जियो-टैग गांव में, सचिव ने बताया गौशाला के पास;
मौके पर नंदन वन गायब! ₹2.24 लाख भुगतान ने बढ़ाए सवाल
डकोर विकासखंड की ग्राम पंचायत बंधौली में नंदन वन स्थापना के नाम पर सरकारी धन खर्च होने का मामला अब जांच के घेरे में है।
पंचायत पोर्टल पर दर्ज विवरण के अनुसार वर्क आईडी 88065126 के तहत नंदन वन स्थापना का कार्य दर्ज है।
कार्य की अनुमानित लागत ₹2,35,000 और दर्ज व्यय ₹2,24,663 बताया गया है।
पोर्टल पर कार्य का उद्देश्य चरागाह में नंदन वन हेतु भुगतान दर्ज है।
वहीं भुगतान विवरण में ₹22,000 की एक भुगतान प्रविष्टि दिखाई दे रही है।
भुगतान संबंधी रिकॉर्ड में वाउचर नंबर 5THSFC/2023-24/P/17, दिनांक 26 अक्टूबर 2023 भी दर्ज है।
यहीं से पूरा मामला सवालों के घेरे में आता है।
रिकॉर्ड कुछ और, सचिव की बताई लोकेशन कुछ और
पड़ताल के दौरान सामने आया कि नंदन वन की जियो-टैग लोकेशन गांव के अंदर दिखाई जा रही है।
जब टीम ने जियो-टैग के आधार पर मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी तो वहां नंदन वन के नाम पर कोई स्पष्ट विकसित स्थल नजर नहीं आया।
इसके बाद संबंधित ग्राम पंचायत सचिव से नंदन वन की लोकेशन पूछी गई।
सचिव ने बताया कि नंदन वन गांव के अंदर नहीं, बल्कि गांव से करीब तीन किलोमीटर दूर गौशाला के पास बनाया गया है।
टीम जब सचिव द्वारा बताई गई जगह पर पहुंची तो वहां भी काफी दूर तक नंदन वन नजर नहीं आया।
मौके पर सामान्य घास-फूस और प्राकृतिक वनस्पति दिखाई दी, लेकिन ₹2 लाख से अधिक की लागत वाले विकसित नंदन वन जैसी कोई स्पष्ट व्यवस्था दिखाई नहीं दी।
₹2.24 लाख खर्च होने के बाद भी सवाल जस के तस
पंचायत पोर्टल के अनुसार नंदन वन स्थापना पर ₹2,24,663 का व्यय दर्ज है।
ऐसे में सवाल यह है कि इतनी बड़ी धनराशि खर्च होने के बाद पौधे कहां हैं?
नंदन वन की सीमा कहां है? पौधरोपण कहां हुआ?
उसकी सुरक्षा व्यवस्था कहां है?
यदि नंदन वन वास्तव में चरागाह में स्थापित किया गया है तो उसकी वास्तविक लोकेशन और जियो-टैग रिकॉर्ड में अंतर क्यों दिखाई दे रहा है?
क्या कार्य का मौके पर भौतिक सत्यापन हुआ था?
भुगतान रिकॉर्ड भी जांच का विषय
पोर्टल पर दर्ज भुगतान विवरण में चरागाह में नंदन वन हेतु भुगतान का उद्देश्य दर्ज है। भुगतान रिकॉर्ड में ₹22,000, बैंक खाते के अंतिम अंक 2476, वाउचर संख्या और अधिकारियों/कर्मचारियों के डिजिटल हस्ताक्षर से संबंधित विवरण भी प्रदर्शित हो रहे हैं।
अब जरूरत इस बात की है कि जिम्मेदार अधिकारी पूरे भुगतान की वर्क आईडी से लेकर एमबी, बिल-वाउचर, जियो-टैग फोटो, पौधरोपण की संख्या, पौधों की वर्तमान स्थिति और भुगतान की पूरी श्रृंखला की जांच करें।
सबसे बड़ा सवाल—नंदन वन आखिर है कहां?
एक तरफ पंचायत पोर्टल पर नंदन वन स्थापना का कार्य और लाखों रुपये का खर्च दर्ज है, दूसरी तरफ जियो-टैग की लोकेशन और सचिव द्वारा बताई गई जगह में अंतर सामने आ रहा है, जबकि मौके पर नंदन वन स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता।
तो आखिर ₹2,24,663 खर्च होने के बाद नंदन वन है कहां?
क्या सिर्फ कागजों में नंदन वन तैयार कर दिया गया?
क्या जियो-टैगिंग गलत स्थान की हुई?
क्या मौके का भौतिक सत्यापन किए बिना भुगतान कर दिया गया?
या फिर नंदन वन किसी ऐसी जगह मौजूद है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक रिकॉर्ड और मौके की पड़ताल से सामने नहीं आ रही?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
अब देखना यह है कि जिलाधिकारी जालौन, मुख्य विकास अधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी और खंड विकास अधिकारी डकोर इस मामले में मौके का भौतिक सत्यापन कराकर सरकारी धन के खर्च की वास्तविकता सामने लाते हैं या फिर पंचायत पोर्टल पर दर्ज आंकड़े ही अंतिम सच माने जाते रहेंगे।
फिलहाल सवाल सीधा है—कागजों में लाखों का नंदन वन, लेकिन जमीन पर उसकी तलाश क्यों?
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Jalaun, Jalaun | Sep 7, 2026