बछवाड़ा प्रखंड स्थित झमटिया श्मशान घाट पर गंगा का जलस्तर बढ़ने से दाह संस्कार करने में परेशानी हो रही है। लोग मजबूरन बांध के किनारे अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
गंगा का पानी अपने उच्चतम स्तर को पार कर गया है, जिससे चारों ओर जलमग्न हो गया है। श्मशान घाट में जगह नहीं बची है, इसलिए लोगों को बांध के ऊपरी हिस्से में ही अंतिम संस्कार करना पड़ रहा है।
दस साल पहले झमटिया गंगा घाट पर लाखों रुपये खर्च करके शवदाह गृह बनाए गए थे। लेकिन, इनका कभी उद्घाटन नहीं हुआ और अब ये खंडहर बन चुके हैं। इससे लोगों को अंतिम संस्कार के लिए भटकना पड़ता है। गंगा का जलस्तर बढ़ने से अब हालात और खराब हो गए हैं।
अंतिम संस्कार के लिए आए विभूतिपुर प्रखंड के महेशी गांव निवासी अरविंद राय, प्रभात कुमार, प्रवीण कुमार और दलसिंहसराय प्रखंड के खेसराहा गांव निवासी भुवनेश्वर कुमार ने अपनी परेशानी बताई। उन्होंने कहा कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण उन्हें मजबूरन बांध पर संस्कार करना पड़ रहा है। यहां तक कि खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती। उनका कहना था कि अगर झमटिया श्मशान घाट पर शवदाह गृह बने होते, तो लोगों को इतनी दिक्कत नहीं होती।
श्मशान घाट पर मौजूद प्रकाश मल्लिक ने बताया कि गंगा का जलस्तर बढ़ने से दाह संस्कार की संख्या कम हो गई है। पहले जहां दिन भर में 20 से 25 शव आते थे, अब सिर्फ 8 से 10 ही आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि जगह की कमी के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। अगर सरकारी स्तर पर श्मशान घाट की व्यवस्थाएं ठीक कर दी जाएं, तो बेहतर होगा।
स्थानीय निवासी विकास कुमार ने बताया कि लाखों रुपये खर्च कर शवदाह गृह बनाए गए थे। लेकिन, आज तक उनका उद्घाटन नहीं हुआ और वहां एक भी अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है।
लेकिन क्षेत्र के सांसद, विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी इन मूलभूत समस्याओं पर कोई पहल नहीं करते हैं।