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भीलवाड़ा: ईशान किशन की शानदार पारी से भारत ने बांग्लादेश को तीसरे मैच में हरा दिया।#ishankishan #indvsban #210
Bhilwara, Bhilwara
| Dec 10, 2022
#ishankishan
#indvsban
#210
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Bhilwara, Bhilwara | Aug 21, 2026
*बेटियां ससुराल को स्वर्ग बना ले तीर्थ पर जाने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी-आचार्य पुलकसागर* *बेटियों को ये मत सिखाएं कि ससुराल में दबना नहीं उन्हें समझाएं अब वहीं तुम्हारा घर है* *चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव में पुलक वाणी सुनने उमड़ रहे भीलवाड़ावासी* भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार )21 अगस्त लड़का एक जिंदगी में एक जीवन जीता है पर लड़किया एक जिंदगी में दो जीवन जीती है। एक जीवन मायके में ओर दूसरा जीवन ससुराल में जीती है। जो बेटियां ससुराल में मायके के अंदाज में जीती है उनका जीवन बिगड़ जाता है। बेटियां अपने ससुराल को सुंदर बना उसे स्वर्ग बनाने की ठान ले तो वह तीर्थ बन जाएगा ओर उन्हें सम्मेदशिखर या वैेष्णवदेवी जैसे तीर्थ पर जाने की जरूरत ही नहीं रहेगी। ये विचार भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में शुक्रवार को परिवार में बेटियों के महत्व पर प्रवचन में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि बेटियों को ससुराल को स्वर्ग बनाना है तो अहंकार कम करना होगा ओर मां बाप को उस सोच का त्याग करना होगा जिसमें बेटियों से कहां जाता है कि ससुराल में किसी से डरना या दबना मत। इस सोच से बेटियों का घर उजड़ रहा है ओर ऐसा होने पर माता पिता भी चैन से नहीं रह पाएंगे। उन्हें समझाएं कि शादी के बाद अब वहीं उनका घर है। विवाहित बेटियां भी ध्यान रखे कि ससुराल की समस्याओं का रोना मायके में रोने पर इज्जत कम होगी ओर मान सम्मान बनाए रखना है तो वहां की समस्याओं का समाधान वहीं ढूंढना पड़ेगा। बेटियां समस्याओं को अपनी ताकत बनाना सीख जाए। आचार्यश्री ने कहा कि जिस संस्कृति में ये कहा जाता है कि बेटी की डोली पीहर से ओर अर्थी ससुराल से उठती है वहां उसे तलाक के लिए मत उकसाओ। जिसे सबमें खराबी नजर आए समझ लेना उसमें ही खराबी है। सास बहु एक दूसरे को पराई मानने की बजाय मां बेटी के समान प्यार करे ओर सास बहु को इतना प्यार दे कि वह मायके के मोबाइल नम्बर भूल जाए फिर घर स्वर्ग बनते देर नहीं लगेगी। उन्होंने कहा कि बेटियां ससुराल को अपना मानेगी तो ससुरालवाले भी उसे पलकों पर रखेंगे। शादी के बाद बेटियों का सम्मान मायके में नहीं ससुराल में होता है। आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि पैसे से अधिक महत्व संस्कारों का है ओर संस्कार हमारे आचरण,खानपान ओर जीवनशैली में दिखने चाहिए। हमारे बच्चों को सुविधाएं देने से अधिक जरूरी संस्कार देना है। बच्चों से लाड़ प्यार करो पर इतना मत करो कि उनका भविष्य बर्बाद हो जाए। उन्होंने कहा कि बेटियां खेलने की चीज नहीं है उन्हें खिलोना बनाकर मत रखो। बचपन से देवी बनाई तो वह लोगों के ह्दय में स्थान बनाएगी। बेटियों को अच्छी शिक्षा प्रदान करे लेकिन इतना भी मॉर्डन नहीं बनाए कि वह 30 साल की हो जाए ओर शादी नहीं करना चाहे। उनकी उम्र जितनी अधिक होती जाएगी ससुराल में एडजस्ट करना उतना ही मुश्किल होता जाएगा। उज्जवल भविष्य डिग्री से नहीं अच्छे नेचर से बनता है। आचार्यश्री ने कहा कि हम खुद को छोड़ सबको बदलना चाहते है इसलिए कोई नहीं बदलता। कोई किसी को नहीं बदल सकता जब तक आप खुद नहीं बदलना चाहे। खुद को बदल लिया तो परिवार के साथ जीने में आनंद आ जाएगा। जीवन जीने का थोड़ा सा एंगल बदल लिया तो दुःखी जीवन भी सुखी बन सकता। आचार्य पुलकसागर ने कहा कि जिंदगी का गणित उलटा होता है जो दुनिया से नजर हटा लेता है उस पर दुनिया की नजर टिक जाती है। जिंदगी को संवार ले तो मौत भी संवर जाएगी। पलके झुकाकर जियो दुनिया तुम्हे पलकों पर रखेगी। तीर्थंकरों की प्रतिमाएं देख लो पलके झुकी हुई है तो दुनिया ने उन्हें पलकों पर बिठा लिया है। हम अपने आज को संवार ले तो कल स्वत संवर जाएगा। वास्तु सुधारने से नहीं मन को सुधारने से घर अच्छा बनेगा। प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन एवं आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य प्रेमचंद जम्बूकुमार ललित मनोज भैसा परिवार ने प्राप्त किया। सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया। आरके आरसी महिला मण्डल की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। ज्ञान की गंगा में डूबकी लगाने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंच रहे है। ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। है।
Bhilwara, Bhilwara | Aug 21, 2026
*जीवन में परमात्मा के अलावा कोई हमारा सच्चा मित्र नहीं हो सकता-आचार्य रामदयालजी महाराज* *दुनिया में सबसे भयंकर पाप विश्वासघात, विश्वासघाती को कभी क्षमा नहीं मिलती* *माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में दैनिक चातुर्मासिक सत्संग* भीलवाड़ा :निलेश कांठेड़ ( वरिष्ठ पत्रकार ),21 अगस्त जीवन में सखा वहीं होता है जो उसका खास होता है। जिसका विनाश तय है उसके साथ मित्रता नहीं हो सकती। अजर अमर अविनाशी परमात्मा के अलावा हमारा दूसरा कोई मित्र नहीं हो सकता। अविनाशी परमात्मा के साथ हमारी दृढ़ मित्रता व स्नेह होना चाहिए। सखा भाव सम रहे इसमें कभी विषमता नहीं आती है। सखा भक्ति सर्वोच्च भक्ति होती है। ये विचार अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने शुक्रवार को ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत दैनिक सत्संग में सखा भक्ति की चर्चा करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि परमात्मा ओर हमारा सम्बन्ध जन्म-जन्म का है बाकी सब सम्बन्ध पीछे छूट जाते है। स्वार्थ वाली मित्रता कभी टिकती नहीं है। परमात्मा से मित्रता करो न तो वह मरता है, न बिछुड़ता है ओर न आगे होकर मित्रता तोड़ता है। महात्मा परमात्मा कभी पकड़ते नहीं है ओर पकड़ लेते है तो जन्मो जन्म तक अपना बनाकर रखते है कभी छोड़ते नहीं है। आचार्यश्री ने कहा कि स्वामी रामचरण महाराज ने सखा भक्ति के बारे में बताते हुए कहा कि हमारा मन व विचार ही हमारा मित्र व शत्रु है ओर वे ही किसी को शत्रु ओर किसी को मित्र बनाता है इसलिए सबसे पहले अपने मन व विचार को मित्र बनाए। परमात्मा से श्रेष्ठ मित्र जगत में नहीं हो सकता। अर्जुन भगवान कृष्ण का सखा ओर भक्त दोनों था। भगवान ने तत्वज्ञान में बताया कि भक्त से भी सखा श्रेष्ठ होता है। परमात्मा ने अर्जुन को मित्र बनाकर दिव्य ज्ञान प्रदान किया। उन्होंने कहा कि वह भाग्यशाली होते है जिन्हें परमात्मा की मित्रता प्राप्त होती है। हम परमात्मा को मित्र बनाए वह ठीक है पर परमात्मा हमे मित्र स्वीकार करे तो भाग्यशाली है। गोकुल के ग्वाले इसलिए भाग्यशाली थे कि कृष्ण ने उन्हें अपना मित्र बनाया था। बुद्धिमान व्यक्ति वह है जो वेदाभ्यास, शास्त्राभ्यास, स्वाध्याय करता है। वाणीजी का वाणी में स्वाध्याय करेंगे तो उसे आत्मसात कर पाएंगे। आचार्य रामदयालजी महाराज ने कहा कि संसार को मित्रता की दृष्टि से देखे। नकारात्मक सोचते तो शत्रुता ओर सकारात्मक सोचने पर मित्रता नजर आती है। हम परमात्मा में माता पिता, गुरू व मित्र को देखते है तो माता पिता, गुरू व मित्र में भी परमात्मा को देखे ओर कभी इनके साथ विश्वासघात नहीं करे। विश्वासघाती जैसे पापी को धरती मां कभी सहन नहीं करती ओर ऐसा व्यक्ति कभी शांति को प्राप्त नहीं कर सकता। विश्वासघाती को दुनिया में कोई क्षमा नहीं करता। संसार में सबसे भयंकर पाप विश्वासघात होता है। उन्होंने कहा कि मित्र ओर परमात्मा के साथ छल कपट कभी मत करो। मित्र भक्ति में ज्ञान ओर ज्ञान में भगवान है। सच्चा मित्र वहीं है जो अपने साथ को कुमार्ग से सुमार्ग पर ले लाए ओर पतित को पावन बना दे। आचार्यश्री ने कहा कि धैर्य, धर्म, मित्र ओर नारी की परीक्षा विपतिकाल में ही होती है। संकट में ही पता चलता कौन कितना धैर्यवान ओर धर्मात्मा है। आचार्यश्री से पूर्व अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय के प्रखर वक्ता संत मनोरथरामजी आलोट ने मानस प्रवचन दिया। प्रवचन के विश्राम पर श्रद्धालुओं द्वारा आचार्यश्री रामदयालजी महाराज की आरती की गई। सत्संग में भीलवाड़ा सहित विभिन्न स्थानों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। चातुर्मास में दैनिक सत्संग का समय सुबह 9 से 10 बजे तक है। रामधुनी के साथ सुबह 8.30 से 9 बजे तक वाणीजी का पाठ हो रहा है। सूर्यास्त के समय संध्या आरती एवं रामस्नेही सम्प्रदाय के युवा संत रामजस ईडर द्वारा भक्तमाल की कथा में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे है।
Bhilwara, Bhilwara | Aug 21, 2026
Bhilwara, Bhilwara | Aug 21, 2026
Bhilwara, Bhilwara | Aug 21, 2026
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