*गुरुकुल शादीपुर मे उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार समारोह का भव्य समापन*
*गुरुकुल शादीपुर के विकास एवं उन्नति के लिए कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा द्वारा 11 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा*
*मैं आज भी आर्य समाज पर रामगोपाल शाल वाले की पुस्तक का स्वाध्याय करता हूं और निरंतर प्रेरणा प्राप्त करता हूं----घनश्याम दास अरोड़ा*
यमुनानगर( )
स्वामी आत्मानन्द जी महाराज की पावन तपोस्थली श्रीमद् दयानंद उपदेशक महाविद्यालय, गुरुकुल शादीपुर में उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार समारोह अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं वैदिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर लगभग 45 ब्रह्मचारियों का उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार वैदिक विधि-विधान के अनुसार सम्पन्न कराया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 8:00 बजे आचार्य डाॅ० यज्ञदेव याज्ञिक के ब्रह्मत्व में वैदिक यज्ञ के साथ हुआ। यज्ञ के पश्चात लगभग 45 ब्रह्मचारियों का उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार सम्पन्न कराया गया। संस्कार की वैदिक क्रियाएं एवं विधि गुरुकुल के प्राचार्य आचार्य सर्वमित्र आर्य ने सम्पन्न कराईं। इस पावन अवसर पर ब्रह्मचारियों ने वैदिक मंत्रों के साथ ज्ञान, संयम, सदाचार एवं ब्रह्मचर्य के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में हरियाणा सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा जी मुख्य अतिथि के रूप में पधारे, जबकि यमुनानगर के लोकप्रिय विधायक माननीय घनश्याम दास जी ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में सहभागिता की।
समारोह मे गुरुकुल के प्रधान मोहित आर्य, कोषाध्यक्ष डॉ. पुनीत बंसल, श्री प्रदीप आर्य एवं उप-प्रधान सोनिया पुरी ने कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा जी तथा विधायक घनश्याम दास अरोड़ा जी को केसरिया पटका पहनाकर सम्मानित किया गया तथा महर्षि दयानंद सरस्वती की द्विशताब्दी जयंती के उपलक्ष्य में भारत सरकार द्वारा जारी 200 रुपये व 150 रूपये का स्मारक सिक्का भेंट किया गया।
आचार्य सर्वमित्र आर्य ने यमुनानगर सदर थाना प्रबंधक कमलजीत सिंह को केसरिया पटका पहनाकर सम्मानित किया तथा ओ३म स्मृति-चिह्न भेंट किया।
इस अवसर पर गुरुकुल के प्रधान मोहित आर्य ने उपस्थित मुख्य अतिथि एवं अन्य गणमान्य अतिथियों के समक्ष गुरुकुल का विस्तृत परिचय प्रस्तुत किया। उन्होंने गुरुकुल की गौरवशाली परंपरा, वैदिक शिक्षा पद्धति, संस्कारात्मक एवं शैक्षणिक गतिविधियों तथा ब्रह्मचारियों के सर्वांगीण विकास के लिए संचालित विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि गुरुकुल में वैदिक शिक्षा एवं संस्कारों के साथ-साथ आधुनिक शिक्षा, योग, व्यायाम, खेलकूद एवं शारीरिक प्रशिक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होंने गुरुकुल के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रसंग भी साझा किया कि आल इंडिया डी.ए.वी. मैनेजिंग कमेटी के अध्यक्ष पूनम सूरी जी के नाना जी, महात्मा आनंद स्वामी जी ने इसी पावन गुरुकुल में महान तपोनिष्ठ संन्यासी महात्मा स्वामी आत्मानंद जी महाराज से संन्यास की दीक्षा ग्रहण की थी। यह प्रसंग गुरुकुल की महान आध्यात्मिक एवं वैदिक परंपरा तथा उसके गौरवशाली इतिहास का साक्षी है। अंत में श्री मोहित आर्य जी ने गुरुकुल पधारने पर मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथियों एवं सभी गणमान्य व्यक्तियों का समस्त गुरुकुल परिवार की ओर से हार्दिक स्वागत एवं अभिनंदन किया।
मुख्य अतिथि कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा जी ने अपने संबोधन में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया। उन्होंने कहा कि आज किसानों को प्रकृति के अनुकूल खेती की ओर आगे बढ़ना चाहिए तथा भूमि, जल और पर्यावरण की रक्षा करते हुए कृषि को अधिक उपयोगी एवं टिकाऊ बनाना चाहिए। उन्होंने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे शिक्षा, परिश्रम, अनुशासन एवं सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ें तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
कृषि मंत्री ने गुरुकुल की वैदिक शिक्षा, संस्कार एवं चरित्र निर्माण की परंपरा की सराहना करते हुए गुरुकुल के विकास एवं उन्नति के लिए 11 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। उनकी इस घोषणा पर उपस्थित जनसमूह एवं गुरुकुल परिवार ने हर्ष व्यक्त किया।
विधायक घनश्याम दास अरोड़ा जी ने अपने संबोधन में नवदीक्षित ब्रह्मचारियों को शुभाशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की मंगलकामना की तथा गुरुकुल में संचालित वैदिक शिक्षा एवं संस्कार व्यवस्था की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गुरुकुल केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि उत्तम चरित्र, अनुशासन एवं संस्कारों के निर्माण की पावन स्थली है।अपने युवावस्था के संस्मरण साझा करते हुए विधायक जी ने बताया कि वर्ष 1974 के आसपास वे इस गुरुकुल में आयोजित होने वाले सत्संगों में नियमित रूप से आया करते थे। उस समय उन्हें रामगोपाल शाल वाले जी के प्रेरणादायक प्रवचन सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता था। उन्होंने भावपूर्ण शब्दों में कहा कि, “मैं आज भी उनकी पुस्तक का स्वाध्याय करता हूं और निरंतर प्रेरणा प्राप्त करता हूं।”
इस अवसर पर विधायक जी ने समारोह में मंचासीन एवं उपस्थित रवि आर्य जी का भी विशेष उल्लेख करते हुए पुरानी स्मृतियों को साझा किया। उनके आत्मीय संस्मरणों ने उपस्थित जनसमूह को भावविभोर कर दिया।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण गुरुकुल के ब्रह्मचारियों द्वारा प्रस्तुत शारीरिक एवं सांस्कृतिक प्रदर्शन रहा। गुरुकुल के व्यवस्थापक हरीश आर्य के नेतृत्व में ब्रह्मचारियों ने डंबल पी.टी., लेजियम एवं मल्लखंभ का शानदार प्रदर्शन किया। ब्रह्मचारियों के अनुशासन, शारीरिक क्षमता, संतुलन एवं कौशल को देखकर मुख्य अतिथि, विधायक जी एवं उपस्थित सभी अतिथिगण अत्यंत प्रभावित हुए। सभी ने ब्रह्मचारियों के प्रदर्शन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ० रणवीर शास्त्री ने वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टिकोण से उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार की महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी जीवन में विद्या, संयम, अनुशासन एवं ब्रह्मचर्य का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उपनयन संस्कार व्यक्ति को ज्ञान के प्रकाश की ओर अग्रसर करता है और उसे अपने कर्तव्यों के प्रति सजग बनाता है। उन्होंने कहा कि चरित्रवान एवं संयमी युवा ही समाज और राष्ट्र का उज्ज्वल भविष्य तैयार कर सकते हैं।
वैदिक प्रवक्ता डॉ० सूर्यपाल शास्त्री ने उपनयन एवं वेदारम्भ संस्कार के आध्यात्मिक एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरुकुल केवल शिक्षा प्रदान करने वाला संस्थान नहीं है, बल्कि श्रेष्ठ चरित्र एवं संस्कार निर्माण की कार्यशाला है। उन्होंने अभिभावकों से अपने बच्चों को गुरुकुलीय शिक्षा से जोड़ने की अपील करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों को संस्कारवान, अनुशासित एवं चरित्रवान बनाना अत्यंत आवश्यक है।
कार्यक्रम में आर्य जगत के सुप्रसिद्ध भजनोपदेशक जयपाल आर्य ने अपने लोकप्रिय एवं प्रेरणादायक भजनों तथा प्रभावशाली उपदेश के माध्यम से उपस्थित जनसमूह का मार्गदर्शन किया। उन्होंने वैदिक धर्म, सदाचार, समाज सुधार एवं राष्ट्रप्रेम से ओत-प्रोत भजनों की प्रस्तुति दी। अपने उपदेश में उन्होंने पाखंड, अंधविश्वास एवं सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध पुरजोर आवाज उठाते हुए समाज को सत्य, तर्क एवं विवेक के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उनके भजनों एवं उपदेश ने पूरे वातावरण को वैदिक चेतना एवं प्रेरणा से ओत-प्रोत कर दिया।
कार्यक्रम का प्रभावशाली मंच संचालन करते हुए गुरुकुल के प्राचार्य आचार्य सर्वमित्र आर्य ने वर्तमान समय में समाज में फैल रहे पाखंड तथा तथाकथित धार्मिक व्यक्तियों के भ्रामक आचरण के प्रति जनता को जागरूक किया। उन्होंने धर्म के नाम पर किसी भी व्यक्ति का आंख मूंदकर अनुसरण न करने की अपील करते हुए कहा कि समाज को पाखंड, शोषण एवं अनैतिक गतिविधियों के प्रति सजग रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को वेद, सत्य, तर्क एवं विवेक की कसौटी पर विचारों और आचरण को परखना चाहिए। सच्चा धर्म मनुष्य को सत्यनिष्ठ, चरित्रवान, विवेकशील एवं समाजोपयोगी बनाता है।
कार्यक्रम के अंत में गुरुकुल परिवार की ओर से सभी अतिथियों, आर्यजनों एवं उपस्थित जनसमूह का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। शांतिपाठ के साथ समारोह का समापन हुआ। इसके पश्चात सभी अतिथियों एवं उपस्थित जनसमूह ने एक साथ ऋषि लंगर में प्रसाद ग्रहण किया।
Jagadhri, Yamuna Nagar | Aug 24, 2026