कुरुक्षेत्र में ‘वीर चंद्र सिंह गढ़वाली’ नाटक के मंचन के साथ पंचजन्य नाट्य समारोह हुआ सम्पन्न
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शहीदों की गाथाएं युवाओं में भरती हैं राष्ट्रवाद की भावनाः कुलपति प्रो. राम पाल सैनी
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कुरुक्षेत्र की धरा पर देहरादून के कलाकारों ने जीवंत किया पेशावर कांड का गौरवशाली इतिहास, दर्शक हुए भावुक
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हरियाणा कला परिषद और उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के साझा प्रयास से कुरुक्षेत्र में बिखरे रंगमंच के अनूठे रंग
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कुरुक्षेत्र 22 अगस्त। हरियाणा कला परिषद तथा उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज (संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार) के संयुक्त तत्वावधान में कुरुक्षेत्र के कला कीर्ति भवन (भरतमुनि रंगशाला) में आयोजित पांच दिवसीय पंचजन्य नाट्य समारोह का शुक्रवार शाम भव्य समापन हुआ। समारोह के अंतिम दिन पंचम वेद क्रिएशन्स चौरिटेबल ट्रस्ट, देहरादून के कलाकारों द्वारा अभिनीत ऐतिहासिक नाटक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का मंचन किया गया। इस नाटक का लेखन प्रसिद्ध नाटककार ललित सिंह पोखरिया द्वारा किया गया और निर्देशन अनुराग वर्मा ने किया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के कुलपति प्रो. राम पाल सैनी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरियाणा स्टेट वेयरहाउसिंग कॉर्पाेरेशन के अध्यक्ष एडवोकेट रामकिशन शर्मा ने की। इस अवसर पर विशेष रूप से हरियाणा कला परिषद के संयुक्त सचिव व सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग के परियोजना निदेशक डा. पवन आर्य मौजूद रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में हरियाणा कला परिषद के उपाध्यक्ष महेश जोशी ने सभी अतिथियों का शाब्दिक स्वागत किया और उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। महेश जोशी ने कुरुक्षेत्र के दर्शकों को विभिन्न राज्यों के रंगों से रुबरु करवाने के लिए उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक सुदेश शर्मा का आभार व्यक्त किया। मंच का संचालन विकास शर्मा द्वारा किया गया।
हुकूमत के जुल्म पर भारी पड़ा कौमी जज्बा, नाटक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली ने जीता सबका दिल
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नाटक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली में देहरादून से आए कलाकारों ने अपने जीवंत और सधे हुए अभिनय से इतिहास के पन्नों को दर्शकों के सामने जीवंत कर दिया। नाटक में मुख्य रूप से सन 1930 के ऐतिहासिक पेशावर कांड के महानायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के साहस, राष्ट्रभक्ति और उनके जीवन संघर्ष को दिखाया गया। नाटक में दिखाया गया कि कैसे ब्रिटिश सेना में हवलदार मेजर पद पर तैनात चंद्र सिंह ने देशप्रेम के आगे अपनी नौकरी और जान की परवाह नहीं की। जब क्रूर अंग्रेज हुकूमत ने उन्हें खान अब्दुल गफ्फार खान के नेतृत्व में अहिंसक आंदोलन कर रहे निहत्थे जलसाकार पठानों पर अंधाधुंध गोलियां चलाने का हुक्म दिया, तो चंद्र सिंह ने गढ़वाली सीज फायर (गोली मत चलाओ) का नारा देकर इतिहास बदल दिया। नाटक के माध्यम से उनकी इस बगावत के बाद उन्हें मिली कठोर जेल की यातनाओं, कोर्ट मार्शल और उनके अटूट देश प्रेम के जज्बे को बेहद मार्मिक व जोशीले ढंग से प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों की आंखें नम कर दीं। कार्यक्रम के बाद मुख्य अतिथि प्रो. रामपाल सैनी ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि रंगमंच केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज और इतिहास का दर्पण है। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली जैसे गुमनाम नायकों की गाथाएं आज की युवा पीढ़ी में राष्ट्रवाद, नैतिकता और देश सेवा की भावना को कूट-कूट कर भरती हैं। ऐसे ऐतिहासिक नाटक हर शिक्षण संस्थान और युवा के बीच पहुंचने चाहिए। अंत में सभी कलाकारों तथा अतिथियों को हरियाणा कला परिषद की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस मौके पर एनसीजेडसीसी के प्रतिनिधि मंथन ठाकुर, पूर्व जिला जनसम्पर्क अधिकारी देवराज सिरोहीवाल, विनोद शर्मा, रजनीश गुप्ता, सुरेखा, शिवकुमार किरमिच सहित भारी संख्या में रंग प्रेमी उपस्थित रहे।