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जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एवं पुलिस अधीक्षक की की उपस्थिति में राजापुर तहसील परिसर में संपूर्ण समाधान दिवस संपन्न विगत 3 वर्षों में धारा-24 के तहत पारित आदेशों की पत्थरगड़ी का 15 कार्यदिवसों में प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश आईजीआरएस पोर्टल पर निस्तारण का फीडबैक 90% से कम होने पर दी गई कड़ी चेतावनी; शिथिलता बरतने वाले लेखपाल कलेक्ट्रेट संबद्ध किए जाएंगे महिला संबंधी प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें: पुलिस अधीक्षक तहसील सभागार राजापुर में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में 'संपूर्ण समाधान दिवस' का आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर चकबंदी, पत्थरगढ़ी, सिंचाई, जलकल, चकरोड अतिक्रमण एवं अन्य विभागों से संबंधित विभिन्न जन-शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि संपूर्ण समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण करना है। यह मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि प्राप्त प्रार्थना पत्रों का निस्तारण केवल कागजी न होकर, संबंधित विभागों द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर किया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि फरियादियों को बार-बार न भटकना पड़े। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि विगत तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 (सीमांकन/पत्थरगड़ी) के अंतर्गत जितने भी आदेश पारित हुए हैं, उनके अनुपालन में पत्थरगड़ी की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करें। इस संबंध में आगामी 15 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि धारा-116 (बंटवारा) और धारा-24 के वादों का निस्तारण लगातार नियत तिथि (डेट) लगाकर किया जाए। स्थलीय निस्तारण हेतु संबंधित लेखपालों की तिथिवार ड्यूटी निर्धारित की जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जनसमस्याओं के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अथवा शिथिल कार्यप्रणाली वाले लेखपालों को तत्काल प्रभाव से कलेक्ट्रेट संबद्ध (अटैच) कर दिया जाएगा। समन्वय और पोर्टल प्रबंधन पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण का फीडबैक किसी भी परिस्थिति में 90 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने राजस्व निरीक्षकों एवं लेखपालों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में आपसी सहमति की गुंजाइश हो, वहां दोनों पक्षों में समन्वय स्थापित कर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराएं। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने पुलिस बल के अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिलाओं से संबंधित प्रत्येक प्रकरण को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ लिया जाए और उनका प्राथमिकता के आधार पर विधिक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए पुलिस और राजस्व टीम आपसी समन्वय से कार्य करें। इसी क्रम में जनपद के सभी तहसीलों में समाधान दिवस का आयोजन किया गया जिसमें राजापुर में 73 मे 7, मऊ में 138 में 4, मानिकपुर में 66, कर्वी में 90 में से 6 का मौके पर निस्तारण करा दिया गया। इस संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर उप जिलाधिकारी राजापुर फूलचंद्र यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी, जिला परियोजना अधिकारी सत्यराम यादव, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी मनोहर लाल धर्मन सहित तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं समस्त संबंधित विभागों के जिला व तहसील स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

MORE NEWS

🚨 ब्रेकिंग | चित्रकूट 🚨

जनपद चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम कर्वी पहुचे राजापुर  तो वही एसडीएम राजापुर पहुचे कर्वी और संयुक्त अभियान चलाते हुए ओवरलोडिंग एवं संदिग्ध खनन गतिविधियों में लिप्त करीब आधा दर्जन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की।

कार्रवाई के बाद अवैध खनन और ओवरलोडिंग के कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है। जिले में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन कार्रवाई कर सकता है तो फिर खनिज विभाग और आरटीओ विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई करने से क्यों बचते रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खेल पर पूरी तरह अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वे आखिर कार्रवाई से दूरी क्यों बनाए हुए हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा रहस्य छिपा है या फिर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं?

फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिले में अवैध खनन माफियाओं की नींद जरूर उड़ा दी है।

🚨 ब्रेकिंग | चित्रकूट 🚨 जनपद चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम कर्वी पहुचे राजापुर तो वही एसडीएम राजापुर पहुचे कर्वी और संयुक्त अभियान चलाते हुए ओवरलोडिंग एवं संदिग्ध खनन गतिविधियों में लिप्त करीब आधा दर्जन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की। कार्रवाई के बाद अवैध खनन और ओवरलोडिंग के कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है। जिले में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन कार्रवाई कर सकता है तो फिर खनिज विभाग और आरटीओ विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई करने से क्यों बचते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खेल पर पूरी तरह अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वे आखिर कार्रवाई से दूरी क्यों बनाए हुए हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा रहस्य छिपा है या फिर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं? फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिले में अवैध खनन माफियाओं की नींद जरूर उड़ा दी है।

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग'

नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है।

नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव

 एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं।

प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! 

​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी
चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर"

​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है।

​ जलधारा का कत्लेआम 

नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है।

चलने लायक नहीं बचीं सड़कें 

​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं।
​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं।

#mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग' नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है। नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं। प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! ​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर" ​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। ​ जलधारा का कत्लेआम नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है। चलने लायक नहीं बचीं सड़कें ​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं। ​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं। #mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एवं पुलिस अधीक्षक की की उपस्थिति में राजापुर तहसील परिसर में संपूर्ण समाधान दिवस संपन्न विगत 3 वर्षों में धारा-24 के तहत पारित आदेशों की पत्थरगड़ी का 15 कार्यदिवसों में प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश आईजीआरएस पोर्टल पर निस्तारण का फीडबैक 90% से कम होने पर दी गई कड़ी चेतावनी; शिथिलता बरतने वाले लेखपाल कलेक्ट्रेट संबद्ध किए जाएंगे महिला संबंधी प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें: पुलिस अधीक्षक तहसील सभागार राजापुर में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में 'संपूर्ण समाधान दिवस' का आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर चकबंदी, पत्थरगढ़ी, सिंचाई, जलकल, चकरोड अतिक्रमण एवं अन्य विभागों से संबंधित विभिन्न जन-शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि संपूर्ण समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण करना है। यह मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि प्राप्त प्रार्थना पत्रों का निस्तारण केवल कागजी न होकर, संबंधित विभागों द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर किया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि फरियादियों को बार-बार न भटकना पड़े। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि विगत तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 (सीमांकन/पत्थरगड़ी) के अंतर्गत जितने भी आदेश पारित हुए हैं, उनके अनुपालन में पत्थरगड़ी की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करें। इस संबंध में आगामी 15 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि धारा-116 (बंटवारा) और धारा-24 के वादों का निस्तारण लगातार नियत तिथि (डेट) लगाकर किया जाए। स्थलीय निस्तारण हेतु संबंधित लेखपालों की तिथिवार ड्यूटी निर्धारित की जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जनसमस्याओं के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अथवा शिथिल कार्यप्रणाली वाले लेखपालों को तत्काल प्रभाव से कलेक्ट्रेट संबद्ध (अटैच) कर दिया जाएगा। समन्वय और पोर्टल प्रबंधन पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण का फीडबैक किसी भी परिस्थिति में 90 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने राजस्व निरीक्षकों एवं लेखपालों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में आपसी सहमति की गुंजाइश हो, वहां दोनों पक्षों में समन्वय स्थापित कर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराएं। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने पुलिस बल के अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिलाओं से संबंधित प्रत्येक प्रकरण को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ लिया जाए और उनका प्राथमिकता के आधार पर विधिक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए पुलिस और राजस्व टीम आपसी समन्वय से कार्य करें। इसी क्रम में जनपद के सभी तहसीलों में समाधान दिवस का आयोजन किया गया जिसमें राजापुर में 73 मे 7, मऊ में 138 में 4, मानिकपुर में 66, कर्वी में 90 में से 6 का मौके पर निस्तारण करा दिया गया। इस संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर उप जिलाधिकारी राजापुर फूलचंद्र यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी, जिला परियोजना अधिकारी सत्यराम यादव, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी मनोहर लाल धर्मन सहित तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं समस्त संबंधित विभागों के जिला व तहसील स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे - Manikpur News