दुलदुला: सिटोंगा का नाग दरबार, आस्था और लोकगाथा का अनूठा संगम
नागपंचमी पर जशपुर के ग्राम सिटोंगा में लगने वाला नाग दरबार आस्था, प्रकृति और लोकगाथा का अनूठा संगम है। खेतों के बीच बने छोटे से नागदेव मंदिर में बांकी और श्री को नाग-नागिन के रूप में पूजा जाता है। मान्यता है कि जिस कुंड से दोनों भाई-बहन सर्प रूप में निकले, वहीं से बांकी और श्री नदियों का उद्गम हुआ। कहा जाता है कि सौतेली मां से परेशान भाई-बहन ने सांप के अंडे