लोकायुक्त के आदेश पर झांसी की टीम पहुंची कुरेपुरा कनार, जांच के दौरान मचा घमासान—बाहरी भीड़ से दबाव बनाने के आरोप
कुठौंद ब्लॉक के ग्राम कुरेपुरा कनार में विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की शिकायत अब लोकायुक्त तक पहुंचने के बाद जांच के घेरे में आ गई है।
लोकायुक्त के आदेश पर झांसी से गठित त्रिसदस्यीय टीम गांव पहुंची और प्रधान द्वारा कराए गए विकास कार्यों व उपलब्ध अभिलेखों की पड़ताल शुरू की।
जांच के दौरान दिनभर गांव में गहमागहमी का माहौल बना रहा।
शिकायतकर्ता लवकुश त्रिपाठी का आरोप है कि जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा पूर्व में की गई जांच से वह संतुष्ट नहीं थे।
उनका कहना है कि जांच आख्या उपलब्ध नहीं कराई गई और सामने आई कमियों पर अपेक्षित कार्रवाई भी नहीं हुई।
इसी से आहत होकर उन्होंने लोकायुक्त के समक्ष परिवाद प्रस्तुत कर दूसरे जनपद के उच्च अधिकारियों से जांच कराने का अनुरोध किया।
जांच टीम पहुंची तो क्यों जुटी बाहरी भीड़?
लोकायुक्त के आदेश पर झांसी से पहुंची टीम ने मौके पर संबंधित विकास कार्यों और अभिलेखों की जांच की।
शिकायतकर्ता के अनुसार, जांच के दौरान प्रधान प्रतिनिधि सुनीता देवी व प्रधान पुत्र ध्रुव गुप्ता की ओर से अन्य ग्रामों के प्रधानों तथा आसपास के लोगों को बुलाया गया।
आरोप है कि इस भीड़ के जरिए जांच अधिकारियों, शिकायतकर्ता और मौके पर मौजूद पत्रकारों पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के स्तर पर होना बाकी है, लेकिन सवाल जरूर खड़ा होता है—अगर जांच पूरी तरह पारदर्शी है तो अधिकारियों के सामने बाहरी लोगों की इतनी भीड़ जुटाने की जरूरत क्यों पड़ी?
स्थिति को देखते हुए जांच अधिकारी द्वारा ईंटों चौकी और थाना गोहन से पुलिस बल बुलाया गया। पुलिस की मौजूदगी में जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।
आय से अधिक संपत्ति से लेकर गौशाला तक उठे सवाल
जांच के दौरान ग्रामीणों के बीच प्रधान प्रतिनिधि और प्रधान पुत्र की कथित संपत्तियों की जांच की मांग भी उठी।
वहीं गांव में ‘नॉट फॉर सेल’ लिखी सीमेंट की बोरियों के इस्तेमाल और गौशाला निर्माण से जुड़े कथित मामलों को लेकर भी चर्चाएं होती रहीं।
ग्रामीणों के बीच यह सवाल भी उठता रहा कि क्या सरकारी योजनाओं में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और विकास कार्यों का वास्तविक भौतिक सत्यापन हुआ है?
क्या जिन कार्यों के नाम पर भुगतान हुआ, वे मौके पर उसी रूप में मौजूद हैं? और यदि गौशाला के नाम पर भुगतान हुआ है तो क्या वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुसार निर्माण हुआ या कागजों में ही काम पूरा दिखा दिया गया?
इन सभी सवालों का जवाब अब जांच की अंतिम रिपोर्ट से ही सामने आएगा।
कुछ बिंदुओं की जांच पूरी, बाकी के लिए फिर आएगी टीम
जांच टीम के मुताबिक फिलहाल कुछ बिंदुओं की ही जांच हो सकी है, जबकि शेष बिंदुओं की जांच बाद में की जाएगी।
उच्च अधिकारियों द्वारा दोबारा जांच के संबंध में शिकायतकर्ता को पूर्व में अवगत कराया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या लोकायुक्त के आदेश पर हो रही यह जांच वास्तव में निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी?
क्या जांच में सामने आने वाली कमियों पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई होगी या मामला फिर किसी सरकारी फाइल में दब जाएगा?
कुछ दिन पूर्व ग्राम प्रधान की पत्नी द्वारा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के बढ़ते बोलबाले की बात स्वीकार किए जाने की खबरें भी चर्चा में रही थीं।
ऐसे में अब ग्रामीणों की निगाहें जांच की अंतिम रिपोर्ट और उसके बाद होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।
ग्रामीणों ने मांग की है कि जांच किसी भी राजनीतिक या बाहरी दबाव से प्रभावित हुए बिना पूरी की जाए और यदि जांच में वित्तीय अनियमितता, भ्रष्टाचार या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
अब सवाल सिर्फ जांच का नहीं, बल्कि जांच की निष्पक्षता और उसके परिणाम का है—क्या कुरेपुरा कनार के विकास कार्यों की हकीकत जांच रिपोर्ट में सामने आएगी?
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Kalpi, Jalaun | Aug 26, 2026