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#चित्रकूट खबर का संज्ञान लेते हुए डीएम ने खुद किया बालू खदान का स्थलीय निरीक्षण , अवैध बालू खनन और ओवरलोड परिवहन को लेकर DM के तेवर सख्त! अवैध खनन / परिवहन पर प्रभावी अंकुश लगाने एवं शासन की मंशा के अनुरुप परदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी, चित्रकूट पुलकित गर्ग एवं पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रुप से तीरधुमाई गंगू बालू खनन क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया गया। खान अधिकारी रणवीर सिंह द्वारा अवगत कराया गया कि उक्त खनन पट्टा सुरेन्द्र कुमार शुक्ला पुत्र परमानन्द शुक्ला, निवासी-जौनपुर सदर, जनपद-जौनपुर के पक्ष में अवधि दिनांक 07.04.2026 से 06.04.2031 तक 05 वर्ष हेतु स्वीकृत किया गया है। निरीक्षण के दौरान 01 ट्रक (UP92AT-3945) की नम्बर प्लेट अस्पष्ट / धुंधली पायी गयी। गहनता से जाँच करने पर उक्त वाहन के परिवहन विभाग से सम्बन्धित 02 पुराने चालान लम्बित मिले तथा वाहन का टैक्स भी समाप्त पाया गया। जिलाधिकारी ने इस पर कड़ा रुख अपनाते हुये इंस्पेक्टर सरधुवा को तत्काल सीज करने के निर्देश दिये गये। पट्टाधारक द्वारा अपने स्वीकृत क्षेत्र में ही खनन कार्य का संचालन किया जाना पाया गया। जिलाधिकारी द्वारा खनन क्षेत्र की निगरानी हेतु स्थापित सीसीटीवी कन्ट्रोल रुम का भी जायजा लिया गया। जिलाधिकारी द्वारा सुरक्षा और पारदर्शिता हेतु सीसीटीवी कैमरों को निरंतर सुचारु रुप से रखने के निर्देश दिये गये। निरीक्षण के क्रम में जिलाधिकारी की उपस्थिति में मौके पर 01 लोडेड वाहन का धर्मकांटे पर वजन कराया गया, जो मानक के अनुरुप पाया गया। नदी की जलधारा में किसी भी प्रकार का खनन कार्य किया जाना नहीं पाया गया। जिलाधिकारी ने पट्टाधारक को सख्त हिदायत दी कि बिना वैध रवन्ना के किसी भी वाहन को खनन क्षेत्र से रवाना न किया जाये। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना रवन्ना वाहन मिलने पर चालक / वाहन स्वामी के साथ-साथ खनन पट्टाधारक के विरुद्ध भी कठोर विधिक कार्यवाही सुनिश्चित की जायेगी।

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

MORE NEWS

🚨 ब्रेकिंग | चित्रकूट 🚨

जनपद चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम कर्वी पहुचे राजापुर  तो वही एसडीएम राजापुर पहुचे कर्वी और संयुक्त अभियान चलाते हुए ओवरलोडिंग एवं संदिग्ध खनन गतिविधियों में लिप्त करीब आधा दर्जन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की।

कार्रवाई के बाद अवैध खनन और ओवरलोडिंग के कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है। जिले में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन कार्रवाई कर सकता है तो फिर खनिज विभाग और आरटीओ विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई करने से क्यों बचते रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खेल पर पूरी तरह अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वे आखिर कार्रवाई से दूरी क्यों बनाए हुए हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा रहस्य छिपा है या फिर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं?

फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिले में अवैध खनन माफियाओं की नींद जरूर उड़ा दी है।

🚨 ब्रेकिंग | चित्रकूट 🚨 जनपद चित्रकूट में अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई से खनन माफियाओं में हड़कंप मच गया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर एसडीएम कर्वी पहुचे राजापुर तो वही एसडीएम राजापुर पहुचे कर्वी और संयुक्त अभियान चलाते हुए ओवरलोडिंग एवं संदिग्ध खनन गतिविधियों में लिप्त करीब आधा दर्जन वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की। कार्रवाई के बाद अवैध खनन और ओवरलोडिंग के कारोबार से जुड़े लोगों में खलबली मची हुई है। जिले में यह कार्रवाई चर्चा का विषय बनी हुई है और लोगों के बीच सवाल उठ रहे हैं कि जब प्रशासन कार्रवाई कर सकता है तो फिर खनिज विभाग और आरटीओ विभाग अब तक प्रभावी कार्रवाई करने से क्यों बचते रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अवैध खनन और ओवरलोडिंग के खेल पर पूरी तरह अंकुश लगाने की जिम्मेदारी जिन विभागों पर है, वे आखिर कार्रवाई से दूरी क्यों बनाए हुए हैं? क्या इसके पीछे कोई बड़ा रहस्य छिपा है या फिर जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं? फिलहाल प्रशासन की इस कार्रवाई ने जिले में अवैध खनन माफियाओं की नींद जरूर उड़ा दी है।

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग'

नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है।

नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव

 एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं।

प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! 

​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी
चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर"

​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है।

​ जलधारा का कत्लेआम 

नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है।

चलने लायक नहीं बचीं सड़कें 

​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं।
​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं।

#mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

बुंदेलखंड में नियमों को निगलती पोकलैंड मशीनें ? एनजीटी के आदेशों की सरेआम 'माइनिंग' नदियों के अस्तित्व को सहेजने और पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए बनाए गए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के कड़े नियम और सरकारी दावे धरातल पर कितने खोखले हैं, इसकी बानगी चित्रकूट जिले के राजापुर तहसील के अंतर्गत तीर घुमाई गंगू (खंड संख्या 03) और गडौली बालू खदान की तस्वीरो में आप देख सकते हैं । तस्वीरें झूठ नहीं बोलतीं। 19 जून 2026 की सुबह तीर घुमाई गंगू में ग्रामीणों द्वारा मोबाइल में रिकॉर्ड किए गए इस वीडियो में जो कुछ दिख रहा है, वह किसी स्वीकृत और सीमित खनन की परिभाषा में नहीं आता, बल्कि यह नदियों के सीने को छलनी करने वाला एक संगठित खेल है। नदी की जलधारा के बीच पोकलैंड का तांडव एनजीटी का स्पष्ट नियम है कि खनन में भारी मशीनों (जैसे पोकलैंड) का उपयोग नदी के पानी या उसके ठीक किनारे पर नहीं किया जा सकता, ताकि जलीय पारिस्थितिकी नष्ट न हो। लेकिन वीडियो में एक नहीं, बल्कि कई भारी पोकलैंड मशीनें सीधे नदी के बहाव क्षेत्र और टापू जैसी जगहों से बालू खोदकर ट्रकों में लोड करती नजर आ रही हैं। वीडियो में एक साथ 15 से 20 भारी ट्रक और डंपर कतार में खड़े दिखाई दे रहे हैं। यह इस बात का सबूत है कि यहां सिर्फ 'सीमित' खनन नहीं हो रहा, बल्कि नदियों का कमर्शियल दोहन बेहद आक्रामक गति से जारी है। मशीनों और ट्रकों को नदी के भीतर तक ले जाने के लिए अवैध रूप से मिट्टी और बालू पाटकर रास्ते (रैंप) बनाए गए हैं, जो नदी के प्राकृतिक प्रवाह को पूरी तरह बाधित करते हैं। प्रशासन भले ही फाइलों में 'ऑल इज वेल' की रिपोर्ट भेज दे, लेकिन ग्राउंड जीरो से आई ये तस्वीरें चीख-चीख कर कह रही हैं कि नदियों को बचाने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। देखना यह है कि इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या यह खेल यूं ही अनवरत चलता रहेगा ! ​"दिन का चैन लूटा, रात की नींद उड़ी चौबीस घंटे जारी है बर्बादी का ये दौर" ​स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस क्षेत्र में तथाकथित 'वैध' पट्टों की आड़ में 24 घंटे अवैध खनन और ओवरलोड परिवहन का नंगा नाच चल रहा है। सूर्यास्त के बाद जहां प्रशासनिक अमला सो जाता है, वहीं इन खदानों में पोकलैंड मशीनों की गड़गड़ाहट और डंपरों की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। ​ जलधारा का कत्लेआम नदी की मुख्य जलधारा से कम से कम 50 मीटर की दूरी से बालू उठाई जानी चाहिए। लेकिन यहां मुनाफाखोरी के चक्कर में सीधे बहती जलधारा के बीच से बालू निकाली जा रही है। पानी के भीतर बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए गए हैं, जिससे नदी का स्वाभाविक बहाव और स्वरूप पूरी तरह विकृत (खराब) हो चुका है। यह आने वाले दिनों में भयंकर जल संकट या अचानक बाढ़ की विभीषिका को न्योता दे रहा है। चलने लायक नहीं बचीं सड़कें ​सैकड़ों टन ओवरलोडेड बालू लादकर जब ये डंपर रात-दिन दौड़ते हैं, तो ग्रामीण इलाकों की पक्की सड़कें भी मिट्टी में तब्दील हो जाती हैं। ​सड़कें जगह-जगह से 2 से 3 फीट तक धंस चुकी हैं। ​पूरी सड़क पर सिर्फ गहरे गड्ढे और उड़ती हुई धूल बची है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों का पैदल या बाइक से चलना भी जानलेवा हो चुका है। ​सरकार की 'गड्ढामुक्त सड़क' योजना को ये ओवरलोडेड बालू माफिया हर रोज ठेंगा दिखा रहे हैं। #mining #bundelkhand #chitrakoot #NGT

Manikpur, Chitrakoot | Jun 20, 2026