27 हजार भारी वाहन चालकों को निशुल्क प्रशिक्षण, आभा कार्ड और 90 देशों में रोजगार की राह।*
अनूठी पहल : सिंगावल, अजमेर से शुरू हुई सड़क सुरक्षा की मूक क्रांति अब सीकर-जयपुर, उदयपुर,बालोतरा, जोधपुर और चुरू के बाद भरतपुर पहुंची; रोज 27 चालकों को मिल रहा प्रशिक्षण
| भरतपुर
भारत में दुनिया के कुल वाहनों का भले ही करीब एक प्रतिशत हिस्सा हो, लेकिन वैश्विक सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में भारत की हिस्सेदारी 11 प्रतिशत से अधिक है। वर्ष 2024 में देश में 4.87 लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 1.77 लाख लोगों की जान चली गई। यानी औसतन हर दिन करीब 487 मौतें। सड़क दुर्घटनाएं 15 से 45 वर्ष के उत्पादक आयु वर्ग में मृत्यु का एक बड़ा कारण हैं और इनके चलते देश की अर्थव्यवस्था को प्रतिवर्ष जीडीपी का करीब 4.5 प्रतिशत तक नुकसान उठाना पड़ता है।
सड़कों पर होने वाली इन दुर्घटनाओं को रोकने और भारी वाहन चालकों को अधिक दक्ष एवं जिम्मेदार बनाने के उद्देश्य से राजस्थान के एनएच-48 स्थित सिंगावल, अजमेर में स्थापित देश के पहले अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर (आरडीटीसी) ने सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक नई मिसाल कायम की है। भारत सरकार, राजस्थान सरकार एवं राजस्थान सड़क सुरक्षा सोसायटी के पीपीपी मॉडल के तहत संचालित यह केंद्र अब प्रदेश के अलग-अलग जिलों में उप-केंद्रों के माध्यम से अपनी पहुंच बढ़ा रहा है।
सड़क दुर्घटनाओं में करीब 87 प्रतिशत मामलों में चालक की लापरवाही को प्रमुख कारण माना जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए चालकों के व्यवहार, कौशल और सड़क सुरक्षा संबंधी समझ में बदलाव लाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। करीब 18 करोड़ रुपये की डीएलसी लागत से 4.17 एकड़ भूमि पर स्थापित आरडीटीसी सिंगावल इस दिशा में लगातार काम कर रहा है। केंद्र की निदेशक एवं सोसायटी की पूर्व अध्यक्ष ऋतु चौहान स्वयं स्वैच्छिक सेवा के रूप में इस अभियान को आगे बढ़ा रही हैं। वर्ष 2002 में रोडवेज बस चालक की गलती से हुई सड़क दुर्घटना में अपने इकलौते भाई को खोने के बाद उन्होंने सड़क सुरक्षा को अपने जीवन का मिशन बना लिया।
*भरतपुर में भी शुरू हुआ प्रशिक्षण*
अजमेर, सीकर-जयपुर, उदयपुर ,बालोतरा, जोधपुर और चुरू के बाद अब भरतपुर में भी आरडीटीसी का उप-केंद्र शुरू हो गया है, जहां प्रतिदिन 27 भारी वाहन चालकों को निशुल्क प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आरडीटीसी सिंगावल की संचालन एवं प्रबंधन संस्था वाहन चालक कौशल विकास संस्थान, सिंगावल, जिसमें भारत सरकार, राजस्थान सरकार एवं सोसायटी के प्रतिनिधि शामिल हैं, ने श्रीराम सेवा संकल्प एवं डीबी स्किल के सहयोग से पिछले दो वर्षों एवं 4 माह में करीब 27 हजार भारी वाहन चालकों को प्रशिक्षित किया है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) लेवल-4 के तहत संचालित यह विशेष ड्राइवर रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम एक ओर सड़क सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर चालकों के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोल रहा है।
*प्रशिक्षण के लिए ऐसे कराएं पंजीकरण*
भरतपुर उप-केंद्र में प्रशिक्षण लेने के इच्छुक चालक अपने वैध हैवी ड्राइविंग लाइसेंस एवं आधार कार्ड के साथ पंजीकरण करवा सकते हैं। प्री-रजिस्ट्रेशन के लिए प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह गडासिया – 7568673970 से संपर्क किया जा सकता है।
प्रशिक्षण पूर्ण करने वाले चालकों को भारत सरकार के कौशल विकास मंत्रालय, राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) एवं लॉजिस्टिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल (एलएससी) द्वारा मान्यता प्राप्त नेशनल स्किल क्वालिफिकेशन फ्रेमवर्क (एनएसक्यूएफ) लेवल-4 का प्रमाणपत्र प्रदान किया जा रहा है। यह प्रमाणपत्र ड्राइविंग क्षेत्र में कक्षा 12वीं की योग्यता के समकक्ष मान्यता से जुड़ा है और प्रशिक्षित चालकों के लिए देश-विदेश में रोजगार के अवसर बढ़ाने में सहायक है।यह प्रमाणपत्र 90 अन्य देशों में भी मान्य है ।
नियमों के चलते प्रशिक्षण का बढ़ा महत्व
भारी वाहन चालकों के लिए रिफ्रेशर ट्रेनिंग को अनिवार्य किए जाने के कारण इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपयोगिता और बढ़ गई है। सुप्रीम कोर्ट के 16 दिसंबर 1997 के आदेश के बाद भारी वाहन ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण में रिफ्रेशर प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया गया। राजस्थान में भी व्यावसायिक वाहन चालकों के लाइसेंस नवीनीकरण से पहले निर्धारित प्रशिक्षण को महत्वपूर्ण बनाया गया है।
12 जून 2026 को उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन मंत्री की
अध्यक्षता में आयोजित स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल की बैठक में भी लाइसेंस नवीनीकरण से पहले रिफ्रेशर ट्रेनिंग को अनिवार्य करने संबंधी निर्णय लिया गया। परिवहन विभाग की अधिसूचना के तहत राजस्थान मोटर व्हीकल रूल्स, 1990 में नियम 2.18ए जोड़े जाने के बाद अधिकृत संस्थान से निर्धारित रिफ्रेशर ट्रेनिंग पूरा करना व्यावसायिक वाहन चालकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
*90 देशों में रोजगार की राह*
इस प्रशिक्षण की सबसे बड़ी विशेषता इसका अंतरराष्ट्रीय महत्व है। सिंगावल और इसके उप-केंद्रों से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले चालकों को कमर्शियल व्हीकल ड्राइवर लेवल-4 का प्रमाणपत्र दिया जाता है। इस योग्यता के माध्यम से भारतीय भारी वाहन चालकों के लिए खाड़ी देशों के साथ-साथ जर्मनी, फ्रांस, स्पेन, इटली और यूनाइटेड किंगडम सहित करीब 90 देशों में रोजगार के अवसरों की राह खुल रही है।
रोज 27 चालकों का बैच, प्रशिक्षण पूरी तरह निशुल्क
प्रशिक्षण की गुणवत्ता और सरकारी मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिदिन केवल 27 चालकों का बैच लिया जाता है। प्रशिक्षण के दौरान एलएससी द्वारा ऑनलाइन असेसमेंट और वीडियो वेरिफिकेशन किया जाता है। चालकों का डिजिटल हेल्थ कार्ड यानी आभा आईडी भी बनाया जा रहा है। श्रीराम सेवा संकल्प के सहयोग से चालकों को निशुल्क दुर्घटना बीमा, लंच, चाय तथा करीब 1,000 रुपये मूल्य की विशेष ड्राइवर किट भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिसमें बैग, कंबल, कैप और टी-शर्ट शामिल हैं। स्मार्ट क्लासरूम में चालकों को ड्राइविंग चालीसा, वाहनों के सुरक्षा उपकरण, नई तकनीक, रोड साइन एवं मार्किंग, गुड सेमैरिटन (राहवीर योजना) के अधिकारों और सड़क सुरक्षा की सभी योजनाओं के साथ पीएम राहत योजना सहित विभिन्न विषयों की जानकारी दी जा रही है।
*भरतपुर में निरीक्षण चालकों से प्रशिक्षण लेने की अपील*
आज डीग अलवर जाते हुए भरतपुर दौरे पर पहुंचे डॉ. वीरेन्द्र सिंह राठौड़, डिप्टी कमिश्नर (रोड सेफ्टी), परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रशिक्षण की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए ट्रक, ट्रेलर, बस, बालवाहिनी बस, टैक्सी एवं अन्य भारी वाहन चालकों से अधिक से अधिक संख्या में इस निशुल्क प्रशिक्षण में भाग लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि चालक प्रशिक्षण को केवल लाइसेंस की औपचारिकता न मानकर सड़क पर स्वयं और दूसरों का जीवन सुरक्षित रखने के अभियान के रूप में लें तथा प्रशिक्षण के बाद एनएसक्यूएफ लेवल-4 का प्रमाणपत्र प्राप्त करें।इस दौरान एआरटीओ अभय मुद्गल एवं परिवहन निरीक्षक देवेन्द्र सुण्डा भी उपस्थित रहे उन्होंने जिला सड़क सुरक्षा समिति एवं परिवहन विभाग की प्रेरणा से भरतपुर में उप केन्द्र शुरू करने के लिए प्रायोजक एवं आयोजक संस्थाओं का आभार जताया तथा विश्वास दिलाया कि भरतपुर- डीग जिलों के 10 हज़ार ड्राइवरों को प्रशिक्षण देने के लक्ष्य पूर्ति में विभाग पूरा सहयोग करेगा ।
आरडीटीसी की निदेशक ऋतु चौहान के अनुसार प्रदेश में कोटा, नागौर, श्रीगंगानगर, बीकानेर, भीलवाड़ा , सवाईमाधोपुर में भी छह नए केंद्र प्रस्तावित हैं। इन केंद्रों के शुरू होने के बाद हर माह करीब 6 हजार भारी वाहन चालकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य है। यानी सिंगावल से शुरू हुई यह सड़क सुरक्षा की मूक क्रांति अब प्रदेश के हर हिस्से तक पहुंचने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है।