देश की सर्वोच्च अदालत ने गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की 24 घंटे की समयसीमा पुलिस द्वारा गिरफ्तारी दर्ज करने से नहीं, बल्कि वास्तविक रूप से हिरासत में लेने के समय से शुरू होगी।
यानी पुलिस पूछताछ के नाम पर किसी व्यक्ति को घंटों हिरासत में रखकर बाद में औपचारिक गिरफ्तारी दिखाकर 24 घंटे के नियम से बच नहीं सकती।
कोर्ट ने यह भी कहा कि 24 घंटे की गणना में केवल पुलिस स्टेशन से अदालत तक पहुंचने का वास्तविक यात्रा समय ही अलग रखा जाएगा।
मजिस्ट्रेट को भी यह सुनिश्चित करना होगा कि व्यक्ति को वास्तव में कब हिरासत में लिया गया था।
अगर 24 घंटे की संवैधानिक समयसीमा का उल्लंघन होता है, तो कानून के अनुसार राहत और रिहाई का आदेश दिया जा सकता है।
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Korba, Korba | Nov 5, 2026