#निवास - सड़क किनारे अवैध पार्किंग...यातायात व्यवस्था पर गंभीर प्रश्न
निवास मुख्य तिराहा पर सड़क किनारे वाहनों की अवैध पार्किंग ने आम राहगीरों के लिए परेशानी खड़ी कर दी है। इससे न केवल यातायात प्रभावित हो रहा है, बल्कि पैदल चलने वालों को भी सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। नतीजतन, दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। यह स्थिति शहर की यातायात व्यवस्था और प्रशासनिक सक्रियता पर सवाल खड़े करती है।
किसी भी शहर की सड़कें केवल वाहनों के लिए नहीं, बल्कि पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और आम जनजीवन के लिए होती हैं। जब सड़क किनारे बेतरतीब ढंग से वाहन खड़े कर दिए जाते हैं, तो सड़क की उपयोगी चौड़ाई स्वतः कम हो जाती है। ऐसे में जाम, हॉर्निंग और अराजकता स्वाभाविक है।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि आपातकालीन सेवाओं—एंबुलेंस, दमकल या पुलिस वाहनों—को भी समय पर रास्ता नहीं मिल पाता।
स्थानीय लोगों की मांग बिल्कुल जायज है कि पुलिस प्रशासन इस ओर मुख्य तौर पर ध्यान दे। केवल चेतावनी बोर्ड लगाना या कभी-कभार चालान काटना पर्याप्त नहीं होगा।
आवश्यकता है ठोस और निरंतर कार्रवाई की। पुलिस को चाहिए कि वह संबंधित क्षेत्र में नियमित निगरानी रखे, नो-पार्किंग जोन को स्पष्ट रूप से चिह्नित करे और बार-बार नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। साथ ही, वैकल्पिक पार्किंग व्यवस्था विकसित करना भी उतना ही जरूरी है, ताकि लोगों को विवशता में सड़क किनारे वाहन न खड़े करने पड़ें।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि केवल प्रशासन पर दोष मढ़ना समाधान नहीं है। नागरिकों को भी स्वयं अनुशासन दिखाना होगा।
यदि हम स्वयं सड़क किनारे वाहन खड़े करेंगे, तो दूसरों के लिए समस्या उत्पन्न होगी। जागरूकता अभियान, स्थानीय व्यापारियों और रहवासियों से संवाद तथा सामुदायिक सहभागिता से ही स्थायी समाधान निकल सकता है।
अब देखना यह है कि पुलिस प्रशासन कितनी तत्परता दिखाता है। लेकिन इतना तय है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो सकती है। सड़क सुरक्षा केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि जीवन और मृत्यु का प्रश्न है। इसलिए इस ओर गंभीर और तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है।
दिनेश कुमार प्रजापति
Niwas, Mandla | Sep 12, 2026