नारनौंद अनाज मंडी में पहुंचे विधायक जस्सी पेटवाड़, अधिकारियों के साथ शुरू करवाया धान का उठान
धान खरीद में देरी और उठान की अव्यवस्था पर सरकार को घेरा, नमी की सीमा 20 प्रतिशत करने की मांग
नारनौंद, 15 अक्टूबर। (राष्ट्रीय कदम) ब्यूरो: नारनौंद के विधायक जस्सी पेटवाड़ बुधवार को अधिकारियों के साथ नारनौंद अनाज मंडी पहुंचे और धान की उठान प्रक्रिया शुरू करवाई। इस दौरान डीएम वेयरहाउस, मंडी सचिव, डीएफएससी हांसी सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। विधायक ने मंडी में धान की खरीद और उठान की व्यवस्था का जायजा लेते हुए किसानों व आढ़तियों को आ रही परेशानियों का मुद्दा उठाया।
विधायक जस्सी पेटवाड़ ने धान खरीद और उठान में देरी को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि सरकार ने 25 सितंबर से फसल खरीद शुरू करने के दावे किए थे, लेकिन खरीद प्रक्रिया 11 अक्टूबर से शुरू हुई। इसके बावजूद 15 अक्टूबर तक मंडी में उठान की व्यवस्था सुचारू नहीं हो पाई। ऐसे में उन्हें स्वयं मंडी पहुंचकर अधिकारियों के साथ उठान शुरू करवाना पड़ा।
बारिश से भीगी फसल, किसानों और आढ़तियों को नुकसान
जस्सी पेटवाड़ ने कहा कि सरकारी अव्यवस्थाओं के कारण मंडी में पड़ी धान की फसल बारिश में भीग गई, जिससे किसानों और आढ़तियों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि किसान दिन-रात मेहनत करके अपनी फसल मंडी तक पहुंचाते हैं, लेकिन समय पर खरीद और उठान नहीं होने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। सरकार को जल्द से जल्द व्यवस्थाओं में सुधार कर धान की खरीद और उठान सुनिश्चित करना चाहिए।
धान में नमी की सीमा 20 प्रतिशत करने की मांग
विधायक ने सरकार से मांग की कि धान में नमी की निर्धारित सीमा 17 प्रतिशत से बढ़ाकर 20 प्रतिशत की जाए, ताकि किसानों को फसल बेचने में परेशानी न हो और उन्हें प्रति क्विंटल 300 से 400 रुपये तक के संभावित नुकसान से बचाया जा सके।
उन्होंने धान मिलिंग से जुड़े नियमों में बदलाव की मांग करते हुए कहा कि 67 किलो धान से चावल की मिलिंग संबंधी निर्धारित व्यवस्था में संशोधन कर इसे 57-58 किलो किया जाए, ताकि मिलर धान खरीदने के लिए आगे आएं। इससे किसानों, आढ़तियों और मिलरों को राहत मिल सकेगी।
पूरी फसल एमएसपी पर खरीदने की मांग
जस्सी पेटवाड़ ने सरकार से मांग की कि किसानों की पूरी धान की फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीदी जाए। उन्होंने कहा कि मंडियों में खरीद और उठान की व्यवस्था दुरुस्त करना सरकार की जिम्मेदारी है। किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए सभी संबंधित विभागों को मिलकर काम करना चाहिए।