*श्रृंगी ऋषि धाम: जहां राजा दशरथ ने कराया था पुत्रेष्टि यज्ञ*
*भगवान राम का हुआ था मुंडन संस्कार*
*आस्था, इतिहास और प्रकृति का है अद्भुत संगम*
लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा प्रखंड अंतर्गत बुधौली बनकर पंचायत की पहाड़ियों, झरनों और घने जंगलों के बीच स्थित श्रृंगी ऋषि धाम धार्मिक आस्था, पौराणिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है. मान्यता है कि त्रेतायुग में अयोध्या के महाराज दशरथ ने पुत्र प्राप्ति की कामना से यहीं महर्षि श्रृंगी के सान्निध्य में पुत्रेष्टि यज्ञ कराया था. इसी यज्ञ के फलस्वरूप भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म हुआ था. यही कारण है कि यह धाम हिंदू श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र माना जाता है.
*महर्षि श्रृंगी की तपस्या से प्रसन्न हुए थे अग्निदेव*
पौराणिक कथाओं के अनुसार राजा दशरथ को संतान प्राप्त नहीं हो रही थी. तब उन्होंने महर्षि श्रृंगी की शरण ली. महर्षि ने यहां कठोर तपस्या और विशेष यज्ञ संपन्न कराया. यज्ञ से प्रसन्न होकर अग्निदेव खीर से भरा दिव्य पात्र लेकर प्रकट हुए. राजा दशरथ ने वह खीर अपनी तीनों रानियों को ग्रहण कराई, जिसके प्रभाव से चारों राजकुमारों का जन्म हुआ.
*भगवान राम सहित चारों भाइयों का यहीं हुआ था मुंडन संस्कार*
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम, भरत, लक्ष्मण और शत्रुघ्न का मुंडन संस्कार भी इसी पवित्र धाम में संपन्न हुआ था. आज भी श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ण होने पर बच्चों का मुंडन संस्कार कराने के लिए दूर-दूर से यहां पहुंचते हैं.
*शिवलिंग, झरना और सीता कुंड बढ़ाते हैं धाम की महिमा*
श्रृंगी ऋषि धाम में प्राचीन शिवलिंग स्थापित है, जहां वर्षभर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना होती है. मान्यता है कि यहां स्थापित शिवलिंग भगवान श्रीराम के जन्म से भी पूर्व का है. परिसर में माता पार्वती, बजरंगबली और महर्षि श्रृंगी के मंदिर भी स्थित हैं. मंदिर के समीप पहाड़ियों से निकलने वाला प्राकृतिक झरना और पवित्र कुंड श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है. यहां स्थित सीता कुंड के बारे में मान्यता है कि इसके जल में स्नान करने से त्वचा संबंधी रोगों से राहत मिलती है.
*सावन, कार्तिक और शिवरात्रि में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़*
सावन माह, कार्तिक माह, अगहन माह, श्रीपंचमी और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. सामान्य दिनों में भी प्रतिदिन करीब दो हजार श्रद्धालु पूजा-अर्चना और दर्शन के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक आयोजनों के दौरान पूरा क्षेत्र हर-हर महादेव और जय श्रीराम के जयघोष से भक्तिमय हो उठता है.
*मोरवे डैम और प्राकृतिक सौंदर्य भी है आकर्षण*
धार्मिक महत्व के साथ-साथ श्रृंगी ऋषि धाम अपने प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी प्रसिद्ध है. पहाड़ियों की गोद में स्थित मोरवे डैम का मनोरम दृश्य पर्यटकों को खूब आकर्षित करता है. बरसात के मौसम में चारों ओर फैली हरियाली, कल-कल बहते झरने और झील जैसा नजारा यहां की खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देता है.
*सुविधाओं के अभाव से श्रद्धालु परेशान*
श्रृंगी ऋषि धाम की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, लेकिन यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव श्रद्धालुओं के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. साफ-सफाई की मुकम्मल व्यवस्था नहीं होने से आने वाले धर्मप्रेमियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. वहीं दुर्गम पहुंच पथ और जर्जर सड़क के कारण धाम तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है.
*वर्ष 2022 में बना नया कुंड*
मान्यता है कि धाम का पुराना कुंड त्रेतायुग से ही विद्यमान है. श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए वर्ष 2022 में यहां एक नए कुंड का निर्माण कराया गया, जिससे श्रद्धालुओं को काफी सहूलियत मिली है.
*बोले पुजारी*
श्रृंगी ऋषि धाम के पुजारी मृत्युंजय झा ने कहा कि धाम के सौंदर्यीकरण की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं हो रहे हैं. सड़क का रखरखाव नहीं होने से श्रद्धालुओं को काफी परेशानी होती है. रामायण कालीन महत्व वाले इस धाम के विकास के लिए सरकार और जिला प्रशासन को विशेष पहल करनी चाहिए. श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए धर्मशाला, शौचालय, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था आवश्यक है.
*तथ्य एक नजर में*
स्थान : बुधौली बनकर पंचायत, सूर्यगढ़ा प्रखंड, लखीसराय
दूरी : लखीसराय मुख्यालय से लगभग 23 किलोमीटर
विशेषता : राजा दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ स्थल होने की मान्यता
धार्मिक महत्व : भगवान राम सहित चारों भाइयों के मुंडन संस्कार का स्थल
प्रमुख आकर्षण : प्राचीन शिवलिंग, सीता कुंड, प्राकृतिक झरना और मोरवे डैम
विशेष अवसर : सावन, कार्तिक, अगहन, श्रीपंचमी और महाशिवरात्रि
आस्था, इतिहास और प्रकृति का संगम बना श्रृंगी ऋषि धाम आज भी श्रद्धालुओं और पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. उचित विकास और बेहतर सुविधाएं मिलने पर यह स्थल बिहार के प्रमुख धार्मिक-पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है.
*मंदिर में दर्शन का समय*
*मंदिर में सुबह 5 बजे से पूजन कार्य शुरू हो जाता है. शाम 6 बजे तक मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है
*पुलिस चौकी की आवश्यकता-*
स्थानीय लोगों का मानना है कि दुर्गम पहाड़ी इलाके में स्थित रामायण कालीन महत्व वाले इस धाम में सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं है. जहां पुलिस चौकी की स्थापना होनी चाहिए.
Lakhisarai, Lakhisarai | Jun 21, 2026