भाइयों की कलाई सूनी न हो, हर वर्ग की महिलाएं बना रहीं राखियां, बैकुण्ठपुर की दीदियों के हुनर को मिल रहा बाजार, एक दिन में 5 हजार रुपए की राखी बिक्री से बढ़ा उत्साह।
रक्षाबंधन के पर्व को लेकर बैकुण्ठपुर विकासखंड की स्व-सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं राखियां तैयार कर रही हैं। उनका उद्देश्य केवल भाइयों की कलाई को सजाना ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करते हुए 'वोकल फॉर लोकल' को भी बढ़ावा देना है। समूह की महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही राखियों को बाजार में अच्छा प्रतिसाद मिल रहा है।
बैकुण्ठपुर ब्लॉक के दो स्व-सहायता समूहों की 8 महिलाएं मिलकर इस वर्ष लगभग 5 हजार राखियां तैयार कर रही हैं। समूह द्वारा लगाए गए राखी स्टॉल से 24 अगस्त को एक ही दिन में करीब 5 हजार रुपए की राखियों की बिक्री हुई। बिक्री को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह है और उन्हें उम्मीद है कि रक्षाबंधन तक राखियों की मांग और बढ़ेगी।
स्व-सहायता समूह की महिलाओं द्वारा तैयार राखियां स्थानीय बाजार में उपलब्ध होने से लोगों को स्थानीय उत्पाद खरीदने का विकल्प मिल रहा है। इससे महिलाओं की आत्मनिर्भरता, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा और 'वोकल फॉर लोकल' की भावना को मजबूती मिल रही है।
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