#बालाघाट
खेत बचाओ-धरती माता बचाओ' अभियान का असर, लेंडेझरी के किसान ने अपनाई DSR पद्धति
जिले में कृषि विभाग द्वारा जल संरक्षण, खेती की लागत घटाने और टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने के लिए चलाए जा रहे 'खेत बचाओ-धरती माता बचाओ' अभियान का सकारात्मक परिणाम सामने आ रहा है। इसी क्रम में आज विकासखंड लालबर्रा के ग्राम लेंडेझरी में उन्नत तकनीक DSR (डायरेक्ट सीडेड राइस) यानी सीधी बुवाई पद्धति को बढ़ावा दिया गया।
सुपर सीडर से धान की बुवाई
कृषि विभाग के प्रयासों से प्रेरित होकर ग्राम लेंडेझरी के उन्नतशील कृषक श्री इशूलाल चौहान ने अपने 04 एकड़ खेत में आधुनिक पद्धति से धान की बुवाई की है। आज श्री चौहान के खेतों में 'सुपर सीडर मशीन' के माध्यम से धान के बीज बोए गए। इस नवाचारी पहल से न केवल जल की बचत होगी, बल्कि खेती की लागत में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
आत्मा परियोजना के तहत प्रदर्शन
इस बुवाई कार्य में तकनीकी सहयोग और प्रदर्शन पर विशेष ध्यान दिया गया। कृषक के कुल 4 एकड़ रकबे में से 2.5 एकड़ भूमि पर 'WRI प्रोजेक्ट' (Water Resources Investigation) के अंतर्गत 'आत्मा' (ATMA) विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शन (डिमोंस्ट्रेशन) आयोजित किया गया। इस प्रदर्शन का उद्देश्य क्षेत्र के अन्य किसानों को भी कम पानी और कम लागत में बेहतर पैदावार वाली आधुनिक तकनीकों के प्रति जागरूक करना है।
किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल
उपसंचालक कृषि, श्री फूलसिंह मालवीय ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले में धान की परंपरागत रोपाई के स्थान पर DSR पद्धति को अपनाकर किसान पानी की भारी बचत कर सकते हैं। यह पद्धति मिट्टी की सेहत सुधारने और 'धरती माता' को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में भी सहायक है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान इस तरह की मशीनीकृत और टिकाऊ खेती को अपनाएं ताकि उनकी आय में वृद्धि हो सके।
कृषि विभाग की इस मुहिम से लेंडेझरी के अन्य किसानों में भी उत्साह देखा जा रहा है और वे आने वाले समय में ऐसी ही आधुनिक तकनीकों के उपयोग के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
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15 views | Balaghat, Madhya Pradesh | Jun 28, 2026