*कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र डिंडौरी में महिला दिवस कार्यक्रम आयोजित*
*पराली एवं नरवाई नहीं जलाने का कृषकों ने लिया संकल्प, प्राकृतिक खेती और मृदा स्वास्थ्य संरक्षण पर दिया गया जोर*
मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र, डिंडौरी के सभाकक्ष में महिला दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि सखियों, प्रगतिशील महिला कृषकों, प्राकृतिक खेती करने वाली महिला कृषकों तथा विभागीय महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने सहभागिता की। इस दौरान फसल अवशेष प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण तथा पर्यावरण सुरक्षा के संबंध में कृषकों को जागरूक किया गया।
कार्यक्रम में आत्मा परियोजना की परियोजना संचालक श्रीमती अरुणिमा सेन ने फसल कटाई के बाद खेतों में बची पराली एवं नरवाई को जलाने के बजाय उसका उचित प्रबंधन करने, जैविक खाद तैयार करने तथा मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाकर उर्वरा शक्ति बनाए रखने की जानकारी दी। उन्होंने फसल अवशेषों को कृषि के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
उपसंचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास डॉ. राजेश सिंह चौहान ने पराली एवं नरवाई जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण, मिट्टी की उर्वरा शक्ति में कमी तथा पर्यावरण एवं जीव-जंतुओं को होने वाले नुकसान के बारे में बताया। उन्होंने कृषकों से फसल अवशेषों को जलाने के बजाय उनके उचित प्रबंधन की अपील की।
कृषि विज्ञान केंद्र डिंडौरी के वैज्ञानिक डॉ. के.के. देशमुख एवं श्री अवधेश कुमार पटेल ने प्राकृतिक खेती के महत्व और उसमें उपयोग होने वाले विभिन्न घटकों की जानकारी दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती की पद्धतियां अपनाकर मृदा स्वास्थ्य सुधारने तथा पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने के लिए कृषकों को प्रेरित किया।
कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य श्री कृष्ण चौहान ने यूरिया सहित रासायनिक उर्वरकों के अनावश्यक एवं अत्यधिक उपयोग से बचने तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड की अनुशंसाओं के अनुसार संतुलित मात्रा में उर्वरकों का उपयोग करने की सलाह दी। उन्होंने प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया। वहीं, मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला के प्रभारी श्री जगदीश बिसेन ने मिट्टी में पोषक तत्वों की उपलब्धता बढ़ाने तथा पोषक तत्वों की कमी से फसलों में होने वाले दुष्प्रभावों के संबंध में मार्गदर्शन दिया।
कृषि अभियांत्रिकी की सब इंजीनियर सुश्री पूनम कोरम ने नरवाई प्रबंधन में उपयोग होने वाले कृषि यंत्रों की जानकारी दी। कार्यक्रम में आत्मा परियोजना के अधिकारी-कर्मचारी, बीटीएम, एटीएम, कृषि विस्तार एवं प्रशिक्षण केंद्र तथा कृषि अभियांत्रिकी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और महिला कृषक उपस्थित रहीं।
*कृषकों ने ली पराली एवं नरवाई नहीं जलाने की शपथ*
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित कृषकों ने पराली एवं नरवाई नहीं जलाने तथा फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने की शपथ ली। उन्होंने अपने खेतों एवं गांवों को स्वच्छ, सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने में योगदान देने का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से संदेश दिया गया कि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने, वायु प्रदूषण कम करने तथा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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Dindori, Madhya Pradesh | Oct 15, 2026