प्रकृति और वनौषधियों पर आधारित इलेक्ट्रोहोम्योपैथी पर चम्बा में राष्ट्रीय मंथन
16 राज्यों से करीब 130 चिकित्सक, विशेषज्ञ और शोधकर्ता हुए शामिल, 15 शोधपत्र किए गए प्रस्तुत
चम्बा, 27 सितंबर। चम्बा के परेल स्थित शिव शक्ति पैलेस में इलेक्ट्रोहोम्योपैथी का 20वां राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया गया। पांच दिवसीय इस सम्मेलन में देश के 16 राज्यों से करीब 130 चिकित्सक, विशेषज्ञ और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। सम्मेलन के दौरान इलेक्ट्रोहोम्योपैथी से जुड़े विभिन्न विषयों पर 15 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए।
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी, जिसे इलेक्ट्रोपैथी भी कहा जाता है, एक वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है। आयोजकों के अनुसार इसकी शुरुआत वर्ष 1865 में इटली के चिकित्सक काउंट सीज़र मैटी ने की थी। सम्मेलन में औषधीय वनस्पतियों, दवाओं के निर्माण, उपचार पद्धति, शोध तथा इस पद्धति की वर्तमान स्थिति और भविष्य की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
हिमाचल इलेक्ट्रोहोम्योपैथिक चिकित्सक संगठन और रबिसन इंडिया इलेक्ट्रोहोम्योपैथी फार्मा सहित विभिन्न संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन में बताया गया कि इलेक्ट्रोहोम्योपैथी में 114 औषधीय वनस्पतियों के उपयोग का उल्लेख किया जाता है। आयोजकों के अनुसार इनमें से करीब 96 प्रजातियां चम्बा की पहाड़ियों में पाई जाती हैं।
सम्मेलन में प्रतिभागियों को चम्बा स्थित रबिसन इंडिया की प्रयोगशाला में हिमालयी क्षेत्र की ताजा वनस्पतियों पर आधारित औषधियों के निर्माण की प्रक्रिया का लाइव डेमो भी दिखाया गया। इसके माध्यम से चिकित्सकों और शोधकर्ताओं ने वनस्पतियों के प्रसंस्करण तथा हर्बल दवाओं के निर्माण की तकनीकी प्रक्रिया को समझा।
इस दौरान चिकित्सकों को वोटेक्निकल गार्डन और खज्जियार रेंज का भ्रमण भी करवाया गया। प्रतिभागियों ने विभिन्न वनौषधियों को उनके प्राकृतिक परिवेश में देखा और उनके औषधीय महत्व के बारे में जानकारी हासिल की।
संस्थान के निदेशक डॉ. संजीव शर्मा ने कहा कि पिछले करीब तीन दशकों से इस क्षेत्र में शोध कार्य किया जा रहा है और यहां तैयार हर्बल दवाएं देश के विभिन्न हिस्सों में उपलब्ध करवाई जा रही हैं। उन्होंने चिकित्सकों से वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक पहलुओं को समझकर लोगों तक सही और जिम्मेदार जानकारी पहुंचाने का आह्वान किया।
राज्य संयोजक सुरेंद्र ठाकुर ने कहा कि इलेक्ट्रोहोम्योपैथी को मान्यता दिलाने के लिए लंबे समय से प्रयास किए जा रहे हैं। उनके अनुसार हाल ही में आईसीएमआर की टीम ने हिमाचल दौरे के दौरान चम्बा स्थित प्रयोगशाला, धर्मशाला स्थित शैक्षणिक केंद्र और चिकित्सकों की कार्यप्रणाली का निरीक्षण कर जानकारी जुटाई है। उन्होंने बताया कि टीम की रिपोर्ट सरकार के समक्ष रखी जानी है।
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के मथुरा से पहुंचे डॉ. आरपी सैनी ने पित्ते की पथरी से जुड़े एक मरीज के उपचार का मामला और संबंधित दस्तावेज भी प्रस्तुत किए। वहीं तमिलनाडु के डॉ. थिरूमूर्ति, महाराष्ट्र के डॉ. रवि नितनवरे और गुजरात के डॉ. राज कुमार रावल सहित अन्य चिकित्सकों ने खज्जियार की प्राकृतिक संपदा तथा चम्बा में तैयार की जा रही इलेक्ट्रोहोम्योपैथी दवाओं को लेकर अपने अनुभव साझा किए।
नोट: इलेक्ट्रोहोम्योपैथी को वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। किसी बीमारी के उपचार या दवा की प्रभावशीलता से जुड़े दावों को वैज्ञानिक प्रमाण और संबंधित नियामक संस्थाओं की मान्यता के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
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Chamba, Chamba | Sep 27, 2026