंधन), Ex-situ (उद्योग व ऊर्जा क्षेत्र हेतु संग्रह) और पशु चारे के रूप में त्रिस्तरीय रणनीति पर बल दिया जाएगा।
1.In-situ (खेत में ही प्रबंधन): कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर एसएमएस (Super SMS) का उपयोग कर पराली का समान फैलाव किया जाएगा, जिसके बाद हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर या सुपर सीडर की मदद से सीधे गेहूं और चने की बुवाई संभव होगी।
2.Ex-situ (औद्योगिक एवं ऊर्जा उपयोग): रीपर, कटर, रेक और बेलर की मदद से नरवाई के बंडल बनाकर उन्हें कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG), थर्मल पावर प्लांट (TPP) और बॉयलर में ईंधन के रूप में उपयोग में लाया जाएगा।
3.पशु चारा प्रबंधन: रीपर बाइंडर और थ्रेशर से भूसा तैयार कर गौशालाओं एवं पशुपालकों तक पहुँचाया जाएगा।