इंदौर में मंदिर पर चली JCB को लेकर अब आस्था और विकास के बीच बहस तेज हो गई है।
सवाल ये है कि जब मंदिर आस्था का केंद्र है, तो इसे तोड़ने की ऐसी क्या मजबूरी आ गई?
आखिर जमीन की ऐसी क्या जरूरत पड़ गई कि लोगों की आस्था से जुड़े मंदिर को ही ध्वस्त करना पड़ा?
विकास जरूरी है, शहर का विस्तार भी जरूरी है…
लेकिन क्या विकास का रास्ता आस्था को चोट पहुंचाकर ही निकलेगा?
मंदिर सिर्फ ईंट-पत्थरों से बनी इमारत नहीं होती…
वह लाखों लोगों की आस्था, विश्वास और भावनाओं का केंद्र होती है।
अब सवाल यही है—
क्या यही है भक्ति? क्या यही है आस्था?
और क्या विकास के साथ आस्था के लिए कोई रास्ता नहीं निकाला जा सकता?
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Korba, Korba | Sep 8, 2026