चंपाड़ में वन संरक्षण की मिसाल, 11 हजार पौधों में 80 फीसदी जीवित : डीएफओ रजनीश महाजन।
सामुदायिक सहभागिता से चराई पर नियंत्रण, कैल सहित कई प्रजातियों का प्राकृतिक पुनर्जनन शुरू
हिमाचल 84 टीवी ब्यूरो भरमौर।
भरमौर वन परिक्षेत्र के सैंडी ब्लॉक की सिरड़ी बीट में ग्राम पंचायत बड़ग्राम के अंतर्गत हरचू सीमांकित संरक्षित वन (डीपीएफ) में चंपाड़ प्रतिपूरक वनीकरण क्षेत्र वन संरक्षण और सामुदायिक सहभागिता का बेहतर उदाहरण बनकर उभरा है। डीएफओ रजनीश महाजन ने बताया कि वर्ष 2023-24 में 10 हेक्टेयर क्षेत्र में 11 हजार पौधे लगाए गए थे, जिनमें करीब 80 प्रतिशत पौधों का जीवित रहना ऊंचाई वाले क्षेत्र की परिस्थितियों को देखते हुए उत्साहजनक है।
उन्होंने बताया कि समुद्र तल से 2325 से 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इस क्षेत्र में देवदार, बांई, हॉर्स चेस्टनट, विलो और कैल जैसी स्थानीय एवं पर्यावरण के अनुकूल प्रजातियों का पौधरोपण किया गया है। क्षेत्र में कैल, देवदार, फर, स्प्रूस और हॉर्स चेस्टनट सहित कई प्रजातियों की प्राकृतिक वनस्पति भी मौजूद है।
डीएफओ के अनुसार इस क्षेत्र की सबसे सकारात्मक उपलब्धि कैल के प्राकृतिक पुनर्जनन के रूप में सामने आई है। इसके साथ हिमालयन पॉपलर तथा विभिन्न जड़ी-बूटियों, झाड़ियों और स्थानीय घास का भी प्राकृतिक रूप से पुनर्जनन हो रहा है। प्रभावी संरक्षण और चराई के दबाव में कमी से प्राकृतिक पुनर्जनन को बढ़ावा मिला है।
उन्होंने बताया कि पौधरोपण से पहले बड़ग्राम पंचायत के पल्लानी और पंजारी गांवों के ग्रामीणों एवं स्थानीय हितधारकों के साथ बैठकें की गई थीं। ग्रामीणों ने क्षेत्र की सुरक्षा और चराई से बचाव में सहयोग दिया, जिसका पौधों के संरक्षण और प्राकृतिक पुनर्जनन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ा।
रजनीश महाजन ने कहा कि चंपाड़ क्षेत्र यह दर्शाता है कि पौधरोपण के साथ प्रभावी संरक्षण और स्थानीय समुदाय की भागीदारी से वन क्षेत्रों को बेहतर तरीके से पुनर्जीवित किया जा सकता है। उन्होंने क्षेत्र की सुरक्षा, नियमित निगरानी और आवश्यकतानुसार गैप फिलिंग जारी रखने पर जोर दिया।