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News in Manikpur

🚨 ब्रेकिंग | चित्रकूट 🚨

जनपद चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम कर्वी पहुचे राजापुर  तो वही एसडीएम राजापुर पहुचे कर्वी और संयुक्त अभियान चलाते हुए ओवरलोडिंग एवं संदिग्ध खनन गतिविधियों में लिप्त करीब आधा दर्जन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की।

कार्रवाई के बाद अवैध खनन और ओवरलोडिंग के कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है। जिले में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन कार्रवाई कर सकता है तो फिर खनिज विभाग और आरटीओ विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई करने से क्यों बचते रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खेल पर पूरी तरह अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वे आखिर कार्रवाई से दूरी क्यों बनाए हुए हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा रहस्य छिपा है या फिर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं?

फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिले में अवैध खनन माफियाओं की नींद जरूर उड़ा दी है।

🚨 ब्रेकिंग | चित्रकूट 🚨 जनपद चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम कर्वी पहुचे राजापुर तो वही एसडीएम राजापुर पहुचे कर्वी और संयुक्त अभियान चलाते हुए ओवरलोडिंग एवं संदिग्ध खनन गतिविधियों में लिप्त करीब आधा दर्जन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की। कार्रवाई के बाद अवैध खनन और ओवरलोडिंग के कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है। जिले में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन कार्रवाई कर सकता है तो फिर खनिज विभाग और आरटीओ विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई करने से क्यों बचते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खेल पर पूरी तरह अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वे आखिर कार्रवाई से दूरी क्यों बनाए हुए हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा रहस्य छिपा है या फिर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं? फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिले में अवैध खनन माफियाओं की नींद जरूर उड़ा दी है।

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग'

नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है।

नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव

 एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं।

प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! 

​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी
चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर"

​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है।

​ जलधारा का कत्लेआम 

नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है।

चलने लायक नहीं बचीं सड़कें 

​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं।
​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं।

#mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग' नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है। नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं। प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! ​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर" ​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। ​ जलधारा का कत्लेआम नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है। चलने लायक नहीं बचीं सड़कें ​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं। ​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं। #mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

#चित्रकूट 

जिलाधिकारी द्वारा पुलिस अधीक्षक चित्रकूट के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहाड़ी का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने के दिए निर्देश

शासकीय सेवाओं की धरातलीय स्थिति परखने एवं स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आज जिलाधिकारी पुलकित गर्ग द्वारा पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहाड़ी का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सालय की प्रशासनिक व चिकित्सकीय व्यवस्थाओं में कई खामियां पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधितों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए।

निरीक्षण की शुरूआत पंजीकरण कक्ष से की गई, जहां तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों से दैनिक ओपीडी पंजीकरण की संख्या के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई। इसके पश्चात इमरजेंसी ड्यूटी कक्ष, इमरजेंसी वार्ड संख्या-1, आयुष्मान वार्ड, नियमित (परमानेंट) कर्मचारी उपस्थिति रजिस्टर तथा संविदा कर्मी उपस्थिति रजिस्टर का गहन अवलोकन व परीक्षण किया गया। वार्डों के निरीक्षण के दौरान मरीजों के लिए बेड की अनुपलब्धता पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने प्रभारी चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि अन्य वार्डों में रिक्त बेडों को तत्काल उपयोग में लाया जाए तथा 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर मरीजों को बेड आवंटित किए जाएं। बेडशीट पर दाग पाए जाने पर तथा खिड़कियों पर जमी धूल पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने बेड़ो की चादर बदलने तथा साफ सफाई व्यवस्था मे तत्काल सुधार के निर्देश दिए।
 
 निरीक्षण के दौरान 5 कार्मिक अनुपस्थित पाए गए, जिलाधिकारी ने अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने  के भी निर्देश दिए। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि दोपहर 08:00 बजे से 02:00 बजे की  अवधि में कोई भी कर्मचारी चिकित्सालय  छोड़कर बाहर नहीं जाएगा।
उक्त के अतिरिक्त ग्राउंड फ्लोर पर अत्यधिक गंदगी पाए जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित ग्राउंडफ्लोर के तीन सफाई कर्मियों का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी की संतोषजनक आख्या प्राप्त होने के पश्चात ही इनका वेतन बहाल किया जाए।
 
जिलाधिकारी ने समस्त नियमित, संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मियों (स्वीपर सहित) को अनिवार्य रूप से निर्धारित ड्रेस कोड में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्वीपर्स के पास ड्रेस उपलब्ध नहीं है, उन्हें एक सप्ताह के भीतर ड्रेस  उपलब्ध कराया जाए।

आउटसोर्सिंग कर्मचारी रजिस्टर के अवलोकन के दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी द्वारा उपस्थिति प्रमाणित (मार्क) न किए जाने पर जिलाधिकारी ने घोर प्रशासनिक शिथिलता मानते हुए प्रभारी चिकित्साधिकारी को 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि उपस्थिति पंजिका में सभी कर्मचारियों के हस्ताक्षर क्रमानुसार (सीरियल में) दर्ज हों

निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्साधिकारी को संपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र परिसर में उच्च स्तरीय साफ-सफाई, पर्याप्त प्रकाश (लाइटिंग) व्यवस्था तथा मरीजों के लिए सुलभ जन-सुविधाएं सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि शासकीय कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ दीपक शाहिद संबंधित चिकित्सा कर्मी उपस्थित रहे

#चित्रकूट जिलाधिकारी द्वारा पुलिस अधीक्षक चित्रकूट के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहाड़ी का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं में लापरवाही बरतने वाले कार्मिकों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई किए जाने के दिए निर्देश शासकीय सेवाओं की धरातलीय स्थिति परखने एवं स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आज जिलाधिकारी पुलकित गर्ग द्वारा पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहाड़ी का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान चिकित्सालय की प्रशासनिक व चिकित्सकीय व्यवस्थाओं में कई खामियां पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधितों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण की शुरूआत पंजीकरण कक्ष से की गई, जहां तैनात कंप्यूटर ऑपरेटरों से दैनिक ओपीडी पंजीकरण की संख्या के संबंध में विस्तृत जानकारी ली गई। इसके पश्चात इमरजेंसी ड्यूटी कक्ष, इमरजेंसी वार्ड संख्या-1, आयुष्मान वार्ड, नियमित (परमानेंट) कर्मचारी उपस्थिति रजिस्टर तथा संविदा कर्मी उपस्थिति रजिस्टर का गहन अवलोकन व परीक्षण किया गया। वार्डों के निरीक्षण के दौरान मरीजों के लिए बेड की अनुपलब्धता पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने प्रभारी चिकित्साधिकारी को निर्देशित किया कि अन्य वार्डों में रिक्त बेडों को तत्काल उपयोग में लाया जाए तथा 'पहले आओ, पहले पाओ' के आधार पर मरीजों को बेड आवंटित किए जाएं। बेडशीट पर दाग पाए जाने पर तथा खिड़कियों पर जमी धूल पर अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्होंने बेड़ो की चादर बदलने तथा साफ सफाई व्यवस्था मे तत्काल सुधार के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान 5 कार्मिक अनुपस्थित पाए गए, जिलाधिकारी ने अनुपस्थित कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटने के भी निर्देश दिए। उन्होंने सख्त निर्देश दिए कि दोपहर 08:00 बजे से 02:00 बजे की अवधि में कोई भी कर्मचारी चिकित्सालय छोड़कर बाहर नहीं जाएगा। उक्त के अतिरिक्त ग्राउंड फ्लोर पर अत्यधिक गंदगी पाए जाने पर जिलाधिकारी ने संबंधित ग्राउंडफ्लोर के तीन सफाई कर्मियों का वेतन अग्रिम आदेशों तक रोकने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी की संतोषजनक आख्या प्राप्त होने के पश्चात ही इनका वेतन बहाल किया जाए। जिलाधिकारी ने समस्त नियमित, संविदा एवं आउटसोर्सिंग कर्मियों (स्वीपर सहित) को अनिवार्य रूप से निर्धारित ड्रेस कोड में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन स्वीपर्स के पास ड्रेस उपलब्ध नहीं है, उन्हें एक सप्ताह के भीतर ड्रेस उपलब्ध कराया जाए। आउटसोर्सिंग कर्मचारी रजिस्टर के अवलोकन के दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी द्वारा उपस्थिति प्रमाणित (मार्क) न किए जाने पर जिलाधिकारी ने घोर प्रशासनिक शिथिलता मानते हुए प्रभारी चिकित्साधिकारी को 'कारण बताओ नोटिस' जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही यह सुनिश्चित करने को कहा कि उपस्थिति पंजिका में सभी कर्मचारियों के हस्ताक्षर क्रमानुसार (सीरियल में) दर्ज हों निरीक्षण के अंत में जिलाधिकारी ने प्रभारी चिकित्साधिकारी को संपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र परिसर में उच्च स्तरीय साफ-सफाई, पर्याप्त प्रकाश (लाइटिंग) व्यवस्था तथा मरीजों के लिए सुलभ जन-सुविधाएं सुनिश्चित करने के कड़े निर्देश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि शासकीय कार्यों में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। निरीक्षण के दौरान प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ दीपक शाहिद संबंधित चिकित्सा कर्मी उपस्थित रहे

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा सरधुआ ग्राम पंचायत में आरआरसी केंद्र का औचक निरीक्षण

जिलाधिकारी पुलकित गर्ग एवं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह द्वारा तहसील राजापुर के अंतर्गत विकास खंड पहाड़ी की ग्राम पंचायत सरधुआ में 'स्वच्छ भारत मिशन (फेज-2)' के तहत नवनिर्मित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) चित्रकूट, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) पहाड़ी, ग्राम पंचायत सचिव तथा केंद्र पर तैनात सफाई कर्मचारी उपस्थित रहे।

 केंद्र पर प्लास्टिक, कांच तथा अन्य श्रेणियों का सूखा एवं अजैविक (न गलने वाला) कचरा पृथकीकृत कर अलग-अलग बॉक्स में संकलित पाया गया।
 
 वर्मी कंपोस्ट पिट में गोबर की उपलब्धता तो पायी गई, किंतु उसमें केंचुए नहीं पाए गए। इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव द्वारा अवगत कराया गया कि अत्यधिक ग्रीष्म लहर (गर्मी) के कारण केंचुए अभी नहीं डाले गए हैं।
 
 जिलाधिकारी ने केंद्र पर कार्यरत श्रमिकों से संवाद कर कार्यप्रणाली की जानकारी ली। उन्होंने निर्देशित किया कि प्लास्टिक, कांच की बोतलें व अन्य कबाड़ सामग्री को स्थानीय कबाड़ विक्रेताओं को बेचकर ग्राम पंचायत की आय (राजस्व) में वृद्धि की जाए। साथ ही, इस कार्य में संलग्न सफाई कर्मचारियों को कार्य के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाए।
 
आरआरसी केंद्र के परिसर में अनुपयोगी एवं रिक्त पड़े 'नाडेप' (NADEP) गड्ढों को देखकर जिलाधिकारी ने अप्रसन्नता व्यक्त की और संबंधित सचिव को तत्काल प्रभाव से उन्हें क्रियाशील बनाने के कड़े निर्देश दिए।

निरीक्षण की अगली कड़ी में जिलाधिकारी महोदय द्वारा ग्राम पंचायत द्वारा कायाकल्प योजना के तहत प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कराए गए विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन की इच्छा व्यक्त की गई। इस पर ग्राम पंचायत सचिव द्वारा विद्यालय बंद होने तथा चाबी उपलब्ध न होने का बताया गया।पूर्व सूचना के बावजूद विद्यालय परिसर की उपलब्धता सुनिश्चित न कराने तथा शासकीय दायित्वों में घोर शिथिलता बरतने पर जिलाधिकारी ने सचिव को कड़ी फटकार लगाई।

जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) को निम्नलिखित आदेश जारी किए।
 उन्होंने ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले समस्त प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों का 'ऑपरेशन कायाकल्प' के निर्धारित मानकों (पैरामीटर्स) के आधार पर गहन निरीक्षण किया जाए।
 विगत वित्तीय वर्ष से लेकर वर्तमान समय तक ग्राम पंचायत द्वारा निष्पादित कराए गए समस्त विकास कार्यों का रैंडम (यादृच्छिक) आधार पर भौतिक सत्यापन कर विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) अविलंब जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत की जाए

#Chitrakoot

जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा सरधुआ ग्राम पंचायत में आरआरसी केंद्र का औचक निरीक्षण जिलाधिकारी पुलकित गर्ग एवं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह द्वारा तहसील राजापुर के अंतर्गत विकास खंड पहाड़ी की ग्राम पंचायत सरधुआ में 'स्वच्छ भारत मिशन (फेज-2)' के तहत नवनिर्मित रिसोर्स रिकवरी सेंटर (आरआरसी) का संयुक्त स्थलीय निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) चित्रकूट, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) पहाड़ी, ग्राम पंचायत सचिव तथा केंद्र पर तैनात सफाई कर्मचारी उपस्थित रहे। केंद्र पर प्लास्टिक, कांच तथा अन्य श्रेणियों का सूखा एवं अजैविक (न गलने वाला) कचरा पृथकीकृत कर अलग-अलग बॉक्स में संकलित पाया गया। वर्मी कंपोस्ट पिट में गोबर की उपलब्धता तो पायी गई, किंतु उसमें केंचुए नहीं पाए गए। इस संबंध में ग्राम पंचायत सचिव द्वारा अवगत कराया गया कि अत्यधिक ग्रीष्म लहर (गर्मी) के कारण केंचुए अभी नहीं डाले गए हैं। जिलाधिकारी ने केंद्र पर कार्यरत श्रमिकों से संवाद कर कार्यप्रणाली की जानकारी ली। उन्होंने निर्देशित किया कि प्लास्टिक, कांच की बोतलें व अन्य कबाड़ सामग्री को स्थानीय कबाड़ विक्रेताओं को बेचकर ग्राम पंचायत की आय (राजस्व) में वृद्धि की जाए। साथ ही, इस कार्य में संलग्न सफाई कर्मचारियों को कार्य के प्रति प्रोत्साहित करने हेतु प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाए। आरआरसी केंद्र के परिसर में अनुपयोगी एवं रिक्त पड़े 'नाडेप' (NADEP) गड्ढों को देखकर जिलाधिकारी ने अप्रसन्नता व्यक्त की और संबंधित सचिव को तत्काल प्रभाव से उन्हें क्रियाशील बनाने के कड़े निर्देश दिए। निरीक्षण की अगली कड़ी में जिलाधिकारी महोदय द्वारा ग्राम पंचायत द्वारा कायाकल्प योजना के तहत प्राथमिक/उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कराए गए विकास कार्यों के भौतिक सत्यापन की इच्छा व्यक्त की गई। इस पर ग्राम पंचायत सचिव द्वारा विद्यालय बंद होने तथा चाबी उपलब्ध न होने का बताया गया।पूर्व सूचना के बावजूद विद्यालय परिसर की उपलब्धता सुनिश्चित न कराने तथा शासकीय दायित्वों में घोर शिथिलता बरतने पर जिलाधिकारी ने सचिव को कड़ी फटकार लगाई। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) को निम्नलिखित आदेश जारी किए। उन्होंने ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले समस्त प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालयों का 'ऑपरेशन कायाकल्प' के निर्धारित मानकों (पैरामीटर्स) के आधार पर गहन निरीक्षण किया जाए। विगत वित्तीय वर्ष से लेकर वर्तमान समय तक ग्राम पंचायत द्वारा निष्पादित कराए गए समस्त विकास कार्यों का रैंडम (यादृच्छिक) आधार पर भौतिक सत्यापन कर विस्तृत आख्या (रिपोर्ट) अविलंब जिला प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत की जाए #Chitrakoot

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एवं पुलिस अधीक्षक की की उपस्थिति में राजापुर तहसील परिसर में संपूर्ण समाधान दिवस संपन्न
 
विगत 3 वर्षों में धारा-24 के तहत पारित आदेशों की पत्थरगड़ी का 15 कार्यदिवसों में प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश

 आईजीआरएस पोर्टल पर निस्तारण का फीडबैक 90% से कम होने पर दी गई कड़ी चेतावनी; शिथिलता बरतने वाले लेखपाल कलेक्ट्रेट संबद्ध किए जाएंगे
 
महिला संबंधी प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें: पुलिस अधीक्षक

 तहसील सभागार राजापुर में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में 'संपूर्ण समाधान दिवस' का आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर चकबंदी, पत्थरगढ़ी, सिंचाई, जलकल, चकरोड अतिक्रमण एवं अन्य विभागों से संबंधित विभिन्न जन-शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए।

जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि संपूर्ण समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण करना है। यह मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि प्राप्त प्रार्थना पत्रों का निस्तारण केवल कागजी न होकर, संबंधित विभागों द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर किया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि फरियादियों को बार-बार न भटकना पड़े।

समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि विगत तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 (सीमांकन/पत्थरगड़ी) के अंतर्गत जितने भी आदेश पारित हुए हैं, उनके अनुपालन में पत्थरगड़ी की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करें। इस संबंध में आगामी 15 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से प्रमाण-पत्र  उपलब्ध कराया जाए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि धारा-116 (बंटवारा) और धारा-24 के वादों का निस्तारण लगातार नियत तिथि (डेट) लगाकर किया जाए। स्थलीय निस्तारण हेतु संबंधित लेखपालों की तिथिवार ड्यूटी निर्धारित की जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जनसमस्याओं के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अथवा शिथिल कार्यप्रणाली वाले लेखपालों को तत्काल प्रभाव से कलेक्ट्रेट संबद्ध (अटैच) कर दिया जाएगा।

समन्वय और पोर्टल प्रबंधन पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण का फीडबैक किसी भी परिस्थिति में 90 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने राजस्व निरीक्षकों एवं लेखपालों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में आपसी सहमति की गुंजाइश हो, वहां दोनों पक्षों में समन्वय स्थापित कर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराएं।

पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने पुलिस बल के अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिलाओं से संबंधित प्रत्येक प्रकरण को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ लिया जाए और उनका प्राथमिकता के आधार पर विधिक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए पुलिस और राजस्व टीम आपसी समन्वय से कार्य करें।

इसी क्रम में जनपद के सभी तहसीलों में  समाधान दिवस का आयोजन किया गया जिसमें राजापुर में 73 मे 7,
मऊ में 138 में 4, मानिकपुर में 66, कर्वी में 90 में से 6 का मौके पर निस्तारण करा दिया गया।

इस संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर उप जिलाधिकारी राजापुर फूलचंद्र यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी, जिला परियोजना अधिकारी सत्यराम यादव, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी  मनोहर लाल धर्मन सहित तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं समस्त संबंधित विभागों के जिला व तहसील स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे

जिलाधिकारी की अध्यक्षता में एवं पुलिस अधीक्षक की की उपस्थिति में राजापुर तहसील परिसर में संपूर्ण समाधान दिवस संपन्न विगत 3 वर्षों में धारा-24 के तहत पारित आदेशों की पत्थरगड़ी का 15 कार्यदिवसों में प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने के निर्देश आईजीआरएस पोर्टल पर निस्तारण का फीडबैक 90% से कम होने पर दी गई कड़ी चेतावनी; शिथिलता बरतने वाले लेखपाल कलेक्ट्रेट संबद्ध किए जाएंगे महिला संबंधी प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित करें: पुलिस अधीक्षक तहसील सभागार राजापुर में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह की गरिमामयी उपस्थिति में 'संपूर्ण समाधान दिवस' का आयोजन संपन्न हुआ। इस अवसर पर चकबंदी, पत्थरगढ़ी, सिंचाई, जलकल, चकरोड अतिक्रमण एवं अन्य विभागों से संबंधित विभिन्न जन-शिकायतें एवं प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने उपस्थित अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि संपूर्ण समाधान दिवस का मुख्य उद्देश्य आम जनमानस की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निस्तारण करना है। यह मुख्यमंत्री की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि प्राप्त प्रार्थना पत्रों का निस्तारण केवल कागजी न होकर, संबंधित विभागों द्वारा स्थलीय निरीक्षण कर किया जाए। जहां आवश्यक हो, वहां राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम द्वारा निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि फरियादियों को बार-बार न भटकना पड़े। समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि विगत तीन वर्षों में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा-24 (सीमांकन/पत्थरगड़ी) के अंतर्गत जितने भी आदेश पारित हुए हैं, उनके अनुपालन में पत्थरगड़ी की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करें। इस संबंध में आगामी 15 दिवस के भीतर अनिवार्य रूप से प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि धारा-116 (बंटवारा) और धारा-24 के वादों का निस्तारण लगातार नियत तिथि (डेट) लगाकर किया जाए। स्थलीय निस्तारण हेतु संबंधित लेखपालों की तिथिवार ड्यूटी निर्धारित की जाए। जिलाधिकारी ने चेतावनी दी कि जनसमस्याओं के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अथवा शिथिल कार्यप्रणाली वाले लेखपालों को तत्काल प्रभाव से कलेक्ट्रेट संबद्ध (अटैच) कर दिया जाएगा। समन्वय और पोर्टल प्रबंधन पर चर्चा करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि आईजीआरएस (एकीकृत शिकायत निवारण प्रणाली) पर प्राप्त शिकायतों के निस्तारण का फीडबैक किसी भी परिस्थिति में 90 प्रतिशत से कम नहीं होना चाहिए। उन्होंने राजस्व निरीक्षकों एवं लेखपालों को निर्देशित किया कि जिन मामलों में आपसी सहमति की गुंजाइश हो, वहां दोनों पक्षों में समन्वय स्थापित कर गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराएं। पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने पुलिस बल के अधिकारियों को निर्देशित किया कि महिलाओं से संबंधित प्रत्येक प्रकरण को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ लिया जाए और उनका प्राथमिकता के आधार पर विधिक निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। कानून-व्यवस्था और भूमि विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए पुलिस और राजस्व टीम आपसी समन्वय से कार्य करें। इसी क्रम में जनपद के सभी तहसीलों में समाधान दिवस का आयोजन किया गया जिसमें राजापुर में 73 मे 7, मऊ में 138 में 4, मानिकपुर में 66, कर्वी में 90 में से 6 का मौके पर निस्तारण करा दिया गया। इस संपूर्ण समाधान दिवस के अवसर पर उप जिलाधिकारी राजापुर फूलचंद्र यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. महेंद्र कुमार त्रिपाठी, जिला परियोजना अधिकारी सत्यराम यादव, बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी मनोहर लाल धर्मन सहित तहसीलदार, नायब तहसीलदार एवं समस्त संबंधित विभागों के जिला व तहसील स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

#चित्रकूट 

खबर का संज्ञान लेते हुए डीएम ने खुद किया बालू खदान का स्थलीय निरीक्षण , अवैध बालू खनन और ओवरलोड परिवहन को लेकर DM के तेवर सख्त!

अवैध खनन / परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने एवं शासन की मंशा के अनुरुप परदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी, चित्रकूट पुलकित गर्ग एवं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रुप से तीरधुमाई गंगू बालू खनन क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया गया। खान अधिकारी रणवीर सिंह द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त खनन पट्टा सुरेन्द्र कुमार शुक्ला पुत्र परमानन्द शुक्ला, निवासी-जौनपुर सदर, जनपद-जौनपुर के पक्ष में अवधि दिनांक 07.04.2026 से 06.04.2031 तक 05 वर्ष हेतु स्वीकृत किया गया है। 

निरीक्षण के दौरान 01 ट्रक (UP92AT-3945) की नम्बर प्लेट अस्पष्ट / धुंधली पायी गयी। गहनता से जाँच करने पर उक्त वाहन के परिवहन विभाग से सम्बन्धित 02 पुराने चालान लम्बित मिले तथा वाहन का टैक्स भी समाप्त पाया गया। जिलाधिकारी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुये इंस्पेक्टर सरधुवा को तत्काल सीज करने के निर्देश दिये गये। पट्टाधारक द्वारा अपने स्वीकृत क्षेत्र में ही खनन कार्य का संचालन किया जाना पाया गया। जिलाधिकारी द्वारा खनन क्षेत्र की निगरानी हेतु स्थापित सीसीटीवी कन्ट्रोल रुम का भी जायजा लिया गया। 

जिलाधिकारी द्वारा सुरक्षा और पारदर्शिता हेतु सीसीटीवी कैमरों को निरंतर सुचारु रुप से रखने के निर्देश दिये गये। निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी की उपस्थिति में मौके पर 01 लोडेड वाहन का धर्मकांटे पर वजन कराया गया, जो मानक के अनुरुप पाया गया। नदी की जलधारा में किसी भी प्रकार का खनन कार्य किया जाना नहीं पाया गया।

जिलाधिकारी ने पट्टाधारक को सख्त हिदायत दी कि बिना वैध रवन्ना के किसी भी वाहन को खनन क्षेत्र से रवाना न किया जाये। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना रवन्ना वाहन मिलने पर चालक / वाहन स्वामी के साथ-साथ खनन पट्टाधारक के विरुद्ध भी कठोर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।

#चित्रकूट खबर का संज्ञान लेते हुए डीएम ने खुद किया बालू खदान का स्थलीय निरीक्षण , अवैध बालू खनन और ओवरलोड परिवहन को लेकर DM के तेवर सख्त! अवैध खनन / परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने एवं शासन की मंशा के अनुरुप परदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी, चित्रकूट पुलकित गर्ग एवं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रुप से तीरधुमाई गंगू बालू खनन क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया गया। खान अधिकारी रणवीर सिंह द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त खनन पट्टा सुरेन्द्र कुमार शुक्ला पुत्र परमानन्द शुक्ला, निवासी-जौनपुर सदर, जनपद-जौनपुर के पक्ष में अवधि दिनांक 07.04.2026 से 06.04.2031 तक 05 वर्ष हेतु स्वीकृत किया गया है। निरीक्षण के दौरान 01 ट्रक (UP92AT-3945) की नम्बर प्लेट अस्पष्ट / धुंधली पायी गयी। गहनता से जाँच करने पर उक्त वाहन के परिवहन विभाग से सम्बन्धित 02 पुराने चालान लम्बित मिले तथा वाहन का टैक्स भी समाप्त पाया गया। जिलाधिकारी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुये इंस्पेक्टर सरधुवा को तत्काल सीज करने के निर्देश दिये गये। पट्टाधारक द्वारा अपने स्वीकृत क्षेत्र में ही खनन कार्य का संचालन किया जाना पाया गया। जिलाधिकारी द्वारा खनन क्षेत्र की निगरानी हेतु स्थापित सीसीटीवी कन्ट्रोल रुम का भी जायजा लिया गया। जिलाधिकारी द्वारा सुरक्षा और पारदर्शिता हेतु सीसीटीवी कैमरों को निरंतर सुचारु रुप से रखने के निर्देश दिये गये। निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी की उपस्थिति में मौके पर 01 लोडेड वाहन का धर्मकांटे पर वजन कराया गया, जो मानक के अनुरुप पाया गया। नदी की जलधारा में किसी भी प्रकार का खनन कार्य किया जाना नहीं पाया गया। जिलाधिकारी ने पट्टाधारक को सख्त हिदायत दी कि बिना वैध रवन्ना के किसी भी वाहन को खनन क्षेत्र से रवाना न किया जाये। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना रवन्ना वाहन मिलने पर चालक / वाहन स्वामी के साथ-साथ खनन पट्टाधारक के विरुद्ध भी कठोर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026