दिनारा पीएचसी में प्रसव के दौरान चिकित्सीय लापरवाही से गर्भस्थ शिशु की मौत, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी पर गिरी गाज
दिनारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के लिए भर्ती एक महिला के इलाज में गंभीर चिकित्सीय लापरवाही का मामला जिसके परिणामस्वरूप गर्भस्थ शिशु की मृत्यु हो गई थी। जिला पदाधिकारी दीपक कुमार के निर्देश पर मामले की हुईं जांच के बाद जांच रिपोर्ट मिलने पर डीएम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दिनारा पीएचसी के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डा राघवेंद्र कुमार को प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को पद से हटा दिया गया है।
डॉ. आशीष कुमार (चिकित्सा पदाधिकारी, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, दिनारा) को अगले आदेश तक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, दिनारा का नया प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी-सह-निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। साथ ही, उन्हें बिहार कोषागार संहिता-2011 के नियम-84 के अंतर्गत अन्य सभी शीर्षों के निकासी एवं व्ययन के अधिकार भी सौंपे गए हैं।
असैनिक शल्य चिकित्सक-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी, रोहतास द्वारा इस संबंध में आदेश जारी किया गया है।
कारवाई की जानकारी देते हुए एसडीएम दिलीप कुमार ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले पर आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
क्या था मामला
लिलवछ निवासी शुभम रवानी की पत्नी नीतू कुमारी को प्रसव के लिए 14 अगस्त को दिनारा पीएचसी में भर्ती कराया गया था। आरोप है कि करीब 18 घंटे तक भर्ती रखने के बावजूद प्रसव नहीं कराया गया। इस दौरान महिला की हालत बिगड़ने पर उसे आनन-फानन में सासाराम रेफर कर दिया गया। स्वजन उसे दूसरे अस्पताल ले गए, जहां प्रसव के बाद चिकित्सकों ने नवजात को मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद परिजनों ने स्वास्थ्यकर्मियों पर इलाज में घोर लापरवाही का आरोप लगाते हुए डीएम से शिकायत की और जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई थी।
इस मामले में डीएम ने एसडीएम दिलीप कुमार के नेतृत्व में तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की। टीम में बीडीओ कुलदीप कुमार विभूति और बिक्रमगंज की अस्पताल मैनेजर शबनम कुमारी शामिल थीं।