टेंपो चालक के बेटे ने फौज में पाई जगह, शाहपुरा के लाल सोनू धाकड़ का हुआ भव्य स्वागत
भीलवाड़ा/शाहपुरा :सुभाष व्यास
कहते हैं कि यदि हौसले बुलंद हों और लक्ष्य स्पष्ट हो तो परिस्थितियां कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। शाहपुरा के कालिंजरी गेट स्थित नहर के पास रहने वाले सोनू धाकड़ ने इस कहावत को चरितार्थ कर दिखाया है। एक साधारण परिवार से निकलकर भारतीय सेना में चयनित होकर उन्होंने अपने माता-पिता के साथ पूरे शाहपुरा का नाम रोशन किया है।
सोनू के पिता खाना राम धाकड़ टेंपो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने अपने बेटे के सपनों को पूरा करने में कोई कमी नहीं छोड़ी। सोनू ने भी अपने पिता के संघर्ष को प्रेरणा बनाते हुए सेना में भर्ती होने का सपना देखा और उसे साकार करने के लिए दिन-रात मेहनत की।
प्रतिदिन सुबह 3 बजे उठकर रामद्वारा के तक दौड़ लगाना, नियमित व्यायाम करना और खुद को शारीरिक व मानसिक रूप से मजबूत बनाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उनकी इसी लगन, अनुशासन और अथक परिश्रम का परिणाम रहा कि उनका चयन भारतीय सेना में हुआ।
सोनू ने एएससी सेंटर (नॉर्थ), बेंगलुरु में 5 जनवरी से 21 जून तक छह माह का कठोर सैन्य प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। 10वीं उत्तीर्ण बैच के आधार पर सेना में चयनित सोनू शैक्षणिक रूप से 12वीं पास हैं। उनकी सफलता क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है।
प्रशिक्षण पूरा कर आज पहली बार शाहपुरा लौटने पर सोनू धाकड़ का भव्य स्वागत किया गया। शाहपुरा में उनके सम्मान में धूमधाम से जुलूस निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में युवा, परिजन, मित्र एवं क्षेत्रवासी शामिल हुए। पूरे मार्ग में देशभक्ति के नारों की गूंज सुनाई दी और लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका अभिनंदन किया।
जगह-जगह स्वागत द्वार लगाए गए तथा नागरिकों ने मालाएं पहनाकर सोनू का सम्मान किया। इस दौरान पटाखे छोड़े गए, मिठाइयां बांटी गईं और लोगों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर खुशी का इजहार किया। पूरे क्षेत्र में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला।
ग्रामीणों ने कहा कि टेंपो चालक के बेटे का सेना में चयन यह साबित करता है कि मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर कोई भी युवा अपने सपनों को साकार कर सकता है। सोनू की सफलता ने क्षेत्र के युवाओं में नया उत्साह और देशसेवा की भावना जगाई है।
आज शाहपुरा का यह लाल ने केवल अपने परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गया है। सोनू धाकड़ की सफलता यह संदेश देती है कि सच्ची लगन, कठोर परिश्रम और मजबूत इरादों के आगे हर कठिनाई छोटी पड़ जाती है।