सुराल घाटी की खूबसूरती पर गंदगी का ग्रहण, बढ़ते पर्यटन के साथ बढ़ा कचरे का संकट
पांगी की खूबसूरत सुराल घाटी… जहां लोग सुकून और प्रकृति का आनंद लेने पहुंचते हैं, वही घाटी अब प्लास्टिक और गंदगी की चपेट में आती नजर आ रही है। आखिर इसके लिए जिम्मेदार कौन है—पर्यटक, स्थानीय लोग या हमारी व्यवस्था?
पांगी घाटी की सबसे खूबसूरत और प्राकृतिक स्थलों में शामिल सुराल घाटी की कुछ तस्वीरें और वीडियो इन दिनों चिंता बढ़ा रहे हैं।
वीडियो में जगह-जगह बिखरा प्लास्टिक और अन्य कचरा दिखाई दे रहा है। जिस सुराल घाटी को स्वच्छ और प्लास्टिक मुक्त बनाने की बात लगातार की जाती है, उसी घाटी में इस तरह की गंदगी पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर सवाल खड़े करती है।
सुराल में पर्यटन बढ़ने के साथ यहां आने वाले लोगों की संख्या भी बढ़ी है। लेकिन समस्या सिर्फ बाहरी पर्यटकों तक सीमित नहीं है। स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में यहां घूमने और पिकनिक मनाने पहुंचते हैं और कई बार खाने-पीने की सामग्री के पैकेट, बोतलें और अन्य कचरा वहीं छोड़ देते हैं।
स्थानीय लोगों और विभिन्न संगठनों द्वारा हर वर्ष कई बार सफाई अभियान चलाए जाते हैं। बड़ी मात्रा में कचरा हटाया भी जाता है, लेकिन कुछ समय बाद स्थिति फिर पहले जैसी दिखाई देने लगती है।
ऐसे में अब केवल सफाई अभियान पर्याप्त नहीं होंगे। सुराल घाटी को बचाने के लिए स्थानीय क्लबों, महिला संगठनों और पंचायत स्तर पर कड़े और प्रभावी नियम बनाने की आवश्यकता है।
घाटी में प्लास्टिक के इस्तेमाल पर नियंत्रण, कचरा वापस ले जाने की व्यवस्था, नियमित निगरानी और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई जैसे कदम उठाने होंगे।
क्योंकि सुराल केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि पांगी की प्राकृतिक धरोहर है।
अगर आज हमने इसे नहीं बचाया, तो आने वाली पीढ़ियां इसकी खूबसूरती को सिर्फ तस्वीरों में ही देख पाएंगी।
इसलिए संदेश बिल्कुल साफ है—
“सुराल आएं, प्रकृति का आनंद लें… लेकिन कचरा छोड़कर नहीं, अपनी जिम्मेदारी निभाकर जाएं।”
वीडियो: @9459723520 / राजेंद्र कुमार
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Saach, Chamba | Sep 8, 2026