विकास चरम पर या ठेकेदारों का दबदबा? टूटे तोरण द्वार ने उठाए कई सवाल
छतरपुर। जिले में भाजपा कार्यकाल में विकास कार्यों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत जनता को ही तय करनी होगी।
बताया जा रहा है कि कांग्रेस कार्यकाल में निर्मित खोप गांव का तोरण द्वार फोरलेन निर्माण कार्य के दौरान मुरम उत्खनन और परिवहन में लगे डंपर की चपेट में आकर क्षतिग्रस्त हो गया। आरोप है कि डंपर चालक ने लापरवाही बरतते हुए वाहन की लिफ्ट नीचे नहीं की और डंपर सीधे तोरण द्वार से जा टकराया।
हादसे में लाखों रुपये की लागत से बने निर्माण को नुकसान पहुंचा। सवाल यह है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के बाद जिम्मेदारी किसकी तय हुई?
यदि निर्माण एजेंसी या ठेकेदार के वाहन की लापरवाही से शासकीय संपत्ति को नुकसान हुआ है, तो क्या नुकसान की भरपाई ठेकेदार से कराई गई? क्या संबंधित डंपर पर कोई कार्रवाई हुई? और यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो आखिर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि विकास कार्यों के नाम पर सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों पर नियम-कायदे लागू होते हैं या फिर ठेकेदारों के प्रभाव के आगे प्रशासनिक कार्रवाई कमजोर पड़ जाती है?
अब इन सवालों का जवाब नेताओं और अधिकारी-कर्मचारियों को नहीं, बल्कि जिम्मेदार प्रशासन को जनता के सामने देना होगा।
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