*लंगट सिंह महाविद्यालय परिसर में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रस्तावित गेट निर्माण का कांटी विधायक अजीत कुमार ने निर्माण स्थल का किया निरीक्षण,*
*विश्वविद्यालय प्रशासन से निर्माण रोकने की मांग***
**मुजफ्फरपुर।** लंगट सिंह महाविद्यालय परिसर में विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा प्रस्तावित गेट निर्माण को लेकर विवाद गहरा गया है। निर्माण के विरोध में पूर्व मंत्री एवं कांटी विधायक ई. अजीत कुमार और नगर विधायक रंजन कुमार कॉलेज परिसर पहुंचे। दोनों विधायकों ने निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान महाविद्यालय के सैकड़ों वर्तमान एवं पूर्ववर्ती छात्र भी मौजूद रहे। विधायकों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताते हुए निर्माण कार्य को रोकने की मांग की।
निरीक्षण के दौरान कांटी विधायक ई. अजीत कुमार ने कहा कि लंगट सिंह महाविद्यालय मुजफ्फरपुर का गौरव और उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र है। इसकी ऐतिहासिक पहचान और शैक्षणिक व्यवस्था को बर्बाद नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि विकास के नाम पर पहले से ही कॉलेज के छात्रावास, लाइब्रेरी और लैब बंद हो चुके हैं। विश्वविद्यालय ने पहले ही महाविद्यालय की जमीन और कई भवनों पर कब्जा कर रखा है। अब कॉलेज की जमीन के अंदर गेट का निर्माण कराया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
वहीं, नगर विधायक रंजन कुमार ने कहा कि लंगट सिंह महाविद्यालय की जमीन पर अतिक्रमण करने का कानूनी अधिकार कुलपति को नहीं है। इसी तरह महाविद्यालय की भूमि दान करने अथवा निर्माण कार्य की अनुमति देने का अधिकार प्राचार्य को भी नहीं है। उन्होंने प्रस्तावित निर्माण को अवैध बताते हुए कहा कि इसे रोकने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे।
इस दौरान मौजूद वर्तमान एवं पूर्ववर्ती छात्रों ने भी प्रस्तावित गेट निर्माण पर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से निर्माण कार्य तत्काल रोकने और पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की मांग की।
छात्रों का कहना है कि लंगट सिंह महाविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि बिहार की गौरवशाली शैक्षणिक विरासत का प्रतीक है। इसकी ऐतिहासिक पहचान, गरिमा और परिसर से जुड़े किसी भी निर्णय में छात्रों, पूर्ववर्ती छात्रों एवं महाविद्यालय परिवार की भावनाओं और हितों का सम्मान किया जाना चाहिए।
छात्रों एवं जनप्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से गेट निर्माण का फैसला तत्काल वापस लेने और छात्रों की आपत्तियों पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है। अब इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन का अगला कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।