हिंदी दिवस पर हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल को दी विनम्र श्रद्धांजलि
गौचर (चमोली)। हिंदी दिवस के अवसर पर हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान की ओर से जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) गौचर में श्रद्धांजलि एवं साहित्यिक गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ पत्रकार एवं समाजसेवी भुवन नौटियाल ने दीप प्रज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में डीएलएड प्रशिक्षुओं ने सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। डीएलएड प्रशिक्षु लोकेश ने कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला, जबकि जयदीप ने उनके साहित्यिक जीवन और रचनात्मक योगदान की जानकारी दी। सुबोध ने हिंदी दिवस के महत्व पर विचार व्यक्त किए। वहीं अंसिका, मनीष बिष्ट और सक्षम ने हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल की कविताओं का पाठ कर उन्हें भावपूर्ण ढंग से याद किया।
मुख्य अतिथि भुवन नौटियाल ने डीएलएड प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए कहा कि महाकवि कालिदास की जन्मभूमि उत्तराखंड की धरती ने चंद्रकुंवर बर्त्वाल जैसे महान कवि को भी जन्म दिया। उन्होंने अल्पायु में हिंदी साहित्य को विपुल साहित्यिक धरोहर प्रदान की, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। उनकी कविताओं में पहाड़ का दर्द, प्रकृति के प्रति संवेदना और समाज की ज्वलंत समस्याओं की गहरी अभिव्यक्ति देखने को मिलती है। उन्होंने कहा कि बर्त्वाल की रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और नई पीढ़ी को उनके साहित्य से परिचित कराना आवश्यक है।
डीएलएड प्रशिक्षुओं ने कार्यक्रम को सराहनीय पहल बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को उत्तराखंड के साहित्य, संस्कृति और महान साहित्यकारों के योगदान को समझने का अवसर मिलता है। प्रशिक्षुओं ने मुख्य शिक्षा अधिकारी चमोली एवं डायट प्राचार्य आकाश सरस्वत, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन चमोली के अध्यक्ष गोविंद सिंह तोपाल, ब्लॉक कार्यकारिणी कर्णप्रयाग के अध्यक्ष सुरेंद्र भगत तथा महासचिव सुरक्षित भंडारी सहित कार्यक्रम के आयोजन में सहयोग करने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर हिमवंत कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल शोध संस्थान के प्रेस सचिव भानु प्रकाश नेगी ने दिवंगत वरिष्ठ पत्रकार, लेखक एवं इतिहासकार डॉ. योगंबर सिंह बर्त्वाल को भी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि डॉ. बर्त्वाल ने कवि चंद्रकुंवर बर्त्वाल के साहित्य को संकलित एवं संरक्षित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसे साहित्य जगत हमेशा स्मरण करता रहेगा।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार दिग्पाल सिंह गुसाईं, खुशहाल सिंह, ईश्वर सिंह राणा, गोविंद बिष्ट, संदीप कुमार, अनिल राणा सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन पत्रकार भानु प्रकाश नेगी ने किया।