₹4.40 लाख के रेलिंग निर्माण में बिलों पर उठे गंभीर सवाल, 18% GST के नाम पर गणना में बड़ी गड़बड़ी!
छतरपुर। ग्राम पंचायत अचट्टा में पंचायत भवन परिसर में रेलिंग निर्माण के नाम पर ₹4.40 लाख की राशि का भुगतान किया गया। पंचायत दर्पण के रिकॉर्ड के अनुसार इस कार्य की लागत ₹4.40 लाख है और भुगतान तीन बिलों के माध्यम से S.K. Mohini Steel को किया गया—₹1.76 लाख, ₹1.32 लाख और ₹1.32 लाख। तीनों भुगतानों की स्थिति पोर्टल पर Payment Done दर्ज है।
लेकिन अब इस पूरे भुगतान को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पंचायत दर्पण में कार्य का विवरण “Railing Nirman Kary Panchayat Bhawan Prangan” दर्ज है। मौके पर दिखाई दे रहे निर्माण में केवल स्टील ही नहीं, बल्कि सीमेंट, ईंट, गिट्टी, बालू, पानी और मजदूरी जैसी सामग्री एवं श्रम का उपयोग होना स्वाभाविक है। इसके बावजूद उपलब्ध दस्तावेजों में भुगतान के लिए लगाए गए बिलों में मुख्य रूप से “स्टील वर्क” ही दर्शाया गया है।
सबसे बड़ा सवाल GST की गणना को लेकर है।
तीनों बिलों में CGST 9% और SGST 9% यानी कुल 18% GST का उल्लेख किया गया है, लेकिन बिल में लिखी टैक्स राशि और मूल राशि का गणित आपस में मेल नहीं खाता। उदाहरण के तौर पर ₹1,25,714.28 की राशि पर 9% CGST लगभग ₹11,314 बनता है, जबकि बिल में CGST के रूप में केवल ₹3,142.86 दर्ज है। इसी तरह SGST में भी यही राशि दिखाई गई है।
यानी बिल में 18% GST दर्शाने के बावजूद उसकी गणना अलग तरीके से की गई है। तीनों बिलों के आंकड़ों की जांच की जाए तो टैक्स गणना में प्रथम दृष्टया गंभीर विसंगति नजर आती है।
एक और बड़ा सवाल—सामान आया कहां से?
बताया गया है कि इस मामले में GST विभाग से भी जानकारी मांगी गई है और विभागीय जानकारी के अनुसार संबंधित फर्म द्वारा वर्तमान अवधि में कोई खरीद नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
यदि यह जानकारी सही है तो सवाल बेहद गंभीर है—
जब विक्रेता फर्म ने संबंधित सामग्री खरीदी ही नहीं, तो पंचायत के निर्माण कार्य के लिए सामग्री कहां से आई?
क्या वास्तव में उसी फर्म ने सामग्री सप्लाई की थी?
क्या स्टील की खरीद हुई थी?
क्या निर्माण में इस्तेमाल हुई अन्य सामग्री के बिल मौजूद हैं?
और यदि सामग्री खरीदी गई थी तो उसके खरीद बिल, स्टॉक और सप्लाई का रिकॉर्ड कहां है?
अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भुगतान स्वीकृत करने से पहले संबंधित अधिकारियों ने यह सत्यापित किया या नहीं कि जमीन पर वास्तविक रूप से क्या काम हुआ और उसके अनुरूप कौन-कौन से बिल लगाए गए?
पंचायत दर्पण के अनुसार कार्य की लागत ₹4.40 लाख है और पूरी राशि का भुगतान भी हो चुका है। ऐसे में निर्माण कार्य की माप पुस्तिका, सामग्री की खरीद, सप्लाई, GST रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस तरह के बिल पहले भी अन्य निर्माण कार्यों में लगाए गए हैं। यदि ऐसा है तो केवल इस एक कार्य की नहीं, बल्कि पूर्व में लगाए गए समान बिलों और संबंधित फर्म के भुगतानों की भी जांच की जानी चाहिए।
अब शिकायत GST विभाग तक पहुंच चुकी है। ऐसे में देखना होगा कि जांच में बिलों की GST गणना, फर्म की वास्तविक खरीद-बिक्री, सामग्री की सप्लाई और पंचायत के निर्माण कार्य का रिकॉर्ड क्या सामने आता है।
सवाल अब सिर्फ ₹4.40 लाख के भुगतान का नहीं है, बल्कि यह है कि सरकारी राशि के भुगतान से पहले जिम्मेदार अधिकारियों ने दस्तावेजों और जमीन पर हुए काम का सत्यापन किस आधार पर किया?
और सबसे बड़ा सवाल—
क्या मामले की निष्पक्ष जांच कर सरपंच, सचिव, संबंधित इंजीनियर और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, या फिर मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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