सूरजपोल की भांग वाली गली में 50 साल से गूंज रही है पत्तलों की खनक, जगदीश जी ने नहीं छोड़ी परंपरा
उदयपुर। सूरजपोल की भांग वाली गली में जगदीश जी पिछले 50 वर्षों से खाखरे के पत्तों से पत्तल-दोने बना रहे हैं।
जब बाजार में केमिकल वाले कागज और प्लास्टिक के दोने आ गए, तब भी उन्होंने अपनी परंपरागत कला नहीं छोड़ी। उनका कहना है कि पत्तों से बने पत्तल इको-फ्रेंडली होते हैं, पशु-पक्षी खा लें तो भी हानिकारक नहीं हैं और मिट्टी में मिल जाते हैं।
समय बदला लेकिन आज भी शहर की कई नामी मिठाई और कचौरी की दुकानों पर उन्हीं के बनाए पत्तल-दोने उपयोग में लिए जाते हैं। यह न सिर्फ रोजगार है, बल्कि पर्यावरण बचाने की एक मिसाल भी है।
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