उरई का ‘होप हॉस्पिटल’ या दर्द का अड्डा?
बच्चेदानी के ऑपरेशन के बाद जिंदगी संकट में, ₹20 हजार देने और दबाव में अंगूठा लगवाने का आरोप—गरीब परिवार ने खोली कथित लापरवाही की परतें
उरई, जालौन। जिस अस्पताल के दरवाजे पर मरीज जिंदगी बचाने की उम्मीद लेकर पहुंचता है, अगर वहीं से वह और ज्यादा गंभीर हालत में लौटे तो सवाल उठना लाजिमी है।
उरई के कालपी रोड स्थित होप हॉस्पिटल को लेकर सामने आया शिव कुमारी का मामला ऐसे ही कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
मध्य प्रदेश के भिंड से इलाज के लिए उरई आई गरीब महिला शिव कुमारी के परिजनों ने जिलाधिकारी जालौन को शिकायत देकर अस्पताल और संबंधित चिकित्सक पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिवार का दावा है कि बच्चेदानी के ऑपरेशन के बाद महिला को पेशाब से जुड़ी गंभीर समस्या हो गई और हालत लगातार बिगड़ती चली गई।
ऑपरेशन था बच्चेदानी का, लेकिन चोट कहां पहुंची?
परिजनों के मुताबिक 4 जुलाई 2026 को शिव कुमारी का बच्चेदानी का ऑपरेशन हुआ था। परिवार का आरोप है कि ऑपरेशन के दौरान पेशाब की थैली/नली और उससे जुड़ी संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुंचा।
ऑपरेशन के बाद महिला की परेशानी कम होने के बजाय बढ़ती चली गई। परिवार का कहना है कि पेशाब के रिसाव और संक्रमण की समस्या के कारण मरीज की हालत गंभीर होती गई।
अब सवाल यह है—ऑपरेशन के बाद पैदा हुई इस गंभीर जटिलता का कारण क्या था?
क्या यह दुर्भाग्यपूर्ण चिकित्सकीय जटिलता थी, लापरवाही थी या कुछ और? इसका फैसला केवल विशेषज्ञ मेडिकल जांच ही कर सकती है।
₹20 हजार की रकम ने बढ़ा दिए सवाल
मामले में सबसे गंभीर आरोप ₹20 हजार को लेकर है।
परिजनों का दावा है कि महिला की हालत खराब होने के बाद अस्पताल में उन्हें ₹20 हजार दिए गए। परिवार का आरोप है कि इसके साथ ही दबाव बनाकर कुछ कागजात पर अंगूठा और हस्ताक्षर करवाए गए।
अगर परिवार का यह आरोप सही है कि दस्तावेजों पर उनकी इच्छा के विरुद्ध हस्ताक्षर या अंगूठा लगवाया गया, तो यह सिर्फ अस्पताल के इलाज का मामला नहीं रहेगा—बल्कि मरीज की सहमति और अधिकारों की जांच का भी विषय बनेगा।
सवाल यह भी—अगर अस्पताल को अपने इलाज पर पूरा भरोसा था, तो परिवार को दबाव में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने की जरूरत क्यों पड़ी?
उरई से ग्वालियर तक दौड़ता रहा गरीब परिवार
महिला की हालत में सुधार न होने पर परिजन उसे ग्वालियर के अस्पतालों में लेकर गए। परिवार के मुताबिक वहां की जांचों में पेशाब की थैली/नली में गंभीर क्षति और संक्रमण की स्थिति सामने आई।
परिजनों का कहना है कि चिकित्सकों ने आगे जटिल ऑपरेशन की आवश्यकता बताई है। इलाज का खर्च बढ़ते-बढ़ते दो लाख रुपये से अधिक हो चुका है और परिवार आर्थिक संकट में पहुंच गया है।
एक गरीब परिवार के लिए यह सिर्फ इलाज का खर्च नहीं, बल्कि जिंदगी और कर्ज के बीच की लड़ाई बन चुका है।
सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल तक—क्या होगी जांच?
परिवार और स्थानीय लोगों ने संबंधित चिकित्सकों की पूर्व सरकारी सेवाओं और निजी अस्पताल में मरीजों के उपचार को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
कुछ पुराने मामलों का हवाला देते हुए निजी अस्पताल तक मरीजों को पहुंचाने और बाद में गंभीर स्थिति में रेफर किए जाने के आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
लेकिन इन आरोपों का सच क्या है?
क्या स्वास्थ्य विभाग पुराने मामलों की फाइलें खंगालेगा?
क्या अस्पताल के ऑपरेशन रिकॉर्ड की जांच होगी?
क्या मरीज के इलाज से जुड़े सभी दस्तावेज सुरक्षित हैं?
क्या विशेषज्ञों की स्वतंत्र मेडिकल टीम से जांच कराई जाएगी?
इन सवालों के जवाब जांच के बाद ही सामने आएंगे।
अब गेंद स्वास्थ्य विभाग के पाले में
शिकायत के बाद सबसे बड़ी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की है। जांच ऐसी होनी चाहिए जिसमें अस्पताल के रिकॉर्ड, ऑपरेशन नोट, सहमति पत्र, मेडिकल रिपोर्ट, भुगतान संबंधी दस्तावेज और मरीज के बाद के उपचार की रिपोर्ट—हर पहलू की पड़ताल हो।
अगर आरोप झूठे हैं तो सच सामने आना चाहिए और अगर आरोप सही हैं तो जिम्मेदारों पर कानून के मुताबिक कार्रवाई होनी चाहिए।
दर्द लेकर अस्पताल गया था गरीब,
इलाज के बदले सवालों का बोझ मिला।
अगर सच में लापरवाही हुई है साहब,
तो फिर इंसाफ का दरवाजा किसे खोलना था?
और सुनिए—
कागज पर अंगूठा लगवा देने से दर्द मिट नहीं जाता,
गरीब की खामोशी को उसकी सहमति समझ लेना इंसाफ नहीं कहलाता।
क्या होप हॉस्पिटल की होगी पूरी जांच?
यह मामला अब केवल एक परिवार की शिकायत बनकर नहीं रहना चाहिए। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप गंभीर हैं तो अस्पताल की कार्यप्रणाली, चिकित्सकीय रिकॉर्ड और मरीज की सहमति प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
जनता का सवाल साफ है—इलाज के नाम पर अगर कोई गलती हुई है तो जवाबदेही किसकी होगी?
और यदि जांच में आरोप निराधार निकलते हैं, तो वह सच भी जनता के सामने उतनी ही मजबूती से आना चाहिए।
वैधानिक चेतावनी
यह रिपोर्ट पीड़ित परिवार की शिकायत, उनके बयानों और उपलब्ध स्थानीय जानकारियों पर आधारित है।
इसमें लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
चिकित्सकीय लापरवाही, आर्थिक लेन-देन, दबाव में अंगूठा लगवाने तथा अन्य आरोपों की सत्यता संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड, विशेषज्ञों की जांच और सक्षम प्रशासनिक/स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। संबंधित अस्पताल एवं चिकित्सक का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
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Kalpi, Jalaun | Sep 11, 2026