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Mukesh Gautam

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*अरविन्द दांगी ज़ी को पन्ना डीएसपी बनने की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं*
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7.30 करोड़ की सड़क राशि… फिर सड़क कहां है?

छतरपुर। करीब छह महीने पहले, 1 मार्च को छतरपुर विधायक ललिता यादव ने अपने फेसबुक अकाउंट के जरिए बताया था कि ट्रांसपोर्ट नगर से चंद्रपुरा तक सड़क निर्माण के लिए लोक निर्माण विभाग मंत्री राकेश सिंह ने 7.30 करोड़ रुपए की राशि स्वीकृत की है।

लेकिन छह महीने बाद भी सड़क निर्माण का काम धरातल पर नजर नहीं आ रहा।
अब सवाल सीधा है—

क्या 7.30 करोड़ रुपए वास्तव में स्वीकृत हुए थे?
अगर हुए थे तो राशि जारी क्यों नहीं हुई?
और अगर राशि जारी हो चुकी है तो निर्माण कार्य शुरू क्यों नहीं हुआ?

क्या यह सिर्फ राजनीतिक घोषणा थी या वास्तव में सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी?
जनता को घोषणा नहीं, काम चाहिए और काम की पूरी जानकारी चाहिए।

विधायक, लोक निर्माण विभाग और प्रशासन—आखिर इस 7.30 करोड़ की सड़क परियोजना की वास्तविक स्थिति क्या है?
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Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh PRO Jansampark Chattarpur Collector Office Chattarpur BJP Madhya Pradesh Lalita Yadav Dilip Ahirwar Lalita Yadav बीजेपीयुवामोर्चा जिलामंत्री चंदलाविधानसभा Dr. Virendra Kumar Rupesh Rai Collector Office Panna Journalist Arvind Jain Bundeli Bauchhar Bundelkhand Wala
🔥 छतरपुर में सियासी संग्राम, कांग्रेस का पलटवार!

विधायक ललिता यादव के तीखे बयानों के बाद अब कांग्रेस भी फ्रंट फुट पर आ गई है। छतरपुर में बदहाल सड़कों और विकास कार्यों को लेकर कांग्रेसियों ने सड़क पर उतरकर जमकर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के दौरान गूंजे नारे—

“भ्रष्टाचारी कहां मिलेंगे...?
बीजेपी के दफ्तर में मिलेंगे...!”

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोपों के जरिए सत्ता पक्ष को घेरते हुए सवाल उठाया कि जब विकास के दावे किए जा रहे हैं, तो फिर छतरपुर की सड़कें बदहाल क्यों हैं?

अब छतरपुर की राजनीति में बयानों की गर्मी सड़क से विधानसभा तक पहुंचती दिखाई दे रही है।

सवाल बड़ा है—आखिर जनता को बयान चाहिए या बदहाल सड़कों से राहत?

वहीं दूसरी ओर 6 माह पूर्व सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत बजट जो की साढ़े सात करोड़ की राशि का है उस पर चर्चाएं जोर-शोर पड़ती दिखाई दे रही है।

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Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh PRO Jansampark Chattarpur Collector Office Chattarpur BJP Madhya Pradesh Lalita Yadav Dilip Ahirwar Rupesh Rai Dr. Virendra Kumar Bundelkhand Wala Arvind Ndtv विनय निगम पत्रकार Puspendra Pratap Singh बीजेपीयुवामोर्चा जिलामंत्री चंदलाविधानसभा Archnaguddu Singh
₹4.40 लाख के रेलिंग निर्माण में बिलों पर उठे गंभीर सवाल, 18% GST के नाम पर गणना में बड़ी गड़बड़ी!

छतरपुर। ग्राम पंचायत अचट्टा में पंचायत भवन परिसर में रेलिंग निर्माण के नाम पर ₹4.40 लाख की राशि का भुगतान किया गया। पंचायत दर्पण के रिकॉर्ड के अनुसार इस कार्य की लागत ₹4.40 लाख है और भुगतान तीन बिलों के माध्यम से S.K. Mohini Steel को किया गया—₹1.76 लाख, ₹1.32 लाख और ₹1.32 लाख। तीनों भुगतानों की स्थिति पोर्टल पर Payment Done दर्ज है।

लेकिन अब इस पूरे भुगतान को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पंचायत दर्पण में कार्य का विवरण “Railing Nirman Kary Panchayat Bhawan Prangan” दर्ज है। मौके पर दिखाई दे रहे निर्माण में केवल स्टील ही नहीं, बल्कि सीमेंट, ईंट, गिट्टी, बालू, पानी और मजदूरी जैसी सामग्री एवं श्रम का उपयोग होना स्वाभाविक है। इसके बावजूद उपलब्ध दस्तावेजों में भुगतान के लिए लगाए गए बिलों में मुख्य रूप से “स्टील वर्क” ही दर्शाया गया है।

सबसे बड़ा सवाल GST की गणना को लेकर है।
तीनों बिलों में CGST 9% और SGST 9% यानी कुल 18% GST का उल्लेख किया गया है, लेकिन बिल में लिखी टैक्स राशि और मूल राशि का गणित आपस में मेल नहीं खाता। उदाहरण के तौर पर ₹1,25,714.28 की राशि पर 9% CGST लगभग ₹11,314 बनता है, जबकि बिल में CGST के रूप में केवल ₹3,142.86 दर्ज है। इसी तरह SGST में भी यही राशि दिखाई गई है।

यानी बिल में 18% GST दर्शाने के बावजूद उसकी गणना अलग तरीके से की गई है। तीनों बिलों के आंकड़ों की जांच की जाए तो टैक्स गणना में प्रथम दृष्टया गंभीर विसंगति नजर आती है।

एक और बड़ा सवाल—सामान आया कहां से?
बताया गया है कि इस मामले में GST विभाग से भी जानकारी मांगी गई है और विभागीय जानकारी के अनुसार संबंधित फर्म द्वारा वर्तमान अवधि में कोई खरीद नहीं किए जाने की बात सामने आई है।

यदि यह जानकारी सही है तो सवाल बेहद गंभीर है—
जब विक्रेता फर्म ने संबंधित सामग्री खरीदी ही नहीं, तो पंचायत के निर्माण कार्य के लिए सामग्री कहां से आई?
क्या वास्तव में उसी फर्म ने सामग्री सप्लाई की थी?
क्या स्टील की खरीद हुई थी?

क्या निर्माण में इस्तेमाल हुई अन्य सामग्री के बिल मौजूद हैं?
और यदि सामग्री खरीदी गई थी तो उसके खरीद बिल, स्टॉक और सप्लाई का रिकॉर्ड कहां है?

अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भुगतान स्वीकृत करने से पहले संबंधित अधिकारियों ने यह सत्यापित किया या नहीं कि जमीन पर वास्तविक रूप से क्या काम हुआ और उसके अनुरूप कौन-कौन से बिल लगाए गए?

पंचायत दर्पण के अनुसार कार्य की लागत ₹4.40 लाख है और पूरी राशि का भुगतान भी हो चुका है। ऐसे में निर्माण कार्य की माप पुस्तिका, सामग्री की खरीद, सप्लाई, GST रिकॉर्ड और भुगतान प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच बेहद जरूरी हो जाती है।

स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या इस तरह के बिल पहले भी अन्य निर्माण कार्यों में लगाए गए हैं। यदि ऐसा है तो केवल इस एक कार्य की नहीं, बल्कि पूर्व में लगाए गए समान बिलों और संबंधित फर्म के भुगतानों की भी जांच की जानी चाहिए।

अब शिकायत GST विभाग तक पहुंच चुकी है। ऐसे में देखना होगा कि जांच में बिलों की GST गणना, फर्म की वास्तविक खरीद-बिक्री, सामग्री की सप्लाई और पंचायत के निर्माण कार्य का रिकॉर्ड क्या सामने आता है।

सवाल अब सिर्फ ₹4.40 लाख के भुगतान का नहीं है, बल्कि यह है कि सरकारी राशि के भुगतान से पहले जिम्मेदार अधिकारियों ने दस्तावेजों और जमीन पर हुए काम का सत्यापन किस आधार पर किया?
और सबसे बड़ा सवाल—

क्या मामले की निष्पक्ष जांच कर सरपंच, सचिव, संबंधित इंजीनियर और भुगतान प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी, या फिर मामला जांच के नाम पर ठंडे बस्ते में चला जाएगा?
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Collector Office Chattarpur Jansampark Madhya Pradesh PRO Jansampark Chattarpur Lalita Yadav Lalita Yadav Rupesh Rai
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यातायात थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक शशि शंकर द्विवेदी का निधन

छतरपुर यातायात थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक शशि शंकर द्विवेदी का भोपाल स्थित एम्स में इलाज के दौरान दुखद निधन हो गया। उनके निधन की खबर से पुलिस परिवार में शोक की लहर दौड़ गई।

श्री द्विवेदी नेक दिल, मिलनसार और सहज स्वभाव के व्यक्ति के रूप में जाने जाते थे। उनके निधन से पुलिस विभाग ने एक कर्मठ और मिलनसार साथी को खो दिया।

इस दुखद घड़ी में हमारी संवेदनाएं शोकाकुल परिजनों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और परिजनों को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।

ॐ शांति 🙏🌷
<nis:link nis:type=tag nis:id=कलेक्टर nis:value=कलेक्टर nis:enabled=true nis:link/> छतरपुर ने गिराया 8 वाँ विकिट कूट रचित दस्तावेज तैयार करने के मामले में ग्राम पंचायत सरसेड के सचिव रामगोपाल शर्मा निलंबित, CEO ॐ नमः शिवाय अरजरिया ने जारी किया आदेश।जनता के बीच जनता के साहेब🙏
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With Ashish upadhyay :- Artist – I just earned their team ashish badge! 🎉
छतरपुर। स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी हकीकत परखने के लिए छतरपुर कलेक्टर मृणाल मीणा अचानक जिला अस्पताल पहुंचीं। कलेक्टर के पहुंचते ही अस्पताल में अफरातफरी का माहौल बन गया।

औचक निरीक्षण के दौरान ओपीडी का समय होने के बावजूद कई डॉक्टरों के केबिन खाली मिले, जबकि मरीज डॉक्टरों के इंतजार में कतारों में खड़े नजर आए। 

अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर भी कलेक्टर ने मौके पर जानकारी ली।

अचानक हुए इस निरीक्षण ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। अब देखना होगा कि निरीक्षण के बाद लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है और जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं में कितना सुधार आता है।
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*लो ये हो गया गायत्री मंदिर तालाब का विकास टेंडर पास हुआ रेलिंग का बना दी रोड*

अधर में बजट हुआ समाप्त काम होगा बंद?
विकास चरम पर या ठेकेदारों का दबदबा? टूटे तोरण द्वार ने उठाए कई सवाल

छतरपुर। जिले में भाजपा कार्यकाल में विकास कार्यों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत जनता को ही तय करनी होगी।

बताया जा रहा है कि कांग्रेस कार्यकाल में निर्मित खोप गांव का तोरण द्वार फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान मुरम उत्खनन और परिवहन में लगे डंपर की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया। आरोप है कि डंपर चालक ने लापरवाही बरतते हुए वाहन की लिफ्ट नीचे नहीं की और डंपर सीधे तोरण द्वार से जा टकराया।

हादसे में लाखों रुपये की लागत से बने निर्माण को नुकसान पहुंचा। सवाल यह है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के बाद जिम्मेदारी किसकी तय हुई?

यदि निर्माण एजेंसी या ठेकेदार के वाहन की लापरवाही से शासकीय संपत्ति को नुकसान हुआ है, तो क्या नुकसान की भरपाई ठेकेदार से कराई गई? क्या संबंधित डंपर पर कोई कार्रवाई हुई? और यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो आखिर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि विकास कार्यों के नाम पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर नियम-कायदे लागू होते हैं या फिर ठेकेदारों के प्रभाव के आगे प्रशासनिक कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है?

अब इन सवालों का जवाब नेताओं और अधिकारी-कर्मचारियों को नहीं, बल्कि जिम्मेदार प्रशासन को जनता के सामने देना होगा।

Jansampark Madhya Pradesh CM Madhya Pradesh PRO Jansampark Chattarpur Collector Office Chattarpur Lalita Yadav Lalita Yadav Dilip Ahirwar Dr. Virendra Kumar Raju Yadav II Rupesh Rai SP Chhatarpur Arvind Ndtv
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छतरपुर एसपी ने 11 निरीक्षकों के किए तबादले
छतरपुर। जिले में पुलिस व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने प्रशासनिक स्तर पर बड़ा फेरबदल किया है। एसपी ने जिले के 11 निरीक्षकों के तबादले करते हुए उन्हें नई जिम्मेदारियां सौंपी हैं।

तबादला आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस विभाग में हुए इस फेरबदल को कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इससे पहले भी अगस्त माह में छतरपुर पुलिस विभाग में बड़े स्तर पर तबादले किए गए थे।
जिला जेल छतरपुर में श्रद्धा और उल्लास से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव

छतरपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जिला जेल छतरपुर में श्रद्धा और उल्लास के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य जेल में निरुद्ध बंदियों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, संघर्ष और आदर्शों से प्रेरणा लेकर सकारात्मक जीवन जीने का संदेश देना रहा।
कार्यक्रम में ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनों द्वारा राधा-कृष्ण के मनमोहक नृत्य एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं, जिसने बंदियों और जेल स्टाफ का मन मोह लिया। प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रेम, करुणा, धर्म, संयम और सदाचार का संदेश दिया गया।

ब्रह्माकुमारी संस्था की बहनों ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और संघर्षों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य, धर्म, धैर्य और कर्तव्य के मार्ग पर चलते रहना ही श्रीकृष्ण के जीवन की सबसे बड़ी सीख है। बंदियों को आपसी प्रेम, भाईचारा और सद्भाव अपनाने के साथ नकारात्मक विचारों से दूर रहकर आध्यात्मिक एवं सकारात्मक जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया।

वहीं, इस्कॉन छतरपुर द्वारा बंदियों को श्रीमद्भगवद्गीता का वितरण किया गया। इससे पहले सुबह भी इस्कॉन की ओर से कार्यक्रम आयोजित कर बंदियों को भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, योग और गीता के संदेश से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में प्रभारी जेल अधीक्षक योगेन्द्र पवार, सहायक जेल अधीक्षक मनीष त्यागी, जेल प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी और जिला जेल में निरुद्ध बंदी मौजूद रहे।

कार्यक्रम के अंत में सभी ने भगवान श्रीकृष्ण के आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा प्रेम, सद्भाव, संयम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया। पूरा कार्यक्रम आध्यात्मिक और सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
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🚨 बस में टिकट कटाते ही उड़ गया ढाई लाख का थैला!

छतरपुर। श्यामा प्रसाद मुखर्जी अंतरराज्यीय बस स्टैंड पर एक 60 वर्षीय वृद्ध के थैले से ढाई लाख रुपए नकद चोरी होने का मामला सामने आया है। पन्ना जिले के देवेंद्रनगर निवासी पवन कुमार जैन तांबे का कारोबार करते हैं।

पवन जैन छतरपुर में तांबे का सामान बेचने के बाद मिले ₹2.50 लाख के नकद भुगतान को लेकर देवेंद्रनगर लौट रहे थे। बस में टिकट कटाने के दौरान किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनका थैला पार कर दिया।

चोरी हुए थैले में ढाई लाख रुपए के अलावा अस्थमा की दवा, टिफिन, पानी की बोतल और मोबाइल चार्जर भी रखा हुआ था।

घटना के बाद पीड़ित ने पुलिस से शिकायत कर आरोपी की तलाश और कार्रवाई की मांग की है। बस स्टैंड जैसे भीड़भाड़ वाले स्थान पर हुई इस वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
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देखिए भारत की व्यवस्था का एक बड़ा सवाल…

भारत में अगर आप एक सिम कार्ड खरीदते हैं तो पहचान के लिए आधार या अन्य दस्तावेज मांगे जाते हैं। बैंक में खाता खोलना हो तो कई स्तर की KYC और वेरिफिकेशन प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। अस्पताल में इलाज कराने जाएं तो मरीज की पहचान दर्ज होती है और उसकी मेडिकल रिपोर्ट भी रिकॉर्ड के साथ तैयार की जाती है।

यानी देश की व्यवस्था में लगभग हर जगह यह सुनिश्चित करने की कोशिश की जाती है कि व्यक्ति कौन है और उसके द्वारा दी गई जानकारी कितनी विश्वसनीय है।
लेकिन सवाल तब उठता है, जब मामला न्यायालय में गवाही का हो।

क्या न्यायालय में किसी गवाह की पहचान और उसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त प्रक्रिया नहीं होनी चाहिए? क्या सिर्फ किसी व्यक्ति के अदालत में आकर बयान देने से उसकी पहचान और उसके कथन को पर्याप्त आधार मान लिया जाना चाहिए?

अगर कोई व्यक्ति गलत पहचान बताकर या झूठी जानकारी देकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश करे, तो उसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

यह सवाल किसी न्यायालय या न्याय व्यवस्था पर आरोप लगाने का नहीं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, विश्वसनीय और मजबूत बनाने का सवाल है।
क्योंकि अगर सिम खरीदने से लेकर बैंक खाता खोलने तक पहचान का सत्यापन जरूरी है, तो न्याय के मंदिर में गवाही देने वाले व्यक्ति की पहचान और उसकी विश्वसनीयता को लेकर भी स्पष्ट और मजबूत व्यवस्था क्यों नहीं होनी चाहिए?

आखिर सवाल सिर्फ एक गवाह का नहीं है…
सवाल यह है कि कहीं किसी गलत व्यक्ति की गवाही के आधार पर किसी निर्दोष के साथ अन्याय तो नहीं हो सकता?
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Video 17
आईसना पत्रकार संगठन ने एसपी रजत सकलेचा से की मुलाकात, श्रीफल भेंट कर किया स्वागत

छतरपुर। जिले के नवागत पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा से आईसना पत्रकार संगठन के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान संगठन के सदस्यों ने एसपी रजत सकलेचा से परिचयात्मक वार्ता करते हुए जिले की पत्रकारिता और पुलिस प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय को लेकर चर्चा की।

मुलाकात के दौरान आईसना पत्रकार संगठन की ओर से पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा का श्रीफल भेंट कर आत्मीय स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। संगठन के पदाधिकारियों ने एसपी को छतरपुर में नई जिम्मेदारी संभालने पर शुभकामनाएं देते हुए निष्पक्ष एवं बेहतर पुलिसिंग के लिए अपनी अपेक्षाएं भी व्यक्त कीं।

वहीं, पुलिस अधीक्षक रजत सकलेचा ने भी पत्रकारों से संवाद करते हुए जिले में कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाए रखने और आमजन की समस्याओं के निराकरण को प्राथमिकता देने की बात कही।

इस मुलाकात को पत्रकारिता और पुलिस प्रशासन के बीच संवाद, सहयोग और बेहतर समन्वय की दिशा में एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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अवकाश का आदेश 8 बजे के बाद, तब तक स्कूल पहुंच चुके थे बच्चे!

छतरपुर में अतिवृष्टि और मौसम अलर्ट के बीच कलेक्टर ने 3 सितंबर को विद्यार्थियों के अवकाश का आदेश जारी किया, लेकिन सवाल यह है कि आदेश जारी होने का समय क्या पर्याप्त था?

जिले के अधिकांश स्कूल सुबह 8 बजे से पहले ही शुरू हो जाते हैं। कई बच्चे स्कूल बस, वैन और अन्य वाहनों से निर्धारित समय पर घर से निकलते हैं। ऐसे में जब अवकाश का आदेश 8 बजे के बाद जारी हुआ, तब तक कई बच्चे स्कूल पहुंच चुके होंगे या रास्ते में होंगे।

सबसे बड़ा सवाल—अगर मौसम इतना गंभीर था कि बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए अवकाश जरूरी था, तो आदेश स्कूल शुरू होने से पहले क्यों नहीं जारी किया गया?
स्कूल वाहन चालक बच्चों को लेने निर्धारित समय पर निकलते हैं। उन्हें अचानक जारी हुए आदेश की जानकारी कब और कैसे मिलेगी? क्या हर अभिभावक तक समय रहते सूचना पहुंच पाना संभव है?

बारिश और जलभराव के बीच बच्चों को सुरक्षित रखना प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। इसलिए भविष्य में ऐसे मौसम अलर्ट के दौरान स्कूलों के समय से पहले ही स्पष्ट और समयबद्ध आदेश जारी करने की व्यवस्था जरूरी है।
छतरपुर में आज भी भारी बारिश की चेतावनी के बीच यह सवाल व्यवस्था पर जरूर उठता है—
*आदेश आया, लेकिन क्या सही समय पर आया?*
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पटवारी फील्ड पर रहें, उनकी उपस्थिति की मॉनिटरिंग करें एसडीएम : कलेक्टर

कलेक्टर का सख्त रुख : अनहाइजेनिक स्थिति वाले रेस्टोरेंट को सील करने की कार्रवाई के निर्देश

अवैध गैस रिफिलिंग की शिकायतों के मामले में डीएसओ श्री ऋषि शर्मा पर जताई नाराजगी

मुआवजा एवं राहत राशि के वितरण में अनियमितता करने वाले पटवारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश

कलेक्टर ने किसानों के केसीसी बनाने के दिए निर्देश

03 सितंबर को नौगांव में जन विश्वास अभियान के तहत शिविर होगा आयोजित
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   बुधवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में कलेक्टर श्री मृणाल मीना की अध्यक्षता में टीएल बैठक संपन्न हुई। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री नमः शिवाय अरजरिया, एडीएम श्री विनय द्विवेदी, एसडीएम सहित विभिन्न अधिकारी उपस्थित रहे।
   कलेक्टर श्री मीना ने आगामी 03 सितंबर को नौगांव में होने वाले जन विश्वास शिविर के पूर्व शिविर कर तैयारियां सुनिश्चित करने के लिए एसडीएम को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि मोबाइल कोर्ट एवं शिविर लगाकर लोगों की समस्याओं का मौके पर निराकरण किया जाएगा, जिसकी तैयारी सुनिश्चित करें। दिव्यांगों के लिए स्क्रीनिंग शिविर में उनके यूडीआईडी कार्ड जनरेट करना, पेंशन दिलाना एवं दिव्यांगता प्रमाण-पत्र जारी करना सुनिश्चित करें। साथ ही संबल से वृद्धजनों का डाटा लेकर समग्र सुरक्षा विस्तार अधिकारी को लगाकर पेंशन योजना का लाभ दिलाएं।
   कलेक्टर ने जीएम सीसीबी को किसानों के केसीसी बनाए जाने के निर्देश दिए। साथ ही मत्स्य विभाग को केज कल्चर की स्थापना हेतु निर्देशित किया। उन्होंने पशुपालन विभाग के खराब कार्यों को लेकर नाराजगी जताई और निर्देश दिए कि सेक्स सॉर्टेड सीमन, पशुपालकों के केसीसी एवं पशुओं के टीकाकरण में प्रगति बढ़ाएं तथा खराब कार्य करने वाले ब्लॉक स्तर के पशु चिकित्सा अधिकारियों पर कार्रवाई करें। कलेक्टर ने डीडी वेटनरी को गौशालाओं के औचक निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए।

आदेशों का अमल कराना सुनिश्चित करें एसडीएम, अन्यथा रुकेगी वेतनवृद्धि

उर्वरक वितरण की पोर्टल पर एंट्री नहीं करने एवं उर्वरक वितरण में अनियमितता होने पर डीडी एग्रीकल्चर को नोटिस

   हाइब्रिड मोड में किए गए उर्वरक वितरण की पोर्टल पर एंट्री नहीं करने एवं पिछले वर्ष की तुलना में अधिक उर्वरक वितरण में अनियमितता होने पर उपसंचालक कृषि को शो-कॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
कलेक्टर ने नौगांव में राजस्व की अधिक शिकायतें होने पर एसडीएम को गंभीरता से मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी एसडीएम को स्पष्ट हिदायत दी कि आदेशों का अमल कराना सुनिश्चित करें, अन्यथा वेतनवृद्धि रोकी जाएगी। उन्होंने बिना अमल के आदेशों एवं कब्जा संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिए विशेष अभियान चलाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने सख्ती दिखाते हुए मुआवजा एवं राहत राशि के वितरण में अनियमितता करने वाले पटवारियों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
  कलेक्टर ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी को सीएमएचओ के साथ अनहाइजेनिक स्थिति वाले रेस्टोरेंट पर नोटिस के पश्चात सील करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही श्रम योगी मानधन योजना में कार्य नहीं करने वाले एवं खराब प्रगति होने पर जनपद सीईओ को नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए।

नवीन बसाहट करौंदिया में बिजली के खंभे का कार्य जल्द पूर्ण कराने के निर्देश

  केन-बेतवा विस्थापितों की नवीन बसाहट करौंदिया में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के अधिकारियों को निर्देश दिए। साथ ही एमपीईबी को बिजली के खंभे लगाने का कार्य जल्द पूर्ण कर बिजली व्यवस्था सुनिश्चित करने एवं नियमित अस्थाई आंगनवाड़ी संचालन के निर्देश दिए।

अवैध गैस रिफिलिंग की शिकायतों के मामले में डीएसओ पर जताई नाराजगी, एडीएम को जांच के निर्देश

कलेक्टर ने सीएमओ को सड़कों को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई के दिए निर्देश

  छतरपुर सीएमओ को सड़कों पर किए गए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही ठेला विक्रेताओं की निगरानी कर यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि दुकानदारों द्वारा पैसे लेकर बिक्री के लिए ठेले खड़े न कराए जाएं। ऐसे मामलों में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। साथ ही चंद्रनगर में उज्ज्वला योजना के सिलेंडरों की अवैध गैस रिफिलिंग की शिकायतों के मामले में डीएसओ श्री ऋषि शर्मा पर नाराजगी जताई और एडीएम को इसकी जांच करने के निर्देश दिए।

17 सितंबर से शुरू हो रहा सेवा संकल्प अभियान

कलेक्टर ने अभियान में विभागों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के दिए निर्देश

17 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा सेवा संकल्प अभियान 17 अक्टूबर 2026 तक एक माह तक संचालित किया जाएगा। संपूर्ण माह चलने वाले अभियान में संबंधित विभागों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के कलेक्टर ने विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं।

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बिजावर के सरकारी अस्पताल में मरीज इलाज के लिए भटक रहे हैं, लेकिन जिम्मेदारों को शायद इसकी कोई चिंता नहीं! सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वीडियो में मरीज स्टाफ का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। काफी देर बाद एक कर्मचारी पहुंचता है और जब उससे पूछा जाता है कि स्टाफ कहां था, तो कथित तौर पर जवाब मिलता है—“पाकिस्तान गया था।” इसके बाद कुछ अन्य कर्मचारी मोबाइल चलाते हुए बाहर आते दिखाई देते हैं।

यानी अस्पताल में मरीज इलाज के इंतजार में और कर्मचारी अपनी दुनिया में व्यस्त! सवाल यह है कि सरकारी अस्पताल मरीजों की सेवा के लिए हैं या कर्मचारियों की मनमानी के लिए?

इसी मामले में महिला ने बीएमओ पर अभद्रता, गाली-गलौज, जातिसूचक टिप्पणी और जेल भेजने की धमकी देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला ने सीसीटीवी और वायरल वीडियो की जांच की मांग की है।

अब सवाल स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों से है—अगर वायरल वीडियो में दिख रही तस्वीरें सही हैं, तो अस्पताल की इस बदहाल व्यवस्था और कथित अभद्र व्यवहार की जिम्मेदारी आखिर किसकी है?

जांच सिर्फ कागजों पर होगी या मरीजों को परेशान करने वालों पर वास्तव में कार्रवाई भी होगी?
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केन-बेतवा सहित अन्य परियोजनाओं में मुआवजा वितरण की विसंगतियों को लेकर किसान नेता अमित भटनागर ने कलेक्टर को सौंपा आवेदन

ग्रामीणों और किसानों के साथ जनसुनवाई में पहुंचे किसान नेता अमित भटनागर

केन-बेतवा एवं अन्य परियोजनाओं में मुआवजा और पैकेज वितरण में कथित विसंगतियों को लेकर किसान नेता अमित भटनागर ग्रामीणों और किसानों के साथ जनसुनवाई में पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर प्रभावित किसानों और ग्रामीणों की समस्याओं से अवगत कराया।

अमित भटनागर ने बताया कि परियोजनाओं के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में कई स्तरों पर विसंगतियां सामने आई हैं। उनका आरोप है कि कई पात्र लोगों के नाम पहले सर्वे या सूची में शामिल नहीं किए गए, जबकि बाद में उनकी भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में कई स्तरों पर दोबारा सर्वे कराया जा रहा है, लेकिन सर्वे के दौरान वहां लंबे समय से रह रहे कई ग्रामीणों के मकान दर्ज नहीं हो पा रहे हैं। इसके कारण संबंधित परिवारों को मुआवजा एवं पुनर्वास पैकेज का लाभ मिलने में परेशानी हो रही है।

किसान नेता ने कलेक्टर से मांग की कि प्रभावित गांवों में निष्पक्ष एवं पारदर्शी तरीके से दोबारा सर्वे कराया जाए, पात्र ग्रामीणों के मकानों और संपत्तियों को रिकॉर्ड में शामिल किया जाए तथा जिन लोगों की भूमि अधिग्रहित की गई है, उन्हें नियमानुसार मुआवजा एवं पुनर्वास पैकेज का लाभ दिलाया जाए।

उन्होंने प्रशासन से मामले की गंभीरता से जांच कर पात्र किसानों और ग्रामीणों के हित में उचित कार्रवाई करने की मांग की।
BJP Madhya Pradesh  CM Madhya Pradesh  Collector Office Chattarpur  PRO Jansampark Chattarpur  Jansampark Madhya Pradesh  PMO India  बीजेपीयुवामोर्चा जिलामंत्री चंदलाविधानसभा  Dr. Virendra Kumar Amit Bhatnagar PHN Mukesh Gautam Pihu Raja Bundela
🚨 छतरपुर जिला अस्पताल की व्यवस्था पर बड़ा सवाल!
सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर ही गंदगी और दीवारों पर गुटखे की पीक, जिम्मेदारों की नजर क्यों नहीं?

छतरपुर। जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पताल परिसर में स्थित सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर ही जगह-जगह गंदगी नजर आ रही है और दीवारों पर गुटखे की पीक के निशान दिखाई दे रहे हैं।
हैरानी की बात यह है कि यह कोई ऐसा स्थान नहीं है जहां 

बड़ी संख्या में मरीजों की आवाजाही होती हो। यहां मुख्य रूप से अस्पताल का स्टाफ और अधिकारी ही आते-जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर जिम्मेदार अधिकारियों के 

कार्यालय के आसपास ही स्वच्छता व्यवस्था का यह हाल है, तो अस्पताल के बाकी हिस्सों की स्थिति कैसी होगी?
कुछ दिन पहले ही जिला अस्पताल के निरीक्षण के दौरान गंदगी को लेकर कलेक्टर मृणाल मीणा ने नाराजगी जताई थी और नियमित साफ-सफाई के निर्देश दिए थे।

इसके बावजूद यदि सिविल सर्जन कार्यालय के बाहर ही गंदगी और गुटखे की पीक दिखाई दे रही है, तो यह स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

सवाल यह है—
👉 क्या अस्पताल में स्वच्छता के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों की नियमित मॉनिटरिंग होती है?
👉 क्या अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए गुटखा-तंबाकू को लेकर कोई नियम लागू हैं?
👉 क्या सफाई व्यवस्था केवल निरीक्षण के समय तक सीमित है?
अस्पताल मरीजों के इलाज का स्थान है, गंदगी और गुटखे की पीक का नहीं। जिम्मेदार अधिकारियों को इस ओर तत्काल ध्यान देना चाहिए।
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