*बेटियां ससुराल को स्वर्ग बना ले तीर्थ पर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी-आचार्य पुलकसागर*
*बेटियों को ये मत सिखाएं कि ससुराल में दबना नहीं उन्हें समझाएं अब वहीं तुम्हारा घर है*
*चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव में पुलक वाणी सुनने उमड़ रहे भीलवाड़ावासी*
भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार )21 अगस्त लड़का एक जिंदगी में एक जीवन जीता है पर लड़किया एक जिंदगी में दो जीवन जीती है। एक जीवन मायके में ओर दूसरा जीवन ससुराल में जीती है। जो बेटियां ससुराल में मायके के अंदाज में जीती है उनका जीवन बिगड़ जाता है। बेटियां अपने ससुराल को सुंदर बना उसे स्वर्ग बनाने की ठान ले तो वह तीर्थ बन जाएगा ओर उन्हें सम्मेदशिखर या वैेष्णवदेवी जैसे तीर्थ पर जाने की जरूरत ही नहीं रहेगी। ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में शुक्रवार को परिवार में बेटियों के महत्व पर प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बेटियों को ससुराल को स्वर्ग बनाना है तो अहंकार कम करना होगा ओर मां बाप को उस सोच का त्याग करना होगा जिसमें बेटियों से कहां जाता है कि ससुराल में किसी से डरना या दबना मत। इस सोच से बेटियों का घर उजड़ रहा है ओर ऐसा होने पर माता पिता भी चैन से नहीं रह पाएंगे। उन्हें समझाएं कि शादी के बाद अब वहीं उनका घर है। विवाहित बेटियां भी ध्यान रखे कि ससुराल की समस्याओं का रोना मायके में रोने पर इज्जत कम होगी ओर मान सम्मान बनाए रखना है तो वहां की समस्याओं का समाधान वहीं ढूंढना पड़ेगा। बेटियां समस्याओं को अपनी ताकत बनाना सीख जाए। आचार्यश्री ने कहा कि जिस संस्कृति में ये कहा जाता है कि बेटी की डोली पीहर से ओर अर्थी ससुराल से उठती है वहां उसे तलाक के लिए मत उकसाओ। जिसे सबमें खराबी नजर आए समझ लेना उसमें ही खराबी है। सास बहु एक दूसरे को पराई मानने की बजाय मां बेटी के समान प्यार करे ओर सास बहु को इतना प्यार दे कि वह मायके के मोबाइल नम्बर भूल जाए फिर घर स्वर्ग बनते देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि बेटियां ससुराल को अपना मानेगी तो ससुरालवाले भी उसे पलकों पर रखेंगे। शादी के बाद बेटियों का सम्मान मायके में नहीं ससुराल में होता है। आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि पैसे से अधिक महत्व संस्कारों का है ओर संस्कार हमारे आचरण,खानपान ओर जीवनशैली में दिखने चाहिए। हमारे बच्चों को सुविधाएं देने से अधिक जरूरी संस्कार देना है। बच्चों से लाड़ प्यार करो पर इतना मत करो कि उनका भविष्य बर्बाद हो जाए।
उन्होंने कहा कि बेटियां खेलने की चीज नहीं है उन्हें खिलोना बनाकर मत रखो। बचपन से देवी बनाई तो वह लोगों के ह्दय में स्थान बनाएगी। बेटियों को अच्छी शिक्षा प्रदान करे लेकिन इतना भी मॉर्डन नहीं बनाए कि वह 30 साल की हो जाए ओर शादी नहीं करना चाहे। उनकी उम्र जितनी अधिक होती जाएगी ससुराल में एडजस्ट करना उतना ही मुश्किल होता जाएगा। उज्जवल भविष्य डिग्री से नहीं अच्छे नेचर से बनता है।
आचार्यश्री ने कहा कि हम खुद को छोड़ सबको बदलना चाहते है इसलिए कोई नहीं बदलता। कोई किसी को नहीं बदल सकता जब तक आप खुद नहीं बदलना चाहे। खुद को बदल लिया तो परिवार के साथ जीने में आनंद आ जाएगा। जीवन जीने का थोड़ा सा एंगल बदल लिया तो दुःखी जीवन भी सुखी बन सकता।
आचार्य पुलकसागर ने कहा कि जिंदगी का गणित उलटा होता है जो दुनिया से नजर हटा लेता है उस पर दुनिया की नजर टिक जाती है। जिंदगी को संवार ले तो मौत भी संवर जाएगी। पलके झुकाकर जियो दुनिया तुम्हे पलकों पर रखेगी। तीर्थंकरों की प्रतिमाएं देख लो पलके झुकी हुई है तो दुनिया ने उन्हें पलकों पर बिठा लिया है। हम अपने आज को संवार ले तो कल स्वत संवर जाएगा। वास्तु सुधारने से नहीं मन को सुधारने से घर अच्छा बनेगा।
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य प्रेमचंद जम्बूकुमार ललित मनोज भैसा परिवार ने प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया। आरके आरसी महिला मण्डल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंच रहे है। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। है।
Bhilwara, Bhilwara | Aug 21, 2026