VIP कल्चर खत्म करने की बात, फिर हूटर का भौकाल क्यों?
छतरपुर में नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया की गाड़ी पर हूटर को लेकर फिर सवाल, 2024 में भी कट चुका है चालान
छतरपुर। देश में VIP कल्चर खत्म करने की बात जब हुई थी, तब उम्मीद थी कि नेता जनता के बीच जाएंगे तो आम आदमी की तरह जाएंगे। गाड़ी से लाल-पीली बत्ती हटेगी, रुतबा कम होगा और जनता को यह एहसास होगा कि नेता भी उसी सड़क पर चलते हैं, जिस सड़क पर आम जनता चलती है।
लेकिन छतरपुर में सवाल फिर वही है—VIP कल्चर गया कहां? बस लाल बत्ती गई और उसकी जगह हूटर ने ले ली?
19 अप्रैल 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने सभी श्रेणी के वाहनों पर बीकन लाइट हटाने का फैसला किया था। सरकार ने साफ कहा था कि ऐसी बत्तियां VIP कल्चर का प्रतीक मानी जाती हैं और लोकतांत्रिक व्यवस्था में इनका कोई स्थान नहीं होना चाहिए। हालांकि आपातकालीन सेवाओं को नियमों के तहत छूट दी गई थी।
अब बात आती है हूटर और सायरन की।
मध्य प्रदेश में हूटर लगाना हर जनप्रतिनिधि का अधिकार नहीं है। मध्य प्रदेश विधानसभा में जुलाई 2026 में परिवहन मंत्री ने बताया कि केंद्रीय मोटरयान नियम 1989 के नियम 119 और मध्यप्रदेश मोटरयान नियम 1994 के नियम 185 के अनुसार केवल पात्र वाहनों पर हूटर लगाने की अनुमति है। अपात्र वाहनों पर कार्रवाई का प्रावधान भी है।
यानी सवाल सीधा है—
नगर पालिका अध्यक्ष का पद क्या अपने आप हूटर का परमिट बन जाता है?
अगर नहीं, तो फिर गाड़ी पर हूटर क्यों?
और अगर अनुमति है, तो किस नियम के तहत? किस अधिकारी ने अनुमति दी? और अनुमति की अवधि कितनी है?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि छतरपुर नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चौरसिया की सरकारी गाड़ी पर हूटर को लेकर जून 2024 में कार्रवाई की खबर सामने आ चुकी है। उस समय मजिस्ट्रेट चेकिंग के दौरान उनकी गाड़ी पर लगे हूटर का चालान काटे जाने की रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
अब जरा रोस्टिंग समझिए—
जनता: मैडम, सड़क पर जगह नहीं है।
VIP गाड़ी: हटो... हूटर बज रहा है!
जनता: मैडम, सड़क में गड्ढे हैं।
VIP गाड़ी: पहले हूटर की आवाज सुनो, गड्ढे बाद में देखना!
जनता: मैडम, हम भी इसी शहर के नागरिक हैं।
हूटर: लेकिन पहचान तो VIP की होनी चाहिए!
मुद्दा मजाक का नहीं, नियम और बराबरी का है।
जब प्रधानमंत्री स्तर से VIP कल्चर खत्म करने की बात कही गई, जब सरकारें लगातार अनधिकृत हूटर पर चालान की कार्रवाई कर रही हैं, तो फिर किसी जनप्रतिनिधि के वाहन पर हूटर दिखाई देता है तो स्वाभाविक रूप से सवाल उठेंगे।
और सबसे बड़ा सवाल प्रशासन से—
अगर हूटर वैध है तो उसकी अनुमति सार्वजनिक क्यों नहीं होती?
और अगर हूटर अवैध है तो कार्रवाई कब होगी?
क्योंकि लोकतंत्र में पद बड़ा हो सकता है, लेकिन कानून उससे बड़ा होता है।
जनता को सड़क पर यह महसूस नहीं होना चाहिए कि कोई गाड़ी हूटर बजाते हुए निकल रही है तो रास्ता इसलिए खाली करना है क्योंकि उसमें कोई नेता बैठा है।
VIP कल्चर खत्म करने की बात 2017 में हुई थी...
अब सवाल यह है कि छतरपुर में 2026 तक उसका असर कितना पहुंचा?
हूटर से भौकाल बनता है या सिर्फ नियमों पर सवाल खड़े होते हैं—यह फैसला अब प्रशासन और जनता को करना है।