विश्व एनेस्थीसिया दिवस सुरक्षित शल्य चिकित्सा और दर्द रहित उपचार में एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की अहम भूमिका डॉ पंकज गुप्ता
विश्व एनेस्थीसिया दिवस के अवसर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल चम्बा में एनेस्थीसिया विभाग के द्वारा कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल चम्बा प्रधानाचार्य कम डीन डॉ पंकज गुप्ता ने की, जबकि विशेष अतिथि के तौर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी चम्बा डॉ जालाम भारद्वाज, एमओएच डॉ कविता महाजन और एमएस डॉ प्रदीप सिंह ने की।
विश्व एनेस्थीसिया दिवस प्रत्येक वर्ष 16 अक्टूबर को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1846 में अमेरिका के बोस्टन स्थित मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में ईथर का उपयोग करके सार्वजनिक रूप से सफल एनेस्थीसिया प्रदर्शन किया गया था। इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने आधुनिक शल्य चिकित्सा में एक नए युग की शुरुआत की। इसके बाद ऑपरेशन के दौरान मरीजों को दर्द से राहत देना और जटिल शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं को अधिक सुरक्षित तरीके से करना संभव हुआ।
इस मोके पर पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल चम्बा प्रधानाचार्य कम डीन डॉ पंकज गुप्ता ने इस दिन को मनाने के महत्व के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, एनेस्थीसिया विशेषज्ञों के योगदान को सम्मान देना तथा सुरक्षित शल्य चिकित्सा, दर्द प्रबंधन और बेहतर चिकित्सा सेवाओं के प्रति जागरूकता को प्रोत्साहित करना है।
डॉ पंकज गुप्ता ने कहा की एनेस्थीसिया चिकित्सा आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की एक महत्वपूर्ण शाखा है। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ऑपरेशन से पहले मरीज की स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करते हैं, ऑपरेशन के दौरान मरीज के रक्तचाप, हृदय गति, ऑक्सीजन स्तर और अन्य महत्वपूर्ण शारीरिक कार्यों की निरंतर निगरानी करते हैं तथा ऑपरेशन के बाद दर्द नियंत्रण एवं सुरक्षित रिकवरी में अहम भूमिका निभाते हैं।
डॉ पंकज गुप्ता ने कहा की एनेस्थीसिया का उपयोग केवल ऑपरेशन के दौरान बेहोशी देने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रसव के दौरान दर्द से राहत, आपातकालीन चिकित्सा, गहन चिकित्सा सेवाओं तथा विभिन्न प्रकार के दर्द के उपचार में भी इसका महत्वपूर्ण योगदान है।
डॉ पंकज गुप्ता ने कहा की एनेस्थीसिया विभाग विभिन्न शल्य चिकित्सा प्रक्रियाओं के सुचारू संचालन और मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। विभाग के चिकित्सकों एवं स्वास्थ्य कर्मचारियों के समन्वित प्रयासों से मरीजों को बेहतर चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में सहायता मिलती है।
इस मोके पर आम जनता को जानकारी के माध्यम से डॉ सलोनी सूद के द्वारा आईएसए पंच रक्षक: प्रत्येक आईएसएयन ने 5 भारतीयों को 5 जीवन रक्षक कौशल सिखाए। इंडियन सोसाइटी ऑफ एनेस्थेसियोलॉजिस्ट्स (ISA) हमेशा से ही जीवन बचाने, रोगी देखभाल को बेहतर बनाने और समाज के साथ ज्ञान साझा करने में अग्रणी रही है। एनेस्थेसियोलॉजिस्ट होने के नाते, हम किसी और से बेहतर समझते हैं कि आपातकालीन स्थिति में, शुरुआती कुछ मिनट जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर तय कर सकते हैं। इसलिए, हमारी ज़िम्मेदारी अस्पताल या ऑपरेशन कक्ष की चारदीवारी तक ही सीमित नहीं है। यह हमारे परिवारों, आस-पड़ोस, कार्यस्थलों, समुदायों और संपूर्ण समाज तक फैली हुई है।
आम लोगों को 5 जीवन रक्षक कौशल में प्रशिक्षित करवाई।
ये पाँच आवश्यक कौशल हैं
1. छाती पर दबाव/केवल दबाव आधारित जीवन रक्षक प्रणाली (सीओएलएस):
सुनिश्चित करें कि स्थिति सुरक्षित है, रोगी के बगल में घुटने टेकें, अपने बाएं हाथ को दाहिने हाथ के ऊपर रखें और उंगलियों को आपस में फंसा लें, फिर इसे रोगी की छाती के निचले हिस्से पर रखें, आगे की ओर झुकें ताकि आपके कंधे रोगी की छाती के ठीक ऊपर हों, अपनी कोहनियों को सीधा करें और छाती को दबाना शुरू करें (1, 2, 3, 4 आदि)।
2. पुनर्प्राप्ति स्थिति
तंग कपड़ों को ढीला करें, व्यक्ति को पीठ के बल लिटाएं, उसकी बांह को शरीर के समकोण पर अपनी ओर रखें, दूसरे हाथ को चेहरे के दूसरी तरफ रखें, उसी तरफ के घुटने को समकोण पर मोड़ें, मुड़े हुए घुटने को धीरे से खींचकर व्यक्ति को अपनी ओर खींचें, ठुड्डी को ऊपर की ओर झुकाकर वायुमार्ग खोलें
3. दम घोंटने के लिए पेट पर दबाव डालना
दम घुट रहे व्यक्ति की छाती के चारों ओर अपनी बाहें लपेटें और मुट्ठी बनाएं, उसे पसलियों के नीचे रखें और ऊपर और अंदर की ओर ज़ोरदार धक्के दें।
4. वासोवागल सिंकोप में पैर उठाना
मरीज का तुरंत आकलन करें और घुटनों को सीधा रखते हुए पैरों को ऊपर उठाएं ताकि मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति बेहतर हो सके।
5. आपातकालीन चिकित्सा किट को समझना और उसका उपयोग करना
75 मिलीग्राम एस्पिरिन की 4 गोलियां
4 टैबलेट 20 मिलीग्राम एटोरवास्टेटिन
75 मिलीग्राम क्लोपिडोग्रेल की 4 गोलियां
5 मिलीग्राम सॉर्बिट्रेट की 4 गोलियां पड़ोसी, घरेलू सहायक, ड्राइवर, सुरक्षाकर्मी, कार्यालय के सहकर्मी, छात्र, परिवार के सदस्य या सामुदायिक स्वयंसेवक - तो इसका कितना प्रभाव पड़ेगा। ये प्रशिक्षित व्यक्ति आपातकालीन स्थिति में आत्मविश्वास से भरे प्राथमिक उत्तरदाता बन सकते हैं। यह कार्यक्रम राष्ट्रव्यापी स्तर पर चलाया गया था।
इस अवसर पर पंडित जवाहरलाल नेहरू राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल चम्बा के एनेस्थीसिया विभाग के डॉ सलोनी सूद, डाॅ माणिक सहगल, डाॅ अश्वनी, डाॅ रजनीत कौर, डाॅ रितु रावत, डाॅ दिनबाग सिंह ठाकुर, डाॅ रोहित ठाकुर, डाॅ अरविन्द भाटिया, डाॅ विनोद भारद्वाज, डाॅ मनीष, डॉ मनुज शर्मा, डॉ सुनील ठाकुर,नीतीक्षा, इशिता, अपूर्वा, ज्ञान ठाकुर, कमल कांत, कमल कुमार, रजत, ओम प्रकाश,दिनेश, वार्ड सिस्टर सरिता, नर्सिंग स्टॉफ रूपा और मीनू गुप्ता सहित प्रशिक्षु डाक्टर मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान विश्व एनेस्थीसिया दिवस के मौके पर पोस्टर मेंकिग प्रतियोगिता भी करवाई गई जिसमें आठ प्रशिक्षुओं ने भाग लिया और जिसमें प्रथम स्थान पर अनीशा, दूसरे स्थान न्यांग और तीसरे स्थान आंचल रही, जिनको मुख्यातिथि के द्वारा मेंमेंटों देकर सम्मनित किया गया।
Chamba, Chamba | Oct 16, 2026