उत्तराखंड के गोलू महाराज (गोल्ज्यू देवता) को खास तौर पर “न्याय के देवता” के रूप में माना जाता है । कुमाऊं क्षेत्र में उनकी बहुत गहरी लोक-आस्था है ।
गोलू महाराज की प्रमुख मान्यताएं
न्याय के देवता: मान्यता है कि जिस व्यक्ति को कहीं न्याय नहीं मिल पाता, वह गोलू महाराज के दरबार में अपनी फरियाद रखता है ।
चिट्ठी/अर्जी लगाने की परंपरा: खासकर चितई गोलू मंदिर, अल्मोड़ा में लोग अपनी समस्या या मनोकामना लिखकर अर्जी लगाते हैं ।
घंटी चढ़ाने की परंपरा: मनोकामना पूरी होने या न्याय मिलने के बाद श्रद्धालु मंदिर में घंटी चढ़ाते हैं । इसी कारण चितई मंदिर में हजारों घंटियां दिखाई देती हैं ।
शिव के गौर भैरव स्वरूप से संबंध: सरकारी पर्यटन स्रोतों में गोलू देवता को भगवान शिव के गौर भैरव स्वरूप से जोड़ा गया है । कुल/इष्ट देवता: कुमाऊं के अनेक गांवों में गोलू देवता को इष्ट या कुल देवता के रूप में भी पूजा जाता है । चितई (अल्मोड़ा), घोड़ाखाल (नैनीताल), गैराड़/डाना गोलू (अल्मोड़ा) और चंपावत के गोलू देवता मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध हैं ।
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