प्रतापगढ़ की नगर पंचायत हीरागंज में शहरी आवास योजना में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। गरीब और बेघर परिवारों को छत मुहैया कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही इस योजना में अपात्र लोगों को लाभ दिए जाने और पहली किस्त जारी होने के बाद अवैध वसूली के आरोप लगे हैं। बुधवार को हुई प्रशासनिक जांच में कई आरोप सही पाए गए, जिससे हड़कंप मच गया।
वार्ड नंबर-4 निवासी लालजी यादव ने जिलाधिकारी प्रतापगढ़ को शिकायत पत्र सौंपा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि आवास योजना के चयन में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है। शिकायत में कहा गया था कि आर्थिक रूप से सक्षम और पहले से पक्के मकानों में रहने वाले लोगों को भी योजना का लाभ दिया गया, जबकि वास्तविक पात्र अभी भी सहायता से वंचित हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ लाभार्थियों से पहली किस्त मिलने के बाद 40 हजार रुपये तक की अवैध वसूली का आरोप भी लगाया गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी कुंडा ने एक जांच टीम गठित की। नायब तहसीलदार मानिकपुर, लालमणि सरोज के नेतृत्व में लेखपालों की टीम ने नगर पंचायत हीरागंज पहुंचकर कई लाभार्थियों के घरों का भौतिक सत्यापन किया। जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ लाभार्थियों के पास पहले से ही पक्के और दो मंजिला मकान मौजूद थे, फिर भी उन्हें योजना का लाभ दिया गया।
जांच के दौरान स्थिति उस समय तनावपूर्ण हो गई, जब कुछ महिलाएं शिकायतकर्ता से उलझ गईं। आरोप है कि शिकायतकर्ता के साथ अभद्रता और गाली-गलौज की गई, तथा उसके घर तक पहुंचकर हंगामा किया गया। सूचना मिलने पर डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाकर स्थिति को शांत कराया।
इस हंगामे के कारण प्रशासनिक टीम पूरी जांच नहीं कर सकी और आंशिक सत्यापन के बाद वापस लौट गई। नायब तहसीलदार लालमणि सरोज ने बताया कि प्रारंभिक जांच में शिकायत के कुछ बिंदु सही पाए गए हैं। विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी और डूडा विभाग को भेजी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।