Install App
Login
HOME
Delhi
Haryana
Uttar Pradesh
Bihar
Chhattisgarh
Madhya Pradesh
Rajasthan
Jharkhand
Himachal Pradesh
Uttarakhand
Punjab
Andhra Pradesh
Telangana
Tamil Nadu
Karnataka
Maharashtra
Assam
West Bengal
Tripura
Gujarat
Odisha
Kerala
Jansamasya
News
पुलिस
Bjp
National
Bihar
India
कांग्रेस
बीजेपी
Gujarat
भाजपा
Accident
Congress
Modi
Delhi
Viral
Jharkhand
Up
Bollywood
Breakingnews
Narendramodi
Madhya_pradesh
उत्तरप्रदेश
Pmmodi
Rahulgandhi
यूपी
कानपुर
Uttarpradesh
Haryana
मंत्री
saurabhpatrakar
No video available
11
जालौन: सिकरी राजा में हुआ मद भागवत कथा का शुभारंभ
Jalaun, Jalaun
| Jan 29, 2023
#other
MORE NEWS
jalaun. ladki ne shadi kar vidio kiya vayral
Jalaun, Jalaun | Aug 13, 2026
पडकुला 48 लाख का मुक्तिधाम या भ्रष्टाचार का स्मारक? पडकुला में सरकारी रिकॉर्ड में बना अंत्येष्टि स्थल, जमीन पर पहुंचने का रास्ता तक नहीं! जनपद जालौन में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। माधौगढ़ ब्लाक की ग्राम पंचायत पडकुला (LGD Code 68941) में बनाए गए अंत्येष्टि स्थल को लेकर ग्रामीणों और मौके पर पहुंची पत्रकारों की टीम ने कई सवाल उठाए हैं। मेरी पंचायत पोर्टल पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार Antesthi Sthal Ka Nirman नाम से दर्ज इस कार्य की अनुमानित लागत ₹48 लाख दिखाई गई है। रिकॉर्ड में ₹25,66,250 व्यय भी दर्ज है। वहीं भुगतान विवरण में अलग-अलग मदों में ठेकेदार/सप्लायर सहित अन्य भुगतान दर्ज दिखाई दे रहे हैं। यानी सरकारी पोर्टल पर काम और भुगतान का पूरा हिसाब नजर आ रहा है, लेकिन मौके की तस्वीर कई सवाल खड़े कर रही है। सबसे बड़ा सवाल—अंत्येष्टि स्थल तक रास्ता कहां है? मौके पर पहुंची टीम के अनुसार अंत्येष्टि स्थल तक पहुंचने के लिए कोई सुगम रास्ता नजर नहीं आया। बरसात के मौसम में आसपास खेतों में पानी और घास-फूस के बीच पत्रकारों की टीम को भी बेहद कठिनाई से मौके तक पहुंचना पड़ा। टीम को तार की फेंसिंग, खेतों की मेड़ों और पानी भरे रास्तों के बीच से होकर जाना पड़ा। ऐसे में सवाल उठता है कि अगर गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाए तो शव को इस अंत्येष्टि स्थल तक आखिर ले जाया कैसे जाएगा? स्थानीय लोगों का कहना है कि ग्रामीण आज भी मजबूरी में अपने-अपने खेतों या पुराने स्थानों पर अंतिम संस्कार करते हैं। यदि यह स्थिति सही है तो इतनी बड़ी धनराशि खर्च करके बनाया गया अंत्येष्टि स्थल आखिर किस उपयोग के लिए है? निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल मौके पर निर्माण में दरारें दिखाई देने की बात सामने आई है। करीब 40–48 लाख रुपये की लागत वाले कार्य में यदि निर्माण कुछ ही समय में खराब होने लगे तो उसकी गुणवत्ता की जांच की आवश्यकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रिकॉर्ड में निर्माण कार्य Completion of work यानी पूर्ण दर्शाया गया है, जबकि जमीनी स्थिति और उपयोगिता को लेकर सवाल बने हुए हैं। भुगतान के रिकॉर्ड ने बढ़ाए सवाल पोर्टल के स्क्रीनशॉट में MS FOUJI CONTRACTER AND SUPPLAYER के नाम से कई भुगतान दिखाई दे रहे हैं। एक भुगतान ₹10,05,515, दूसरा ₹2,50,000, इसके अलावा ₹1,00,000, ₹4,50,000 और अन्य भुगतान भी रिकॉर्ड में दिखाई देते हैं। एक अन्य प्रविष्टि में ₹24,360 इंजीनियर के नाम से दर्ज है। अब सवाल यह है कि कुल कितना भुगतान हुआ, किस-किस मद में हुआ, कौन-कौन से कार्य कराए गए और मौके पर वास्तव में कितना निर्माण हुआ? इन सभी बिंदुओं की तकनीकी एवं वित्तीय जांच ही तस्वीर साफ कर सकती है। सवाल सीधे जिम्मेदारों से ₹48 लाख की अनुमानित लागत क्यों? अंत्येष्टि स्थल तक पक्का रास्ता क्यों नहीं? निर्माण पूरा दिखाने के बाद भी स्थल उपयोगी क्यों नहीं? निर्माण में दरारें क्यों आईं? भुगतान की अलग-अलग किस्तों का पूरा विवरण क्या है? क्या कार्य का तकनीकी सत्यापन और गुणवत्ता जांच हुई? क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया? यह खबर उपलब्ध सरकारी पोर्टल के रिकॉर्ड और मौके की स्थिति पर आधारित सवालों को सामने रखती है। भ्रष्टाचार हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि सक्षम विभाग की जांच के बाद ही होगी। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर सरकारी धन के एक-एक रुपये का हिसाब सामने लाता है या फिर फाइलों में काम पूरा लिखकर मामला बंद कर दिया जाता है। वीडियो को अंत तक जरूर देखें और कमेंट बॉक्स में अपनी राय बताएं—क्या आपके गांव में भी अंत्येष्टि स्थल बना है? अगर बना है तो उसकी हालत कैसी है? और आपके आसपास किसी सरकारी निर्माण में गड़बड़ी है तो हमें जानकारी दें। ₹48 लाख के अंत्येष्टि स्थल पर उठ रहे सवालों पर @जालौन_प्रशासन संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराए—आखिर सरकारी धन का हिसाब कौन देगा? #जिलाधिकारीजालौन #DMJalaun #राजेश_कुमार_पाण्डेय #मुख्यविकासअधिकारीजालौन #CDOJalaun #जिलापंचायत_राज_अधिकारी #DPROJalaun #खंडविकासअधिकारी #BDOमाधौगढ़ #उपजिलाधिकारीमाधौगढ़ #SDMमाधौगढ़ #तहसीलदारमाधौगढ़ #ग्रामपंचायतपटकुला #ग्रामप्रधानमधुदेवी #ग्रामसचिवसुमितकुमार #पंचायतसचिव #ग्रामपंचायतअधिकारी #पंचायतीराजविभाग #विकासखंडमाधौगढ़ #जालौनप्रशासन #जालौनपुलिस #JalaunNews #MadhogarhNews #JalaunAdministration #GroundReport #CorruptionExposed #BreakingNews
Jalaun, Jalaun | Aug 12, 2026
baccho ne lod kiya lodar
Jalaun, Jalaun | Aug 12, 2026
कीचड़ में फंसी स्कूल बस, पैदल निकलने को मजबूर बच्चे! उरई की करमेर रोड पर करोड़ों की सड़क पर उठे सवाल उरई की करमेर रोड से शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। सड़क निर्माण के बीच बारिश के बाद रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो गया, जिससे स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक यह सड़क लंबे समय से बदहाल थी और निर्माण शुरू होने के बाद उन्हें राहत की उम्मीद थी। लेकिन बारिश के बाद सड़क की स्थिति और खराब हो गई। बच्चों को इसी कीचड़ से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है और कीचड़ में बस फंसने की तस्वीरें भी सामने आई हैं। वहीं आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक इस सड़क निर्माण कार्य की स्वीकृत लागत 4317.20 लाख रुपये यानी करीब 43.17 करोड़ रुपये बताई गई है। अनुबंध 25 फरवरी 2026 को हुआ और कार्य पूर्ण करने की निर्धारित तिथि 24 मई 2027 है। अब सवाल यह है कि निर्माणाधीन सड़क पर जल निकासी और आवागमन की सुरक्षित व्यवस्था क्यों नहीं है? क्या निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की जांच हो रही है? क्या लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करेंगे? हालांकि सड़क निर्माण अभी पूरा नहीं हुआ है, इसलिए अंतिम गुणवत्ता पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी। लेकिन बारिश के दौरान सामने आई इन तस्वीरों और स्थानीय लोगों की शिकायतों की जांच जरूर होनी चाहिए। करमेर रोड की इस तस्वीर पर आपकी क्या राय है? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को मौके पर जाकर जांच करनी चाहिए? कमेंट में बताइए।
Jalaun, Jalaun | Aug 11, 2026
19 लाख का मरघट, साल भर भी नहीं टिका और उसी की फोटो लगाकर फिर 24.50 लाख का खेल? छिरिया सलेमपुर में सरकारी निर्माण पर बड़ा सवाल—पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर लाखों की धनराशि का प्रस्ताव; रकम फिलहाल पेंडिंग जनपद जालौन के जालौन ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत छिरिया सलेमपुर में सरकारी धन से बनाए गए अंत्येष्टि स्थल की हालत और सरकारी रिकॉर्ड ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस मरघट के निर्माण पर करीब 19.43 लाख रुपये खर्च होना दर्ज है, उसमें निर्माण के कुछ ही समय बाद दरारें दिखाई दे रही हैं। सवाल यह है कि जब निर्माण अभी नया है और उसकी गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं, तो उसी मरघट की तस्वीर लगाकर दोबारा लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की धनराशि के लिए रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया? पहले 19.43 लाख खर्च, अब उसी जगह फिर लाखों का प्रस्ताव! मेरी पंचायत पर उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार छिरिया सलेमपुर ग्राम पंचायत में अंत्येष्टि स्थल से जुड़े निर्माण कार्य में 19,43,879 रुपये का व्यय दर्ज है, जबकि अनुमानित लागत 20 लाख रुपये दिखाई गई है। कार्य को पूर्ण भी दर्शाया गया है। लेकिन मौके पर निर्माण की स्थिति देखकर गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं। लैंटर के नीचे की पट्टियों और निर्माण के कुछ हिस्सों में दरारें दिखाई दे रही हैं। यानी निर्माण पुराना होने की बात नहीं, बल्कि सवाल यह है कि साल भर भी पूरा नहीं हुआ और निर्माण में दरारें कैसे आ गईं? सबसे बड़ा सवाल—उसी मरघट की फोटो फिर क्यों? मामले का सबसे गंभीर पहलू यह है कि जिस मरघट का निर्माण पहले ही हो चुका है, उसी स्थान की फोटो लगाकर ग्राम पंचायत के ऑनलाइन रिकॉर्ड में फिर एक नए कार्य के लिए लगभग 20 से 24.50 लाख रुपये की अनुमानित धनराशि दिखाई गई है। उपलब्ध स्क्रीनशॉट में दूसरे कार्य की अनुमानित लागत 24,50,000 रुपये, पंजीकरण की तारीख 28 जुलाई 2026 और व्यय ₹0 दर्ज है। कार्य वर्तमान में चल रहा/प्रस्तावित स्थिति में दिखाई दे रहा है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल इस नए कार्य की धनराशि खर्च होना रिकॉर्ड में नहीं दिख रहा और रकम पेंडिंग स्थिति में है। यहीं से बड़ा सवाल पैदा होता है— जब उसी जगह पहले से करीब 19 लाख रुपये खर्च करके मरघट बनाया जा चुका है, तो फिर उसी मरघट की फोटो लगाकर दोबारा 20-24 लाख रुपये के नए कार्य का रिकॉर्ड क्यों तैयार किया गया? अगर समय रहते सवाल नहीं उठता तो...? आज अगर इस मामले पर सवाल नहीं उठाया जाता और रिकॉर्ड की पड़ताल नहीं की जाती, तो आशंका थी कि आने वाले दिनों में उसी स्थान पर दोबारा लाखों रुपये की धनराशि स्वीकृत या खर्च की दिशा में आगे बढ़ सकती थी। फिलहाल उपलब्ध रिकॉर्ड में इस नए कार्य पर ₹0 व्यय दिखाई दे रहा है। इसलिए अब जरूरत है कि संबंधित अधिकारी धनराशि जारी होने से पहले ही पूरे मामले की जांच करें। क्या पहले से बने अंत्येष्टि स्थल की तकनीकी जांच हुई है? क्या पुराने कार्य की एमबी और भुगतान की जांच हुई? क्या नए प्रस्ताव में उसी पुराने निर्माण की फोटो इस्तेमाल की गई? क्या दोनों कार्यों का एस्टीमेट अलग-अलग है? और सबसे महत्वपूर्ण—जब पुराना निर्माण मौजूद है तो उसी स्थान पर फिर 24.50 लाख रुपये का नया काम आखिर किस आधार पर प्रस्तावित किया गया? जांच हुई तो खुल सकती है पूरी तस्वीर इस मामले में सीधे तौर पर किसी को दोषी ठहराने के बजाय जरूरी है कि प्रशासन रिकॉर्ड और मौके की संयुक्त जांच कराए। पुराने कार्य की एमबी, एस्टीमेट, भुगतान वाउचर, पूर्णता प्रमाणपत्र और नए कार्य के प्रस्ताव की तकनीकी फाइल की जांच की जाए। अगर जांच में सामने आता है कि एक ही निर्माण को अलग-अलग नाम या फोटो के जरिए दोबारा धनराशि लेने का प्रयास किया गया, तो यह बेहद गंभीर मामला होगा और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई के साथ सरकारी धन की सुरक्षा भी जरूरी होगी। जनता से सीधा सवाल 19 लाख रुपये में बना मरघट, साल भर भी नहीं हुआ और दरारें सामने आ गईं। अब उसी मरघट की फोटो लगाकर फिर करीब 20 से 24.50 लाख रुपये का काम रिकॉर्ड में दिखाई दे रहा है, जबकि फिलहाल खर्च ₹0 दर्ज है। आखिर एक ही मरघट पर बार-बार सरकारी धन क्यों? अगर समय रहते यह मामला सामने नहीं आता तो क्या आने वाले दिनों में फिर लाखों रुपये उसी जगह खर्च हो जाते? आपकी क्या राय है? क्या यह सिर्फ रिकॉर्ड की गलती है या इसके पीछे कोई बड़ा खेल हो सकता है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर बताइए। कागजों में कुछ और, जमीन पर कुछ और—अब जांच बताएगी असली सच।
Jalaun, Jalaun | Aug 11, 2026