जीवन की पहली ढाल:जन्म के पहले छह महीने तक केवल माँ का दूध ही क्यों है सबसे बड़ा अमृत?
प्रेस विज्ञप्ति 492,आज दिनांक 22.06.2026
किशनगंज जिले में जीवन के पहले कुछ महीने किसी भी बच्चे के संपूर्ण शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवधि होते हैं। इसी दौरान मिलने वाला पोषण उसके पूरे जीवन के स्वास्थ्य की दिशा तय करता है। चिकित्सकों का मानना है कि जन्म से लेकर पहले छह महीने तक केवल माँ का दूध (Exclusive Breastfeeding) शिशु के लिए संपूर्ण आहार है, जिसमें पानी, शहद, घुट्टी या किसी अन्य बाहरी भोजन की आवश्यकता नहीं होती। यह न केवल बच्चे को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है, बल्कि उसे संक्रमणों, कुपोषण और कई गंभीर बीमारियों से भी बचाता है। इसलिए स्वास्थ्य विभाग लगातार माताओं और परिवारों को विशेष स्तनपान के प्रति जागरूक कर रहा है।
माँ के दूध में छिपी है स्वस्थ जीवन की पहली सुरक्षा कवच
महिला चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. उर्मिला कुमारी ने बताया कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और पहले छह महीने तक केवल माँ का दूध देना शिशु के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुरक्षा है। माँ के पहले गाढ़े पीले दूध (कोलोस्ट्रम) में प्राकृतिक एंटीबॉडी होती हैं, जो नवजात को संक्रमणों से बचाने में अहम भूमिका निभाती हैं।उन्होंने कहा की विशेष स्तनपान बच्चे के मस्तिष्क के विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता और सही शारीरिक वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक है। कई बार परिवार की गलत धारणाओं के कारण शिशु को पानी या अन्य पदार्थ दिए जाते हैं, जबकि इसकी कोई आवश्यकता नहीं होती। हर माँ को इस वैज्ञानिक तथ्य की जानकारी होना जरूरी है।
शुरुआती छह महीने का सही पोषण भविष्य की नींव तय करता है
सिविल सर्जन डॉ. राज कुमार चौधरी ने कहा कि किसी भी समाज के स्वस्थ भविष्य की शुरुआत नवजात के सही पोषण से होती है। यदि प्रत्येक शिशु को जीवन के पहले छह महीने तक केवल माँ का दूध मिले तो कुपोषण, दस्त, निमोनिया और अन्य संक्रामक बीमारियों के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।उन्होंने कहा की विशेष स्तनपान केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण विषय है। स्वास्थ्य विभाग आशा, एएनएम और स्वास्थ्यकर्मियों के माध्यम से गर्भवती एवं धात्री माताओं को लगातार परामर्श दे रहा है ताकि हर बच्चे को जीवन की सर्वोत्तम शुरुआत मिल सके। परिवार के सभी सदस्यों को भी माँ का सहयोग करना चाहिए।
सामुदायिक जागरूकता से ही बनेगा स्वस्थ और कुपोषण मुक्त समाज
बहादुरगंज प्रखंड के एक गांव की रहने वाली 24 वर्षीय रीना (परिवर्तित नाम) पहली बार माँ बनी थीं। आसपास के कई लोगों ने उन्हें नवजात को शहद और पानी देने की सलाह दी, लेकिन अस्पताल में प्रसव के बाद स्वास्थ्यकर्मियों ने उन्हें विशेष स्तनपान के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। रीना ने परिवार को भी इस बारे में बताया और जन्म के एक घंटे के भीतर ही बच्चे को स्तनपान शुरू कराया। अगले छह महीने तक उन्होंने केवल माँ का दूध ही दिया। परिणामस्वरूप बच्चा स्वस्थ रहा, उसका वजन सामान्य रूप से बढ़ता रहा और उसे बार-बार बीमार होने की समस्या भी नहीं हुई। आज रीना अपने गांव की अन्य गर्भवती महिलाओं को भी यही सलाह देती हैं कि बच्चे के लिए माँ के दूध से बेहतर कोई विकल्प नहीं है। सिविल सर्जन डॉ राज कुमार चौधरी ने जिले के सभी परिवारों से अपील की है कि वे जन्म के तुरंत बाद स्तनपान शुरू कराने, पहले छह महीने तक केवल माँ का दूध देने तथा किसी भी प्रकार की भ्रांति से बचने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों की सलाह का पालन करें। क्योंकि जीवन की सबसे मजबूत शुरुआत किसी महंगे आहार से नहीं, बल्कि माँ के पहले दूध से होती है, जो हर शिशु के लिए प्रकृति का सबसे अनमोल उपहार है।
स्तनपान से माँ और शिशु दोनों को होते हैं दीर्घकालिक लाभ
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. मंजर आलम ने बताया कि विशेष स्तनपान न केवल शिशु के लिए बल्कि माँ के स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी है। इससे प्रसव के बाद माँ के शरीर की रिकवरी बेहतर होती है, कई स्वास्थ्य जोखिम कम होते हैं और माँ-बच्चे के बीच भावनात्मक संबंध भी मजबूत बनता है।उन्होंने कहा की पहले छह महीने तक केवल माँ का दूध ही शिशु के लिए सर्वोत्तम पोषण है। इसके बाद छह माह पूरे होने पर ऊपरी पूरक आहार शुरू किया जाना चाहिए, लेकिन स्तनपान दो वर्ष या उससे अधिक समय तक जारी रखना लाभकारी रहता है। यदि हर परिवार इस सरल लेकिन वैज्ञानिक सलाह का पालन करे तो हजारों बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षित बचपन मिल सकता है। #viralpost #viralreelschallenge #viralchallenge #newyork #2026Goals #बिहार #allflowers #Kishanganj
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