बस्ती के सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी कुलभूषण अग्रहरि ने किया देहदान का ऐतिहासिक संकल्प
बस्ती। कहते हैं कि मनुष्य का शरीर नश्वर है, लेकिन कर्म अमर होते हैं। इस कथन को चरितार्थ कर दिखाया है बस्ती के गांधी नगर, बमनगांव मोहल्ले में भारत प्रेस के पीछे बानपुर स्टेट वाली गली के निवासी सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी कुलभूषण अग्रहरि ने। उन्होंने निःस्वार्थ सेवा, त्याग और परोपकार की भावना से प्रेरित होकर एक ऐसा नेक और साहसिक निर्णय लिया है जो पूरे पूर्वांचल के लिए एक मिसाल बन गया है।
कुलभूषण ने श्री रामचरित मानस की चौपाई कर्म प्रधान विश्व करि राखा पर हित सरिस धर्म नहीं भाई " पर पीड़ा नहीं अस अधमाई से प्रेरित होकर चिकित्सा अनुसंधान एवं मानव सेवा के लिए आगामी 19 सितंबर 2026, दिन शनिवार को गौरीदत्त धर्मशाला बस्ती में भव्य समारोह के बीच अपना देहदान महर्षि वशिष्ठ स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, रामपुर बस्ती को करने का संकल्प लिया है।
इस ऐतिहासिक और पुनीत कार्य के लिए आज महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज में एक सहमति पत्र (Undertaking) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज कुमार डॉ अनिल कुमार यादव उप प्रधानाचार्य एनाटॉमी विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञान मिश्रा एवं जन उत्थान चैरिटेबल ट्रस्ट बस्ती के निदेशक अंशुल पटेल के बीच विधिवत सहमति बनी। फोटो में मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य कक्ष में सभी गणमान्य लोगों की उपस्थिति में इस महादान का संकल्प दोहराया गया।
यह है सहमति पत्र की मुख्य बातें जो इस दान को और भी महान बनाती हैं -
यह केवल देहदान नहीं बल्कि समाज में व्याप्त रूढ़िवाद, अंधविश्वास और संकोच को तोड़ने का एक आंदोलन होगा। सहमति के अनुसार श्री कुलभूषण अग्रहरि के सम्मान में जन-जागरण हेतु मेडिकल कॉलेज बस्ती और कैली अस्पताल में 2 फुट x 3 फुट का फोटो लगाया जाएगा जिस पर नाम, पता, देहदान की तिथि और मृत्यु की तिथि अंकित होगी। उनकी याद में मेडिकल कॉलेज और कैली अस्पताल परिसर में दो-दो छायादार वृक्ष जैसे नीम, पीपल, अर्जुन लगाकर उस पर भी नाम पट्टिका लगाई जाएगी।
मानवता का सम्मान करते हुए उनके मृत शरीर से उनके नाखून व बाल उनके इकलौते पुत्र श्री कुलदीप को पंचतत्व में विलीन करने के लिए दिए जाएंगे। सबसे भावुक और प्रेरणादायी क्षण वह होगा जब कुलभूषण अग्रहरि के पार्थिव शरीर को उनके निवास स्थान से मेडिकल कॉलेज तक फूल मालाओं से सजे खुले वाहन में बैंड बाजे के साथ पुष्प वर्षा करते हुए जुलूस के रूप में ससम्मान ले जाया जाएगा। जुलूस में देहदान प्रेरणा से संबंधित बैनर लगे होंगे और ऑटो लाउडस्पीकर से नारे गूंजेंगे - *देहदान मानवता का सम्मान, देहदान मेडिकल शिक्षा के लिए वरदान, देहदान मृत्यु के बाद भी सेवा दान, देहदान मृत्यु के बाद भी ज्ञान दान, देहदान मानवता व देश के नाम एक महान दान, मेडिकल कॉलेज बस्ती जिंदाबाद, जन उत्थान चैरिटेबल ट्रस्ट जिंदाबाद, देहदानकर्ता कुलभूषण अमर रहें।
क्यों है यह दान इतना महान -
आज पूरे देश में मेडिकल कॉलेजों में पढ़ने वाले एमबीबीएस छात्रों के लिए कैडेवर (मानव शव) की भारी कमी है। बिना कैडेवर के डॉक्टर मानव शरीर की संरचना नहीं समझ सकते और अधूरा ज्ञान लेकर समाज में जाते हैं। भारत सरकार ने इसी कमी को पूरा करने के लिए NOTTO, ROTTO और SOTTO जैसी संस्थाओं की स्थापना की है। कुलभूषण अग्रहरि का यह दान सीधे तौर पर भारत के मेधावी और प्रतिभाशाली छात्रों को नया अनुसंधान और अविष्कार करने में मदद करेगा जिससे भारत का नाम विश्व में रोशन होगा और देशभक्त डॉक्टर बनेंगे। मृत शरीर का उपयोग समाप्त हो जाने के बाद मेडिकल कॉलेज उसे उनके पुत्र को पंचतत्व में विलीन करने हेतु दे देगा अथवा विशेष परिस्थितियों में स्वयं विलीन कर देगा। इस पुण्य कार्य का समस्त खर्च उनके पुत्र कुलदीप व बहू श्रीमती मानसी वहन करेंगे, हालांकि यदि कोई परिजन या संस्था स्वेच्छा से भाग लेना चाहे तो उसे सम्मानपूर्वक स्वीकार किया जाएगा। बस्ती जैसे छोटे शहर से उठी यह चिंगारी निश्चित रूप से पूरे प्रदेश में देहदान के प्रति लोगों की सोच बदलेगी। कुलभूषण अग्रहरि ने यह सिद्ध कर दिया है कि मर कर भी जीया जा सकता है यदि इरादे नेक हों।
Basti, Basti | Sep 14, 2026